रावण उधेड़बुन में है कि आखिर खुद रावणों की भीड़ उसे जलाने पर क्यों आमादा है?

रावण को मारने की लिए राम बनना होगा, रावण को रावण नहीं मार सकता
रावण उधेड़बुन में है कि आखिर खुद रावणों की भीड़ उसे जलाने पर क्यों आमादा है?
Ravan vadhGoogle Image

हालाँकि अगर धार्मिक ग्रंथों का सहारा लिया जाए तो जानकारी मिलती है कि मर्यादा पुरुषोत्तम ने रावण को कार्तिक महीने में मारा ही नहीं था बल्कि चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी अर्थात ग्रीष्म ऋतु में उसका वध किया था लेकिन कतिपय कारणों और लोगों के विश्वास के कारण विजयदशमी को भी रावण वध का दिन मान लिया गया, खैर बात रावण के मरने और जिंदा रहने की नहीं है, असल बात यह है कि क्या हमें रावण को जलाने का अधिकार भी है, दरअसल हर साल जलने वाला रावण लोगों से सवाल करता हैं कि आखिर क्या वजह है जो उसे हर बार जलाया जाता है , क्या जलाने वालों के अंदर किसी कोने में कोई राम छुपा है?

जिस देश मे दुधमुंही बच्चियों का रेप होता हो वहां जिंदा रावण जलने चाहिए:

आप रोज सुबह आने वाले अखबार के पन्ने पलटिये और यकीन मानिए की किसी न किसी पन्ने पर आपको बच्चियों के साथ भीषण दुर्व्यवहार की घटनाएं नजर आ ही जाएंगी, कही किसी भी बच्ची को चाकलेट देने के बहाने बुलाकर रेप और हत्या जैसे कुकृत्य को अंजाम दिया जाएगा तो कहीं राह चलती किशोरी को अपनी हवस का शिकार बनाया जाएगा, आश्चर्य की बात तो यह भी है कि ये वो घटनाएं है जो हो हल्ला मचने पर पुलिस और मीडिया के संज्ञान में आती है, एक आकलन के हिसाब से करीब 30 प्रतिशत घटनाएं तो लोक लाज की वजह से या तो रिपोर्ट नहीं होती या उन्हें जबरन दबा दिया जाता है। कई मामलों में तो खुद पुलिस मुकदमा पंजीकरण से ही मना कर देती है ताकि जांच न करनी पड़े और अगर मुकदमा पंजीकृत भी हो गया तो आरोपी लंबे वक्त तक पुलिस की पकड़ से बाहर रहकर मामले को दबाने की पुरजोर कोशिश करते हुए नजर आते है। इस तरह की वारदातों में सिर्फ आम अपराधी सीमित नहीं है, मजारों के फकीरों, आश्रमों के बाबाओं और राजनेताओं तक के नाम शामिल है जो सफेद कॉलर होकर अपने कुकृत्यों को अंजाम देते रहते हो, फिर चाहे वह संवासिनी ग्रह का मामला हो या और कोई , इस तरह की घटनाओं पर हम किसी रावण से कमतर थोड़ी नजर आते है।

जातिवाद और वर्तमान:

वर्तमान में हम उस सदी के वाहक है जो चांद और मंगल तक पहुँचने की बात करते है लेकिन क्या यह सच मे जायज लगता है, जहाँ पीने के पानी को लेकर समुदायों में छुआछूत का जहर घुला हुआ नजर आता है और इस जहर की मारक क्षमता बढ़ाने का कार्य करते है आज की राजनीति के राजनेता जिन्होंने लंबे वक्त से समाज को घुट्टियाँ पिलाई है और समाज एक लंबे मुगालते में रहकर जी रहा है कि उक्त राजनेता उसकी और उसके समुदाय की भलाई के लिए काम कर रहा है लेकिन सच्चाई असलियत से बेहद दूर है, इतिहास गवाह है कि आजाद भारत मे किसी राजनेता द्वारा जातिवाद को लेकर न तो कोई सही और सार्थक कदम उठाया गया है हा ये बात अलग है कि मौके बेमौके सत्ता की कुर्सी पर बैठकर रोटियां जरूर तोड़ी जाती रही है फिर चाहे वह सत्तारूढ़ पार्टी के नेता हो या विपक्ष के सभी ने अपनी अपनी सुविधानुसार लोगों की भावनाओं के साथ खेलकर अपना उल्लू सीधा किया है, अगर रावण के हिसाब से सोचे तो हमारे राजनेता उससे भी कही ज्यादा गए बीते नजर आते है।

रावण को राम जलाए रावण क्यों?

जिस देश मे सीता घड़ों में न मिलकर झाड़ियों के किनारे प्लास्टिक की पॉलीथिन में पड़ी हुई नजर आती है, कुत्ते जिसे अपना शिकार समझकर नोचते खसोटते नजर आते है उनको रावण को जलाने का कैसा हक ?

जिस महायुद्ध में श्री राम ने रावण जैसे शत्रु के जमीन पर गिरने के बाद भी अनादर नहीं किया उस देश मे एक दूसरे के धर्म के प्रति ऐसी घृणा ?

जहाँ गौतस्करी के नाम पर लोगों की लिंचिंग की जाती हो, मुहम्मद साहब के खिलाफ एक शब्द बोलने पर गला रेत दिया जाता हो और इस तरह के मामलों को लेकर अपने पक्ष का महिमामंडन किया जाता हो वहां राम के होने की उम्मीद शायद कम ही नजर आती है।

दशहरा स्नेह का पर्व है जिसमें शत्रु को भी पान का पत्ता खिलाकर मित्र बनाया जाता हो, अन्याय के ऊपर न्याय की विजय के पर्व रूप में होने वाला यह त्योहार हमसे लाखों सवाल कर जाता है, आओ बाहरी रावण को मारने जलाने से पहले अपने अंदर के रावण को मार दे, उसे जलाए, समाज मे छुपे हुए मारिचों को बाहर निकाल कर उन्हें दंडित करे ताकि रात के अंधेरे में जाती हुई सीता को किसी रावण का डर न सताए, उसे बिना किसी लक्ष्मण रेखा के भी निर्भीक होकर घूमने का अधिकार प्राप्त हो, हमें रावण को मारने से राम बनना होगा, जिसमें न तृष्णा हो, न राज्य की लालसा, केवल जनकल्याण निहित हो, फिर हमें रावण को जलाने की जरूरत भी नही होगी, रावण हमारी स्थिति देखकर खुद शर्म से जलकर मर जाएगा।

⚡️ उदय बुलेटिन को गूगल न्यूज़, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें। आपको यह न्यूज़ कैसी लगी कमेंट बॉक्स में अपनी राय दें।

Related Stories

उदय बुलेटिन
www.udaybulletin.com