ghulam nabi azad congress
ghulam nabi azad congress|Google Image
नजरिया

कांग्रेस ने गुलाम नबी को महासचिव पद से आजाद किया, चिट्ठी विवाद का असर, बतोले चचा खोलेंगे पूरा कच्चा चिट्ठा

कांग्रेस में लेटर बम से मचा बवाल, कांग्रेस में रहना है तो सोनिया, राहुल प्रियंका का नाम जपना है

Shivjeet Tiwari

Shivjeet Tiwari

देखो व्रन्दावन में एक कहावत है, "अगर व्रन्दावन में रहिना है तो राधे राधे कहिना है" और अगर राधे-राधे से थोड़ा फिसले तो मथुरा पहुंचाए जाओगे। कुछ ऐसा ही बीते दिन हुआ है दिल्ली में, दिल्ली मतलब कांग्रेस के अंदर, चिट्ठी बम के असर ने कांग्रेस के नेता गुलाम जी को महासचिव पद से आजाद कर दिया। मतलब इस कदम के बाद कांग्रेस में बहुत कुछ नाटक होना बांकी है"

सुरजेवाला अव्वल और गुलाम गुलाम ही रह गए:

देखो जिस दिन कांग्रेस के बड़े नेताओं ने राजमाता के खिलाफ चिट्ठी लिखने के लिए कलम उठायी थी और पत्र लिखना शुरू किया होगा तो कलम ने समझाया होगा कि "गुरु काहे जलती लकड़ी पकड़ रहे हो, वैसे भी हालत पतली है और दूसरा पार्टी की अम्मा के खिलाफ बगावत कोढ़ में खाज की स्थिति लाएगी। लेकिन नहीं खुद्दारी भी कोई चीज होती है लिख गए। फैसला देर में आया लेकिन वही आया जिसकी जन्मपत्री हम पहिले बना चुके है और इस मामले में असली मजे तो सुरजेवाला जी ने लूट लिए वही सूरजेवाला जो हमेशा प्रेस कांफ्रेंस करते दिखाई देते है। मतलब इनका काम ही यही है, पार्टी की बात को मीडिया तक पहुँचाना अब ये सोनिया के जी के प्रमुख सलाहकार बन चुके है और आला कमान की नाराजगी ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद को कमेटी से 11 नम्बर का गेट पास थमा दिया है।

हमरी न मानो तो ए अनिया से पूंछो:

केवल गुलाम नबी नही, गाज दूसरों पर भी गिरी है: ऐसा नही की ये गाज केवल गुलाम नबी आजाद पर ही गिरी है, पार्टी के हर उस नेता को उसकी कुर्सी से खिसकाया गया है जो आलाकमान के खिलाफ थे। फिर चाहे वह मल्लिकार्जुन खड़गे हो या मोतीलाल वोरा सबके बोरिया बिस्तर कमेटी से बांधे गए है और इस बार इनके हटाये जाने की सूचना दी है के सी वेणुगोपाल ने जो पार्टी में जनरल सेक्रेटरी की पोस्ट पर है।

गुटबाजी और पार्टी अध्यक्ष के पद को लेकर था बवाल:

दरअसल कांग्रेस पार्टी में लंबे वक्त से परिवारबाद चलता आया है, पार्टी चाहे पक्ष में हो विपक्ष में पार्टी की असल कमान परिवार में ही रहेगी और इसी चक्कर मे कुछ नेताओं को पार्टी के भविष्य को लेकर चिंताएं जागने लगी और उन्होंने सीधे-सीधे पत्र लिखकर अंतरिम अध्यक्ष को कोई नया युवा और अनुभवी नेता खोजने को कहा तो इसके बाद ही बवाल होना शुरू हो गया और इन नेताओं का भविष्य खतरे में पड़ गया।

डिस्क्लेमर: कई बार पहिले बता चुके है, हल्के ह्रदय से पढ़ो दिल और दिमाग से बिल्कुल नहीं लेना है काहे की दिल पर लेने से दिल की बीमारी होती है और दिमाग मे पहले से ही काफी कुछ होता है तो ज्यादा ज्ञान लेने की जरूरत है ही नही। बतोले चचा है, मजेदार बाते मजेदार ढंग से फ्री में सुनाते है तो पढ़ो और आनंद लो।

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उदय बुलेटिन
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