गणपति का उड़ाया मजाक, तर्कों की कसौटी पर धर्म को तौला

हिन्दू धर्म के देवी-देवताओं का मजाक उड़ाना आम बात हो गयी है, हिन्दू धर्म को तर्क की कसौटी पर तौलेंगे लेकिन दूसरे धर्म पर मुँह में दही जम जाता है।
गणपति का उड़ाया मजाक, तर्कों की कसौटी पर धर्म को तौला
Boxer Vijendra singh on Lord Ganesha Uday Bulletin

आज के भारत मे आप कुछ भी कह सकते है, आपको अधिकार है। आप प्रधानमंत्री को गाली दे सकते है, आप धर्म को गरिया सकते है, आप बराबर सेक्युलर कहलाये जायेंगे। जैसे ही आपके आदर्शों पर उंगली उठेगी आप मुँह फुला लेंगे "ताजा मामला गणपति के रूप से जुड़ा हुआ है"

क्या मान्यताएँ क्या विज्ञान ?

अगर आप किसी भी धर्म को विज्ञान के तराजू पर तौले तो हर एक दृष्टांत के बाद आपको विरोध करने का मौका मिलेगा। फिर चाहे वह कोई भी धर्म हो, ताजा मामला प्रथम पूज्य गणपति से जुड़ा हुआ है जहां पर खुद को एक्टविस्ट बताने वाले युवक ने धार्मिक मान्यता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। नाम है इंद्रजीत बराक, ट्विटर पर उन्होंने खुद को एक आईटी प्रोफेशनल और रूरल थिंकर के तौर पर भी दर्शाया है। इंद्रजीत 24 अगस्त को एक विवादास्पद ट्वीट किया जिसकी वजह से झमेला खड़ा हो गया है। ट्वीट की भाषा देखिए ( हमने ट्वीट को बिना एडिट किये ज्यों का त्यों रखा हुआ है)।

"500 किलो के हाथी के सर को 25 किलो के बच्चे की धड़ पर लगाकर 250 ग्राम के चूहे पर बैठा दिया। और हम अगर सवाल करेंगे तो हिन्दू धर्म खतरे में आ जायेगा ठीक है झकोइयो, नहीं करते सवाल..."

अब असल ट्वीट देख लीजिए:

विजेंदर सिंह ने ट्वीट को लाइक किया:

मामला उस वक्त ज्यादा लाइट में आ गया जब विश्व के जाने माने भारतीय एथलीट विजेंदर सिंह ने इसको लाइक करके अपना समर्थन दिया है। विजेंदर सिंह पूर्व भारतीय बॉक्सर ( मुक्केबाज) है और अब कांग्रेस पार्टी के नेता इन्होंने कई मौकों पर देश का नाम रोशन किया है। लेकिन इस मामले पर समर्थन देने के बाद लोग इन्हें आड़े हाँथ ले रहे है।

सोशल मीडिया पर लोगों का विरोध देखिए:

लोगों ने विजेंदर को सद्बुद्धि देने की बाते भी कही:

क्या सही क्या गलत?

जब मामला किसी समुदाय विशेष और धर्म विशेष के लोगों की आस्था से जुड़ा हुआ हो तो उसे न छेड़ना ही बेहतर है धर्म को तर्क की कसौटी पर कसना सबसे बड़ी मूर्खता की निशानी है। लोगों को आस्था एक सूत्र में बांधती है, तर्कों के जानकारों के अनुसार जिस आस्था से किसी को कोई तकलीफ न हो उसे क्यों छेड़ना। कभी कभार ये तर्क बहुत बड़ी समस्या खड़ी कर देते है, लोगों के अनुसार शार्ली एब्दो का कार्टून बनाकर बवाल मोल लेना इसी श्रेणी के अंतर्गत आता है।

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उदय बुलेटिन
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