Media on Riyaz Naikoo
Media on Riyaz Naikoo|Uday Bulletin
नजरिया

रियाज नायकू को पेंटर और शिक्षक बताने वाले मीडिया को कब शर्म आएगी

भारत में जब भी कोई आतंकी मारा जाता हैं कुछ न्यूज़ पोर्टल उसको पेंटर, शिक्षक बताने लगते हैं, आतंकियों से इतनी हमदर्दी का क्या मतलब हो सकता है?

Shivjeet Tiwari

Shivjeet Tiwari

भारत मे मीडिया का एक बड़ा वर्ग आतंकी और इस तरह की सोच रखने वालों का महिमामंडन करने से बाज नही आता , जबकि मुद्दा यह है कि जब आतंकी मारा गया है तो आतंकी ही होना चाहिए, उसमे आतंकी का समुदाय, जाति, धर्म, पूर्व प्रोफेशन और रुचि दर्शाने की जरूरत क्या है ?.....लेकिन अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर मीडिया अपनी मनमर्जी चलाती है। शायद यही कारण है कि एक आतंकी की फांसी रुकवाने के लिए आधी रात को सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे खुलवाकर बहस कराई जाती है।

पहले किलियर कीजिये आतंकी है या कलाकार ?

वेब न्यूज़ की दुनिया मे पैसों के बल पर भारत विरोधी एजेंडे के चलते तमाम डिजिटल मीडिया हाउस अपने मन माफिक कुलांचे भरते रहते है शायद उसी तर्ज पर फेमस न्यूज़ पोर्टल द क्विंट हिंदी ने एक खबर पोस्ट की जिसमे एक आतंकी के बारे इस तरह लिखा कि एकबारगी तो लगा ही नहीं की रियाज नायकू कोई आतंकी है बल्कि ऐसा लगा कि वह बहुत बड़ा मसीहा रहा हो। खबर की हेडलाइन में ही आतंकी के कॉलेज टाइम में गुलाब का फूल बनाने और पेंटिंग का शौक रखने वाले आतंकी के जन्म और मौत की कहानी ख़ोजकर लायी गयी और आतंकी के प्रति सहानभूति का नया मॉडल लागू किया।

खबर का सार तो समझिए :

जी हां तो इस खबर को लेकर तमाम प्रकार की ऐसी कोशिशें की गई है जिनके बल पर यह साबित किया जाए कि रियाज नायकू पर आतंकी टैग से हटकर किसी दूसरे टैग जैसे कि मिलिटेंट बन जाये या फिर सरकार के विरोध में शस्त्र लेकर विरोधी तक ही सीमित रह जाये। पूरी खबर में कहीं भी नायकू को आतंकी कहने की हिम्मत ये समाचार प्रदाता कंपनी कभी नहीं कर पाई उल्टे कई जगह पर नायकू के परिवारीजनों के बिनाह पर नायकू को विशाल और शान्त ह्रदय वाला बताने की भरपूर कोशिश की गयी। द क्विंट ने अपने लेख में नायकू के घरवालों की बिनाह पर यह बताने पर जोर दिया कि नायकू ने अभी तक किसी भी व्यक्ति के साथ हिंसा नही की। अब इन्हें कोई यह बताने की कोशिश करे की एनकॉउंटर के वक्त नायकू गोलियां क्या मच्छर मारने के लिए चला रहा था।

आप खुद ही पढ़ लीजिये की आर्टिकल की हेडलाइन क्या कहती है ?

कॉलेज में गुलाब की पेंटिंग बनाने के शौकीन पोस्टर बॉय आतंकी #RiyazNaikoo के जन्म और खात्मे की कहानी

Posted by Quint Hindi on Friday, May 8, 2020

कब बंद होगा ट्रेंड ?

किसी आतंकी का महिमामंडन वाला ट्रेंड बेहद नया नहीं है, सरकार विरोधी होने की वजह से लिखने वाले लोग हर मौके पर ऐसी बातें लिखने के लिए उतावले रहते है जिससे देश की अंतरात्मा को चोट पहुँच सके और हर हाल में सेना और भारत को गलत ठहराया जाए। लेकिन शायद अब यह ट्रेंड टूटने जा रहा है क्योंकि पाठक इस तरह की खबरों के बाद शाब्दिक विरोध कर रहे हैं। उदय बुलेटिन की नजर में देश और देश के लोग पहली कतार में आते है निजी आकांक्षा और विचारधारा बेहद अलग चीज है। लोगों के मन मे अब नायकू कोई नायक नहीं है बल्कि लोगों के द्वारा "कुत्ते की मौत मरने वाला जेहादी उन्मादी" बताया जा रहा है लोग नायकू की मौत को बिना किसी झिझक के आतंकी कहने को मुस्तैद है लेकिन समुदाय विशेष और मीडिया का एक धड़ा अभी भी किसी आतंकी को आतंकी मानने से इनकार कर रहा है। लोगों के अनुसार मीडिया में अभी भी इस तरह के लोग निवास करते है जिन्हें बुरहान वानी के जिस्म में स्कूल मास्टर का लड़का और दूसरे आतंकियों को घर का इकलौता कमाने वाला कहा गया था।

डिस्क्लेमर भी मजेदार निकला :

हालांकि डिस्क्लेमर कितना प्रभावशाली है ये हम सभी जानते है डिस्क्लेमर एक मात्र वह बचाव ढाल है जो किसी भी चुगली को छिपाने के लिए आड़े की जाती है जिसका उद्देश्य बहाने से ज्यादा कुछ नहीं होता। द क्विंट के लेखक और द क्विंट ने इस चाल को बेहद चतुराई से चलकर अपने एजेंडे को फैलाने की कोशिस की है।

हमारा अपना डिस्क्लेमर:

हमने लेख में वास्तविक परिस्थितियों को दर्शाने और सच्चाई को सांमने लाने का कार्य किया है। इस लेख में लिखे गए प्रत्येक शब्द की जिम्मेदारी लेखक अपने ऊपर लेता है।

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