चंद्रयान-2 मिशन: विदेशी मीडिया ने इस तरह की कवरेज ! 

चंद्रयान-2 मिशन पर थी पूरी दुनिया की नजर, किसने क्या कहा जानें।
चंद्रयान-2 मिशन: विदेशी मीडिया ने इस तरह की कवरेज ! 
Mission Chandrayan 2Uday Bulletin
Summary

चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर भारत के महत्वाकांक्षी अभियान चंद्रयान-2 ने वैश्विक स्तर पर सुर्खियां बटोरी, हालांकि मिशन का लैंडर-विक्रम का चांद की धरती पर सॉफ्ट लैंडिंग करने से पहले ही इसरो से संपर्क टूट गया।

न्यूयॉर्क टाइम्स ने भारत के इंजीनियरिंग कौशल और वैश्विक महत्वाकांक्षाओं के साथ दशकों के अंतरिक्ष विकास कार्यक्रम की सराहना की।

न्यूयॉर्क टाइम्स:

हालांकि भारत अपने पहले प्रयास में लैंडिंग नहीं करा पाया, लेकिन इसका प्रयास बताता है कि कैसे इसके इंजीनियरिंग कौशल और दशकों के अंतरिक्ष विकास ने इसके वैश्विक महत्वाकांक्षा को एकाकार कर दिया है।
चंद्रयान-2 परियोजना की आंशिक विफलता से देश को उन विशिष्ट देशों के क्लब में आने की कोशिश में देरी होगी, जो चंद्रमा की सतह पर सही-सलामत उतरे थे।

अमेरिकी पत्रिका वायर्ड:

अमेरिकी पत्रिका वायर्ड ने चंद्रयान-2 मिशन को भारत का अबतक का सबसे महत्वाकांक्षी अंतरिक्ष मिशन बताया।

वायर्ड के ऑनलाइन संस्करण ने कहा कि परियोजना के लिए सबकुछ खत्म नहीं हुआ है।

वायर्ड ने कहा, "चंद्रमा की सतह पर विक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोवर का उतरने से पहले संपर्क टूट जाना भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए एक बड़ा झटका है..लेकिन मिशन के लिए सबकुछ समाप्त नहीं हुआ है।"

वाशिंगटन पोस्ट:

वाशिंगटन पोस्ट ने कहा कि भारत ने चंद्रमा पर उतरने की कोशिश के दौरान अपने लैंडर से संपर्क खो दिया।

अखबार ने कहा, "घटना भारत के बढ़ते अंतरिक्ष महत्वाकांक्षा के लिए एक बड़ा झटका है, जिसे इसकी नौजवान आबादी की महत्वाकांक्षा के तौर पर देखा जा रहा था।"

अखबार ने कहा है, "भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की सफलता इसकी कम लागत है। चंद्रयान-2 की लागत 14.1 करोड़ डॉलर(141 मिलियन डॉलर) थी, जो अमेरिका द्वारा अपोलो चंद्रमा मिशन पर खर्च किए राशि का छोटा सा अंश है।"

बीबीसी:

बीबीसी के अनुसार, मिशन ने वैश्विक सुर्खियां इसके बहुत कम लागत की वजह से बटोरी।

बीबीसी ने कहा, "एवेंजर:इंडगेम का बजट एक उदाहरण के लिए 356 मिलियन डॉलर(35.6 करोड़ डॉलर) था, जो कि चंदयान-2 की लागत से लगभग दोगुना था। लेकिन ऐसा पहली बार नहीं है कि कम लागत के लिए इसरो की सराहना की गई है। इसके 2014 के मंगल मिशन की लागत केवल 7.4 करोड़ डॉलर(74 मिलियन डॉलर) थी, जोकि अमेरिकन मावेन आर्बिटर के बजट का 10वां भाग था।"

दैनिक ले मोंडे:

फ्रांस के दैनिक ले मोंडे ने इसे एक 'ब्रोकेन ड्रीम' बताया और कहा कि भारत के अखबार इस घटना के बाद तुरंत अपनी वेबसाइट पर संतुलन साधने की कोशिश करने लगे।

अखबार ने कहा कि चंद्रमा पर सॉफ्ट लैंडिंग की सफलता दर के बारे में वैज्ञानिकों का कहना है कि केवल 45 प्रतिशत मिशन ही सफल होते हैं।

Mission Chandrayan 2
चंद्रयान 2: विक्रम के लैंडिंग के दौरान अंतिम समय में यहां हो गई समस्या

⚡️ उदय बुलेटिन को गूगल न्यूज़, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें। आपको यह न्यूज़ कैसी लगी कमेंट बॉक्स में अपनी राय दें।

Related Stories

उदय बुलेटिन
www.udaybulletin.com