IIM Bangalore Protest
IIM Bangalore Protest|Social Media
नजरिया

जनाब ये आईआईएम है जहाँ विरोध का तरीका भी बिल्कुल वैसा है, जैसा उनसे अपेक्षा की जाती है।  

प्रोटेस्ट के नाम पर हिंसा फ़ैलाने वालों को आईआईएम से कुछ सीखना चाहिए।

Shivjeet Tiwari

Shivjeet Tiwari

Summary

देखिए एक जामिया विश्वविद्यालय है जहाँ अच्छा खासा बवाल कटा, फिर क्या था पुलिस पर पत्थर बरसाये गए जवाब में अपनी पुलिसिया हरकत दिखाई, नतीजन अच्छा खासा ड्रामा हो गया। पुलिस ने कथित तौर पर विवि में घुस कर छात्रों को कूटा, लेकिन विरोध का तरीका कुछ इस तरह भी हो सकता है ये सिर्फ आईआईएम वाले ही कर सकते है।

19 दिसंबर की तारीख, देश के बहुत सारे स्थानों पर नागरिकता से संबंधित कानून के विरोध में प्रदर्शन किए गए सबसे ज्यादा इस विरोध में विश्वविद्यालय के छात्रों ने अपनी भूमिका प्रस्तुत की देश मे प्रदेश की सरकारों ने किसी बड़े आंदोलन से बचाव के लिए इंटरनेट जैसी त्वरित प्रसारक इंटरनेट सेवा को बंद किया गया और सीआरपीसी की धारा 144 लगाई गई। इस धारा का प्रयोग अधिकतर किसी दंगे की मूल आशंका को रोकने के लिए प्रयोग किया जाता है सो इस प्रकार से सरकार ने आईआईएम बैंगलुरू के छात्रों के सामने एक सवाल खड़ा कर दिया।

आईआईएम के प्रशासन ने साफ कहा, कोई प्रोटेस्ट नही :

चूंकि आईआईएम के विशिष्ट शिक्षण संस्थान है और देश में सबसे उम्दा शिक्षण देने के लिए जाना जाता है उसपर कालेज के डीन नर्सिम्भन ने साफ-साफ कह दिया कि किसी भी स्थिति में कॉलेज के अंदर और बाहर प्रोटेस्ट नहीं किया जाएगा इस पर कालेज प्रशासन के अपने वाजिब तर्क थे कि

"अगर छात्र संस्थान के बाहर जाकर किसी विरोध को अंजाम देते है तो यकीनन स्थानीय पुलिस शान्तीभंग के आरोप में धारा 144 को आधार बना कर गिरफ्तार करेगी, अगर इस दौरान कोई हिंसा हुई तो हर प्रकार से मामला गलत ही हो जाएगा, इस लिए कालेज प्रशासन ने सीधे तौर से इस प्रकार के प्रदर्शन की मनाही कर दी "

फिर क्या था छात्रों ने अपने जूते-चप्पल विरोध के लिए भेज दिए :

जनाब आईआईएम और आईआईटी जिस लिए फेमस है, बैंगलोर आईआईएम ने अपने नाम के हिसाब से काम किया और प्रोटेस्ट के नाम पर संस्थान के मुख्य गेट के बाहर एक अजीब प्रकार का नजारा पेश कर दिया।

छात्रों ने मुख्य गेट के बाहर करीने से बिल के विरोध में लिखी हुई तख्तियां सजाई और अपने जूते चप्पल इस तरह से लगाये की जैसे कोई उन्हें पहने हुए खड़ा है, गेट के पहले संस्थान के नादर छात्र अपने स्मार्टफोन की फ्लैश लाइट जलाकर शांतिपूर्ण विरोध करते रहे।

अलग नजारा फैल गया, पुलिसकर्मी भी बेहद खुश दिखे :

अगर इस प्रदर्शन पर गौर फरमाएं तो संस्थान के पास ऐतिहातन पुलिस तो तैनात थी लेकिन किसी पुलिसकर्मी के चेहरे पर शिकन नही थी। सब माहौल शांत था, कोई हो हल्ला नही, छात्रों ने दिमाग का इस्तेमाल करके संस्थान के डीन के आदेश की लाज भी रखी, विरोध भी किया, कोई हिंसा भी नही हुई,

इस तरह के मामले को लेकर चारो तरफ चर्चे है।

एक ओर जहां देश मे अफवाहों को आधार बनाकर नया आतंक का बाजार खड़ा किया जा रहा है पर्चो के संबंध में न्यूज संपादक सुधीर चौधरी ने एक ट्वीट किया है जिसमे इस प्रकार का पर्चा दिखाया गया है।

  • आज के माहौल में आईआईएम के इस कदम से बड़ा सुकून मिलता है।

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उदय बुलेटिन
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