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Gandhi with Jinnah during Gandhi-Jinnah Talks
Gandhi with Jinnah during Gandhi-Jinnah Talks|IANS
नजरिया

जिन्ना ने गांधी पर कभी भरोसा नहीं किया!

जिन्ना ने 1940 में ही सोच लिया कि वह पाकिस्तान बनाएंगे।

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Summary

मोहम्मद अली जिन्ना ने कभी भी महात्मा गांधी पर भरोसा नहीं किया, भले ही उन्होंने स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री के रूप में उनके नाम का प्रस्तावित किया था। एक किताब और ऐतिहासिक दस्तावेजों से यह खुलासा हुआ है।

गांधी ने कई बार प्रस्ताव दिया था कि जिन्ना को स्वतंत्र भारत की पहली अंतरिम सरकार का नेतृत्व करना चाहिए। उन्होंने इसे वायसराय माउंटबेटन को और कैबिनेट मिशन को भी प्रस्तावित किया था।

वायसराय की डायरी के अनुसार, जिसे 'माउंटबेटन पेपर्स' के रूप में दस्तावेजीकृत किया गया है, उसमें लिखा है, "एक अप्रैल, 1947 को गांधी नए वायसराय से मिले.. गांधी ने जिन्ना को प्रधानमंत्री पद की पेशकश की।"

कागजात के अनुसार, गांधी ने कहा कि समाधान यह था कि "जिन्ना को मुस्लिम लीग के सदस्यों के साथ केंद्रीय अंतरिम सरकार बनाने के लिए कहा जाना चाहिए।"

'माउंटबेन पेपर्स' के अनुसार, लेकिन माउंटबेटन ने गांधी से कहा कि वह जवाहरलाल नेहरू के साथ चर्चा करना चाहते हैं। जब नेहरू ने वायसराय से मुलाकात की, तो उन्होंने भी महात्मा गांधी द्वारा सुझाई गई बात का समर्थन किया।

कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने अपने एक लेख में यह तर्क दिया है कि यह प्रस्ताव स्वतंत्रता-पूर्व के दौर में अंतरिम सरकार का नेतृत्व करने के लिए था।

हालांकि, स्टेनली वोल्पर द्वारा लिखित जिन्ना की जीवनी 'जिन्ना ऑफ पाकिस्तान' के अनुसार, गांधी ने यह पेशकश पहले भी की थी।

गांधी ने वायसराय, लॉर्ड लिनलिथगो को आठ अगस्त, 1942 को 'भारत छोड़ो आंदोलन' शुरू करने से एक दिन पहले लिखा, "कांग्रेस को पूरे भारत की ओर से ब्रिटिश सरकार द्वारा मुस्लिम लीग को अपनी सभी शक्तियों को हस्तांतरित करने में कोई आपत्ति नहीं होगी।"

पत्र में, गांधी ने कहा, "और कांग्रेस न सिर्फ मुस्लिम लीग के नेतृत्व वाली सरकार को निर्बाधित करेगी, बल्कि स्वतंत्र देश की व्यवस्था को चलाने में सरकार में भी शामिल होगी।"

लेकिन जिन्ना ने गांधी के प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया, क्योंकि उन्हें हमेशा से गांधी पर विश्वास नहीं था।

पुस्तक 'जिन्ना ऑफ पाकिस्तान' में कहा गया है कि, "इस तरह की पेशकश जिन्ना लुभा सकती थी, अगर वह गांधी पर विश्वास करते होते, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। इसके बजाय, जैसा कि उन्होंने प्रेस को बताया, 'मिस्टर गांधी की 'स्वतंत्र भारत' की अवधारणा मूल रूप से हमारे से अलग है', और उन्होंने दोहराया कि 'मिस्टर गांधी द्वारा स्वतंत्रता का मतलब कांग्रेस राज है।'

23 मार्च, 1940 के लाहौर प्रस्ताव में जिन्ना की मुस्लिम लीग ने पहले ही पाकिस्तान की परिकल्पना कर ली थी। सितंबर 1944 में, जिन्ना-गांधी वार्ता के दौरान, सरकार का नेतृत्व कौन करेगा, इस विषय पर बात नहीं हुई और वार्ता इस बात पर केंद्रित थी कि क्या भारत एकजुट रहेगा या दो राष्ट्रों में विभाजित होगा।