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Army day Story of Badluram 
Army day Story of Badluram |Google
नजरिया

बदलूराम की कहानी सेना के समर्पण की कहानी को जिंदा रखता है। 

सेना दिवस पर बदलूराम की कहानी ।

Shivjeet Tiwari

Shivjeet Tiwari

Summary

अगर आपसे कोई कहे कि सेना सिर्फ गोली चलाकर जंग जीत जाती है, तो आप निरे गलत है, सेना सिर्फ गोलियां चलाकर जंग नही जीतती, उसके लिए अपने कलेजे को दांव पर लगाकर आगे बढ़ना पड़ता है। आज सेना दिवस है, तो आज सेना की एक अद्भुत घटना को देखने का प्रयास करते है कि कैसे एक मरा हुआ सैनिक जंग जिता सकता है और उस सैनिक को सेना आज तक नहीं भूली।

खूबसूरत लड़की थी,

उसको देखकर राइफल मैन

चिन्दी खींचना भूल गया

हवलदार मेजर देख लिया

उसको पिट्ठू लगाया...

बदलूराम एक सिपाही था

जापान वॉर में मर गया

क्वार्टर मास्टर स्मार्ट था

उसने राशन निकाला

बदलूराम का बदन जमीन के नीचे है....

बदलूराम का बदन जमीन के नीचे है

तो हमें उसका राशन मिलता है.......

शाबास...... हल्लेलुयाह!!

शाबास...... हल्लेलुयाह!!

ये बेहद ग़ैरतुकबन्दी गीत कोई आम गीत नहीं है, सुनने में तो आपको शायद आपको ये गीत भी नजर न आये लेकिन अगर इस बार की गणतंत्र दिवस पर “असम रेजिमेंट” का दस्ता या फिर सेना बैंड निकले तो उसको गौर से सुनने का प्रयास कीजियेगा क्योंकि उनका थीम सांग यही होगा। 

क्या है कहानी?

इस गीत की कहानी 23 सितंबर 1918 के वक्त ब्रिटिश इंडियन आर्मी की एक टुकड़ी का नेतृत्व बदलूराम नामक सिपाही कर रहा था, और वक्त था विश्वयुद्ध का, तभी जंग शुरू होने से पहले ही बदलूराम शहीद हो गए और सैनिकों के द्वारा अपने लीडर को जमीन में दफ्न कर दिया गया, यहाँ आपको बताते चले कि बदलू राम ने इस जंग में बिना एक गोली चलाये शहादत स्वीकार कर ली, लेकिन असल किस्सा यहीं से शुरू होता है।

दरसअल क्वाटर मास्टर जो कि सैनिकों को राशन उपलब्ध कराता है उसने बदलूराम का नाम राशन रजिस्टर से नहीं काटा और उस टुकड़ी को बदलूराम का राशन बराबर मिलता रहा, और टुकड़ी के पास लंबे समय तक एक ज्यादा व्यक्ति का राशन जमा होता रहा।

फिर कुछ महीने बाद वह टुकड़ी जापानी सेना के द्वारा घेर ली गयी और सेना की टुकड़ी को रसद इत्यादि मिलना बिल्कुल नामुकिन सा हो गया, तब उस टुकड़ी के लिए बदलूराम का राशन एक सहारा बना और टुकड़ी ने जापानी सेना का चक्रव्यूह तोड़कर फतेह हासिल की, तब से सेना और खासकर असम रेजिमेंट उस बदलूराम को गीतों के माध्यम से याद रखती है, सेना के अनुसार अगर बदलूराम का राशन उस वक्त सेना की टुकड़ी के पास नहीं होता तो शायद उन सैनिकों का बचना मुश्किल ही था।

गौरतलब हो कि यह गीत पिछले दिनों अमेरिकी सैनिकों द्वारा भी गुनगुनाते हुए सुना गया दरसअल अमेरिका में मैकहार्ड में बेस लुइस में भारतीय सेना की असम रेजिमेंट और अमेरिकी सैनिक टुकड़ियों द्वारा गाया और नाचा गया, गीत की धुन वही थी, बदलूराम का बदन ........

  • आज सेना दिवस पर यह गाथा भारतीय सेना के लिए समर्पित है!