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नजरिया

भारत मे विज्ञापन का भ्रामक संसार, इसको बदलने की जरूरत है

किस क्रीम ने आपको गोरा बना दिया, किस साबुन से आपकी त्वचा में निखार आ गया, किस दन्त मंजन ने आपके दातों को मोती जैसा चमका दिया? सरकार को ये झूठे और भ्रामक विज्ञापन नहीं दिखते क्या?

Shivjeet Tiwari

Shivjeet Tiwari

वो कहते है ना कि जो दिखता है वो बिकता है, ताजा मामला बाबा रामदेव के रिसर्च संस्थान पतंजलि रिसर्च सेंटर से जुडा हुआ है जिसके चलते एक नई बहस शुरू हो गयी है। कहा जा रहा है कि सरकार द्वारा निर्धारित मानकों के बावजूद चमात्कारिक प्रभाव दिखाने वाले उत्पादों को जनता के सामने क्यों परोसा जाता है? इनकी समीक्षा होनी चाहिए।

बाबा की दवा को लेकर उठा विवाद:

पतंजलि योगपीठ और दिव्य फार्मेसी के सर्वेसर्वा बाबा रामदेव ने निम्स विश्वविद्यालय के साथ एक प्रेस कांफ्रेंस की जिसके तहत देश दुनिया को बाबा ने रामदेव ने बताया कि उन्होंने दुनिया के लिए साबसे पुरानी चिकित्सा पद्यति से विश्वभर में हाहाकार मचाने वाले कोरोना वायरस के निदान का रास्ता खोज लिया है और कोरोनिल के साथ स्वासारी वटी के साथ अणु तैल नामक संयुक्त औषधि की मदद से कोरोना को मात्र सात दिन में हराया जा सकता है।

इस बयान और घोषणा के बाद से ही भारत मे नई बहस शुरू हो गयी है कि बाबा ने बिना किसी अप्रूवल के इतना बड़ा दावा कैसे कर दिया? क्या बाबा रामदेव ने किसी सरकारी संस्थान से इस तरह के प्रयोग और घोषणा के लिए अनुमति प्राप्त की? इसके बाद से ही भारत सरकार के आयुष मंत्रालय जिसमे आयुर्वेद, यूनानी, होम्योपैथी, प्राकृतिक चिकित्सा के मामले देखे जाते है ने संज्ञान लेते हुए बाबा रामदेव और उनकी कंपनियों से दवा के संबंध में साक्ष्य उपलब्ध कराने और भ्रामक प्रचार को तत्काल प्रभाव से बंद करने का आदेश जारी किया।

हालांकि पतंजलि के ही आचार्य बालकृष्ण ने बाद में कम्युनिकेशन गैप की बात कही और बताया कि हमने मंत्रालय को सारे सुबूत साझा कर दिए है और हमारा विवाद समाप्त हो चुका है। लेकिन सरकार ने अपने इस कदम में जो आधार बनाया उसका मुख्य सार यह है कि आप जादुई दवाओं, चमत्कारी दवाओं का प्रचार प्रसार नहीं कर सकते, चमत्कार का आशय तत्काल लाभ पहुंचाने और आधारहीन बाते करने को लेकर था। मंत्रालय ने जिस कानून को आधार बनाया वह है "ड्रग्स एन्ड रैमिडीज (ऑब्जेक्शनेबल एडवर्टाइजमेंट) 1954 "यह एक्ट दवाओं के भ्रामक प्रचार पर कड़े प्रावधान दर्शाता है।

आखिर क्या है यह एक्ट?

यह अधिनियम "जादू के उपाय" को किसी भी ताबीज, मंत्र या किसी अन्य वस्तु के रूप में परिभाषित करता है। जिसके द्वारा यह दावा किया जाता है कि यह मनुष्यों या जानवरों में किसी बीमारी का इलाज, निदान, रोकथाम या समाप्त करने के लिए चमत्कारी शक्तियां हैं। इसमें ऐसे यंत्र भी शामिल हैं जिनके द्वारा यह दावा किया जाता है कि वे मनुष्यों या जानवरों के किसी अंग की संरचना या कार्य को प्रभावित करने की शक्ति रखते हैं।

इस एक्ट में उपलब्ध शक्तियां:

इस एक्ट के बारे में विकिपीडिया में विस्तृत विवरण दिया गया है जिसका हिंदी रूपांतरण हम आपके समक्ष रख रहे हैं।

यह कानून दवाओं और उपचार के विज्ञापन पर प्रतिबंध लगाता है महिलाओं में गर्भपात को रोकना या गर्भधारण को रोकना यौन सुख के लिए क्षमता में सुधार करना या बनाए रखना मासिक धर्म संबंधी विकारों का सुधार शामिल अनुसूची में वर्णित किसी भी बीमारी या स्थिति का इलाज, निदान या रोकथाम करना। मूल शामिल अनुसूची में 54 बीमारियों और स्थितियों की एक सूची शामिल थी जो निम्नवत है:

पथरी धमनीकाठिन्य अंधापन रक्त- विषाक्तता उज्ज्वल की बीमारी, कैंसर, मोतियाबिंद, बहरापन, मधुमेह, मस्तिष्क के रोग और विकार, ऑप्टिकल प्रणाली के रोग, गर्भाशय के विकार, मासिक धर्म प्रवाह की विकार तंत्रिका तंत्र की विकार प्रोस्टेटिक ग्रंथि के विकार जलोदर मिरगी महिला रोग (सामान्य रूप से) फेवरर्स (सामान्य रूप से) फिट मादा बस्ट का रूप और संरचना पित्त की पथरी, गुर्दे की पथरी और मूत्राशय की पथरी अवसाद आंख का रोग गण्डमाला दिल के रोग उच्च / निम्न रक्तचाप Hydrocele हिस्टीरिया शिशु पक्षाघात पागलपन कुष्ठ रोग लुकोदेर्मा बांध लोकोमोटर गतिभंग एक प्रकार का वृक्ष तंत्रिका संबंधी दुर्बलता मोटापा पक्षाघात प्लेग फुस्फुस के आवरण में शोथ न्यूमोनिया गठिया टूटना यौन नपुंसकता चेचक व्यक्तियों का कद महिलाओं में बाँझपन ट्रेकोमा यक्ष्मा ट्यूमर टॉ़यफायड बुखार गैस्ट्रो-आंत्र पथ के अल्सर उपदंश रोग, उपदंश, सूजाक, शीतल चैंक्रर, वेनेरल ग्रेन्युलोमा और लिम्फो ग्रैनुलोमा इत्यादि (स्रोत विकिपीडिया इंग्लिश)

इस प्रकार के भ्रामक दावों के पाए जाने जिसमे तंन्त्र मंत्र का भी उल्लेख है और यह पाया जाता है तो 6 माह का कठिन कारावास दिया जा सकता है और पेनाल्टी लगाई जा सकती है लेकिन असल मुद्दा यह नहीं है असल मुद्दा है कि भारत मे क्या यह कानून प्रसांगिक भी है या यह सिर्फ किताबी ज्ञान तक ही सीमित है।

आइये बाजार पर नजर डालते है:

  • दंत मंजन: आपने टीवी और अखबारों में कितने विज्ञापन नहीं देखे जो आपके दांतों को एकदम चमका देते है, किसी के चमके हो तो बताइयेगा जरूर।

  • बच्चे अगर वह पाउडर पियेंगे तो 100 प्रतिशत डब्लू डब्लू ई लड़ेंगे, ओलंपिक जीत लेगें

  • अगर आपने टीवी में दिखाए गए विज्ञापन के आधार पर बॉडी डियोरडेन्ट डाल लिया तो कन्याएं आपके आस-पास मधुमक्खियों की तरह भिनभिनाती नजर आएंगी।

  • भाई कुछ साबुनों में तो गोरा करने के लिए केसर दूध मलाई भी डाला जाता है, जरूरत पड़ने पर आप चाय बना सकते हैं।

  • अगर कोई काली या साँवली लड़की इस क्रीम को लगा ले तो हजारो घरो से रिश्ते आ जाएंगे।

  • अगर आपकी लंबाई नही बढ़ती तो आप ये पाउडर पीजिए आप एफिल टावर की लंबाई पा सकते है।

  • बांकी जो चीजे इस एक्ट से बचती है वो ड्रग्स एन्ड कॉस्मेटिक एक्ट में आ जाती है इसको आप यहाँ पढ़ सकते है

हालाँकि ऐसा होता कुछ नहीं हैं विज्ञापनदाता अपनी मर्जी से कल्पना के सागर में गोता लगाकर अपने हिसाब से विज्ञापन रच देते है बांकी कानून अपनी किताब में सोता हुआ नजर आता है।

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उदय बुलेटिन
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