उदय बुलेटिन
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Metoo के बाद अब ट्रेंड में आया Mentoo, महिलाएं भी दे रही हैं साथ

पूरे विश्व में महिलाओं के साथ हो रहे अपराध को लेकर जो MeToo की मुहिम चली थी अब उसके बाद पुरुषों के लिए Mentoo अभियान जोर पकड़ने लगा है। 

Puja Kumari

Puja Kumari

यह जमाना सोशल मीडिया का है और ऐसे में आपने इस प्लेटफॉर्म पर पिछले एक साल में कई बार #Metoo का नाम सुना होगा, और सुनते-सुनते ये तो आप जान ही चुके होंगे कि #Metoo एक अभियान है जिसके जरिए महिलाएं अपने साथ हो रहे यौन अपराध के बारे में सोशल मीडिया पर खुलेआम बात करती हैं। #Metoo का अर्थ होता है 'मैं भी' या 'मेरे साथ भी', इस अभियान की शुरूआत भारत में साल 2018 के सितंबर माह से हुई जहां कई सारी भारतीय महिलाओं ने अपने साथ हुए यौन उत्पीड़न की घटनाओं को लोगों के साथ शेयर किया। धीरे-धीरे इस अभियान में कई बड़ी हस्तियों का नाम भी शामिल हो गया और ये देखते ही देखते इस मूवमेंट ने काफी बृहद रूप ले लिया।

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#Metoo के बाद अब #Mentoo

जहां पहले कई महिलाएं जिनके साथ गलत होता था वो डरकर चुप रह जाती थी पर अब ऐसा नहीं है। महिलाओं की दृष्टि से देखा जाए तो ये बेहद ही अच्छा माध्यम बना है और चाहे कोई भी इंडस्ट्री हो अब कोई भी पुरूष उनका शोषण करने से पहले सोचने लगा है। लेकिन ये कोई नहीं जानता था कि आगे चलकर इसका दुरूपयोग भी होने लगेगा।

जैसे-जैसे ये कैंपेन आगे बढ़ता गया वैसे-वैसे कुछ महिलाओं ने झूठे आरोप लगाकर पुरूषों को फंसाना भी चाहा और अब ये मामला इतना बढ़ गया है कि इसके खिलाफ में #Mentoo कैंपेन की शुरूआत की गई। जी हां ये सुनने में #Metoo कैंपेन के जैसा जरूर लग रहा होगा लेकिन ये उससे बिल्कुल विपरीत है। हालांकि ये अभियान पुरूषों के लिए है, लेकिन खास बात तो ये है कि इस कैंपेन को बढ़ावा देने के लिए खुद महिलाएं भी आगे आ रही हैं।

क्या है #Mentoo कैंपेन

सबसे पहले तो ये बता दें कि #Mentoo अभियान की शुरूआत चिल्ड्रन राइट्स इनिशिएटिव फॉर शेयर्ड पेरेंटिंग (Crisp) नाम के एक NGO ने की है। यह विशेषतौर पर उन पुरूषों को लेकर शुरू किया गया है जो महिलाओं द्वारा लगाए गए झूठे व गलत आरोप में फंस गए और निर्दोष होने के बावजूद उनको सजा भुगतनी पड़ी। #Mentoo कैंपेन के समर्थकों का मानना है कि महिलाओं की सुरक्षा के लिए जो कानून बनाए गए उससे कई बार पुरूषों को परेशान होना पड़ रहा है।

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ये सिर्फ उन कानूनों के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं जो एकतरफा है और जिसकी वजह से सिर्फ महिलाओं के पक्ष को ही ज्यादा महत्व दिया जाता है, यही कारण है कि कुछ महिलाएं यौन उत्पीड़न, रेप और दहेज जैसे आरोप में फंसे पुरूषों की जिंदगी बर्बाद कर देती है। इस संगठन का कहना है कि यहां महिला व पुरूष को एक समान अधिकार मिलना चाहिए इसलिए इनकी लड़ाई समानता को लेकर है। भारत देश में हर नागरिक को समान अधिकार प्राप्त हैं जिसे महिला व पुरूष में विभाजित नहीं करना चाहिए।