Sanskar Daryani indore lockdown violation Punishment
Sanskar Daryani indore lockdown violation Punishment|Google Image
नजरिया

सिर्फ नाम बड़ा होने से कुछ नहीं होता संस्कार मायने रखते है, और संस्कार ने यह साबित भी कर दिया। 

अगर ये मामला यूपी में होता तो साहबजादे अपने फूफा या चाचा को विधायक बताकर निकल लेते, या फिर अब तक पुलिसकर्मी लाइन हाजिर हो चुके होते।

Shivjeet Tiwari

Shivjeet Tiwari

लेकिन ये बात हैं इंदौर के संस्कार दरयानी के संस्कारों की है जहां उन्होंने पुलिस के सामने न सिर्फ अपनी गलती को सरलता से स्वीकारा बल्कि उठक बैठक भी लगा ली।

क्या है मामला ?:

देखिए ये सोशल मीडिया है जहाँ किसी को भी विलेन या हीरो बनाकर पेश कर दिया जाता है और लोग उसे सच भी मान लेते हैं। लेकिन असलियत इससे कोसो दूर होती है, मामला मध्यप्रदेश के इंदौर से जुड़ा हुआ है जो आजकल एक कोरोना हब के तौर पर भी पहचाना जा रहा है, जहाँ पर पिछले दिनों बिजनेस टायकून दीपक दरयानी के सुपुत्र को उनकी पोर्श कर से उतार पर पुलिस कर्मी ने इसलिए उठक बैठक करवा दी क्योंकि उन्होंने मॉस्क नहीं लगाया हुआ था। यही नहीं पुलिसकर्मी दीपक दरयानी के बेटे संस्कार दरयानी के साथ बेहद सख्ती से पेश आते हुए नजर आते है लेकिन सबसे सुखद बात यह रही कि उस वक्त भी संस्कार अपने संस्कारो के साथ खड़े हुए नजर आए वरना भारत मे तो एक विधायक का दूर का रिश्तेदार भी दरोगा को हड़काता हुआ नजर आएगा।

कर रहे है सामाजिक कार्य :

दरअसल बिजनेस मैन दीपक के द्वारा कोरोना ग्रस्त इलाकों और शहर के अन्य हिस्सों में लोगों की मदद के लिए तमाम कार्यक्रम चलाए जा रहे है जिसके तहत दीपक रोजाना करीब 10 हजार खाने के पैकेट पहुंचाते है। बीते दिनों उसी काम के लिए उनके बेटे संस्कार अपनी कार से निकले और भूलवश मास्क लगाना भूल गए जिसपर उन्हें पुलिसकर्मियों द्वारा रोक लिया गया और यह वाकया हो गया।

लोगों ने नैरेटिव सेट कर लिए :

हालाँकि इस मामले पर लोगों द्वारा पुलिसकर्मी के साहस की बात कही जाने लगी जो बिल्कुल सही है, लेकिन अगर मामले को गौर से देखा जाए तो इसका एक दूसरा पहलू भी है, वायरल वीडियो में संस्कार को पुलिसकर्मी द्वारा दिए जा रहे हर उस आदेश को मानते हुए देखा जा सकता हैं जो उन्हें लगातार दिए जा रहे है। इससे यह साफ साबित होता है कि महंगी गाड़ी चलाने वाले के संस्कार भी बड़े कीमती थे। चूंकि कानून और कायदे सबके लिए बराबर होते है फिर चाहे वह बेहद छोटा आदमी हो या कोई बड़ा रईस, लेकिन आजकल इन आदर्शों को मानता कौन है? इस पूरे मामले में पुलिसकर्मी और संस्कार दोनों की तारीफ होनी चाहिए। पुलिस ने अपनी ड्यूटी निभाई, तो संस्कार दरयानी ने भी दिखा दिया कि उसे बड़ी गाड़ी ही नहीं, परिवार से संस्कार भी बड़े मिले हैं।

कुछ भी कहो, दिल तो दोनों ने ही जीत लिया।

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उदय बुलेटिन
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