पेटा का दोगला स्वरूप आया सामने, पशुओं के लिए काम करने वाली संस्था ने जाहिर किया अपना असल रूप

जिस पेटा को रक्षा बंधन पर भी गाय की रक्षा याद आती है वह बकरीद पर चाकू तेज करने की सलाह दे रही है।
पेटा का दोगला स्वरूप आया सामने, पशुओं के लिए काम करने वाली संस्था ने जाहिर किया अपना असल रूप
Peta India on bakridGoogle Image

रक्षा बंधन पर गाय बचाओ और बकरा काटने के लिए चाकू तेज रखो:

पेटा इंडिया ने रक्षा बंधन के करीब एक माह पहले ही गाय बचाने का शिफूगा छोड़ दिया उसी दौरान पेटा की कुछ गाइडलाइंस के स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया में वायरल हो गए जिसको लेकर पेटा की असलियत लोगों के सामने आ गयी है।

गाइडलाइंस में दी गयी कुछ बातें:

  • कुर्बानी दिए जाने वाले जानवर को सही तरीके से हैंडल किया जाना चाहिए, खासकर जानवर के ऊपर कोई स्ट्रेस नहीं होना चाहिए अन्यथा ऐसे जानवर की कुर्बानी हराम है और उसका मांस निचले दर्जे का माना जायेगा।

  • कुर्बानी से पहले चाकू को बेहतर तरीके से तेज कर लेना चाहिए, चाकू की लेंथ काम से कम 45 सेंटीमीटर होनी ही चाहिए अथवा जानवर की गर्दन के हिसाब से हो।

  • जानवर को कुर्बानी की दिशा में लिटाया जाना चाहिए और जानवर की कुर्बानी के वक्त कोई दूसरा जानवर उस जगह न हो और वह कुर्बानी न देखे। जानवर की गर्दन के नीचे एक खून सोखने वाली जगह हो अथवा रक्त के बहाव के लिए समुचित व्यवस्था हो। जानवर को लोगों की सहायता से घुटनों पर लाकर बैठा या लिटा देना चाहिए।

  • जानवर की कुर्बानी के वक्त तीन झटकों से ज्यादा न लगाएं जाएँ, कहने का तात्पर्य यह है कि जानवर को तीन झटके में ही काट देना चाहिए।

  • इसके अलावा भी काफी कुछ बातों का उल्लेख पेटा द्वारा अपनी वेबसाइट पर किया गया है, जिनको आप खुद पढ़ सकते हैं।

अब सवाल उठता है और लोगों की नाराजगी जाहिर होती है कि क्या है वही पेटा है जो राखी के दिन गाय की रक्षा की बात कर रहा था? यही पेटा समुदाय विशेष के त्योहार पर जानवरों को काटने के लिए प्रेरित कैसे कर सकती है ?

लोगों का गुस्सा न सिर्फ जायज है बल्कि जरूरी है लोगों को इस जैसी सो काल्ड सामाजिकता लाने बकवास संस्था से निजात मिलनी चाहिए।

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उदय बुलेटिन
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