The Wire RTI Ple on PM Cares fund
The Wire RTI Ple on PM Cares fund|Image Source: The wire and Google Image (Edited)
नजरिया

द वायर पत्रकारिता छोड़ आरटीआई दाखिल करने जुट गया है।

लोगों के अनुसार जिन्होंने देश की आपदा के समय एक धेला नहीं दिया वो देश के दानदाताओं के दिये हुए पैसों का हिसाब मांग रहे हैं। लोगों को समस्या इस बात से है कि आखिर द वायर खुद को अपोजिशन की तरह देख रहा है

Shivjeet Tiwari

Shivjeet Tiwari

पीएम केयर फंड का है बवाल:

दरअसल जिस दिन से प्रधानमंत्री मोदी ने नए आपदा कोष "पीएम केयर्स" की घोषणा की उसी दिन से ही विपक्षी दलों समेत देश के एक वर्ग को इस कोष से आपत्ति है जिसकी वजह से आपदा में मदद के लिए बने इस फंड को लेकर खोजबीन से लेकर आरोप प्रत्यारोपों का सिलसिला जारी है। सत्ता की कुर्सी से दूर कांग्रेस को इस फंड के होने को लेकर भी आपत्ति है। विपक्षी दलों को लगता है कि इस कोष में आये हुए पैसो का दुरुपयोग हो सकता है। मजे की बात यह है कि जानकारों के हिसाब से यह विरोध सिर्फ इसलिए है क्योंकि इस फंड में विपक्ष के लोगों का कोई हस्तक्षेप नहीं है इसी कारण से यह बवाल खड़ा किया जा रहा है।

पीएम केयर्स प्रधानमंत्री आपदा राहत कोष से कैसे अलग है?

प्रधानमंत्री आपदा राहत कोष भारत की आमजनता की उस वक्त मदद करने के लिए बना है जहाँ पर जनता की रक्षा के लिए बाढ़, भूकंप, सूखा, विशेष चिकित्सा और विशेष शल्य चिकित्सा के समय उपयोग में लाया जाता है।

इस कोष की गवर्निंग कमेटी में सत्ता पक्ष के प्रधानमंत्री, मंत्री, विपक्षी दल और अन्य लोग शामिल होते हैं और इन सभी के सहमति के द्वारा ही विशेष परिस्थितियों में धन निर्गत किया जा सकता है। इस कोष का निर्माण 1948 में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के द्वारा बाढ़, चक्रवात, भूकंप, तथा बड़ी दुर्घटनाओं से प्रभावित लोगों की मदद के लिए किया गया था। इस फंड में किसी भी प्रकार से देश के बजट की भूमिका नहीं होती।

कुलमिलाकर सरकार के द्वारा इसमें कुछ भी नहीं दिया जाता लेकिन चूंकि कमेटी में बहुत सारे अलग-अलग विचारधारा के लोग शामिल होते है और धन निर्गत करते वक्त हमेशा देर सबेर हो जाती थी। शायद यही मुख्य कारण रहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नए राहत कोष की स्थापना की। इस नए राहत कोष (pm cares fund) का मुख्य उद्देश्य किसी बड़ी आपदा या कोविड 19 जैसी महामारी से निबटने के लिए किया गया है।

पीएम केयर की सबसे बड़ी बात यह है कि इस कोष में प्रधानमंत्री मुख्य अध्यक्ष की भूमिका में होते है साथ ही सत्ता पक्ष के मंत्रिमंडल के लोग शामिल होते हैं। लेकिन इसमें किसी भी प्रकार से विपक्षी दलों के लोग शामिल नही होते। लोगों के आरोप है कि शायद विपक्षी दलों की मुख्य आपत्ति इसी बात को लेकर है।

क्या है मुख्य बिंदु?

दरअसल विपक्षी दलों समेत कुछ मीडिया हाउस के द्वारा लोगों के दान किये गए पैसो को लेकर बेहद जागरूकता है, विपक्षी दलों समेत कुछ समाचार सेवा प्रदाता जैसे कि द वायर (The Wire) को इन पैसों के खर्चे और उपयोग को लेकर बहुत बड़ी चिंता खाये जा रही है। उन्हें भय है कि आखिर ये पैसा खर्च कैसे होगा और किनपर खर्च होगा? इसके लिए जन सूचना के अधिकार जैसे कानूनों का सहारा लिया जा रहा है। कि आखिर कितने पैसे पीएम केयर्स में आये और कितने निकाले गए?

इसके लिए खुद द वायर ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में उक्त खाते की जानकारी की लिए आरटीआई दायर करके जानकारी मांगी लेकिन बैंक ने इस खाते को ट्रस्ट के खाते की जानकारी को निजी बताकर जानकारी देने से मना कर दिया। इस पर द वायर समेत अन्य लोगों को बड़ी आपत्ति हो रही है। लोगों के अनुसार अगर फंड को लेकर आपत्ति ही है तो जिस द वायर द्वारा इस फंड के लिए इतनी कोशिश की जा रही है उसी को लोगों से मांगे जाने वाले 200, 1000, और 2400 रुपयों का क्या हाल किया जाता है उसके संबंध में क्या जानकारी उपलब्ध है? क्या मिलने वाले इन रुपयों के बारे में भारत की आम जनता को कोई जानकारी उपलब्ध कराई जाती है?

यहां एक बात बेहद समझने वाली है कि द वायर को पीएम केयर्स फंड के बारे में इतनी दिलचस्पी है कि उसे सुप्रीम कोर्ट के वर्डिक्ट भी विवादित लगने लगे है। द वायर को लगता है कि वह सुप्रीम कोर्ट से ऊपर है।

आप इस मामले में The Wire का यह पोस्ट देख सकते हैं:

द वायर ने पीएम केयर्स खाते में प्राप्त कुल अनुदान, खाते से निकाली गई राशि, अनुदान प्राप्ति और पैसा निकासी के संबंध में...

Posted by The Wire Hindi on Friday, May 22, 2020

गौरतलब है कि कोरोना वायरस को लेकर बनाए गए पीएम केयर फंड को चुनौती देने वाली याचिका को देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) ने खारिज कर दिया था। अदालत ने इस याचिका को पूरी तरह गलत बताया था। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद भी द वायर ने आरटीआई दाखिल कर दी।

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उदय बुलेटिन
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