Violence citizen amendment act
Violence citizen amendment act|Social Media
नजरिया

लो हमसे भी सुन लें इस फसाद की जड़ क्या है ? आखिर ये झंझट फैला क्यों है ? 

नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ रविवार को हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान चार बसों को भीड़ द्वारा आग लगा दी गई। इसके अलावा 100 के करीब वाहनों को भी भारी नुकसान पहुंचाया गया।

Shivjeet Tiwari

Shivjeet Tiwari

Summary

प्यार काहे बनाया राम ने, कोई आये मेरा दिल थाम ले “ये एक फ़िल्म आयी थी “सूर्या” विनोद खन्ना की। विनोद खन्ना याद आये की नहीं, वही अक्षय खन्ना के पापा जी खैर अब आपका दिमाग घूम रहा होगा कि आखिर हमें गाना काहे सुना रहे है इस गहरी पोस्ट का इस गाने से क्या मतलब? तो साहब इस गाने का हमारी इस संजीदगी भरी पोस्ट से उतना ही मतलब है जितना CAA (नागरिक संशोधन अधिनियम) से भारत के मुसलमानों को है।

आखिर क्या है बला :

भई कुलमिलाकर भारत की जनता जिंनमे खासकर अल्पसंख्यको के मन मे एक वहम घुस गया है या कहें कि एक सुनियोजित तरीके से घुसा दिया गया है कि ये बिल मुस्लिमों के हितों के लिए घातक है और संविधान की हत्या की जा रही है। साथ में एक मिथ और दिमाग में रख दिया गया है कि ये बिल कहीं न कहीं हिन्दुओं का भला करेगा। इस मामले को लेकर बिल के पेश होने के बाद से ही इतना रायता फैलाया गया कि जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने बड़े सकुचाते हुए कहा "शिंजो न आबे" !

राजनैतिक गलियारों से मामला पहुँचा आम आदमी तक :

मिथकों का क्या है ये तो होते ही हैं फैलने के लिए, सरकारें पोलियो और डेंगू को जड़ से मिटाने के लिए हजारो करोड़ रुपये खर्च कर चुकी लेकिन जनता की मजाल कि कोई अच्छी आदत अपने जीवन मे शुमार कर ले। लेकिन अगर किसी अफवाह की बात हो तो आप किसी एक से कहिए तो बस पूरे भारत में इसे आग की तरह फैला दिया जाएगा। "गणेश जी की मूर्ति के दूध पीने वाली अफवाह तो बिना सोशल मीडिया वाले युग में भी आग की तरह फैल चुकी है"

फिर क्या था पहले आंदोलन की हरकत असम में हुई और किसी तरह असम में सरकार ने जनता को अपने अंदाजे बया से कंट्रोल किया और उधर पश्चिम बंगाल में दंगाइयों की निकल पड़ी, ट्रेनें जला दी गयी, आग बुझाने वाली फायर ब्रिगेड खुद आग में जलकर खाक हो गयी। जैसे तैसे बंगाल में हिंसा कम हुई दिल्ली का जामिया विश्वविद्यालय सुलग उठा।

violence against citizenship amendment act
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नागरिक संशोधन अधिनियम बना छात्रों का आंदोलन:

एक ओर जहां दिल्ली में सरकार की विपक्षी पार्टियां सरकार के इस बिल का विरोध कर रही थी और आंदोलनों को अंजाम दिया जा रहा था उसी बीच दिल्ली की प्रशिद्ध जामिया यूनिवर्सिटी के छात्रों ने आंदोलन खड़ा कर दिया। ये छात्र संविधान की हत्या किए जाने को लेकर गुस्से में थे। पुलिस पर पथराव किया गया, बसें जलाई गई, आम नागरिकों समेत पुलिस की गाड़ियों को आग के हवाले किया गया, बच्चों और महिलाओं से भरी हुई डीटीसी बसों पर डंडे चलाये गए इसी चक्कर मे पुलिस वाले समेत आम राहगीर भी चुटहिल हुए। पत्थरों से चोट खाकर कुछ पुलिसकर्मी तो बुरी तरह घायल हुए और सघन चिकित्सा कक्ष में उनका इलाज चल रहा है।

कथित तौर पर पुलिस ने इस हरकत को अंजाम दिया जिसकी वजह से कई छात्रों को चोटें आई है खुद विवि की वाइस चांसलर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके यह बताया की " एक तो छात्रों का आंदोलन शांतिपूर्ण था, फिर पुलिस ने उन पर लाठियां भांजी और गोलिया चलाई।

छात्रों पर पुलिस की लाठियों के बाद लोगों के रूखे व्यंग:

अब चूंकि मामला आंदोलन का है और राजनीति इसमे तह तक जुड़ी हुई है तो राजनीति के मट्ठे में जज्बाती छौंका लगना बेहद लाजिमी है तो फिर क्या था, आंदोलन के वक्त किसी उपद्रवी ने बस में आग लगाई और पूर्व आम आदमी नेता और वर्तमान में भाजपा के पाले से कबड्डी खेलने वाले कपिल मिश्रा तो इसे आतंकी हमला कहते नजर आए और आम आदमी पार्टी के नेता अमानतुल्लाह खान पर इस घटना के मास्टरमाइंड होने का आरोप लगाया।

वहीँ सूत्रों ने पुष्टि की है कि इस घटना के पहले आम आदमी पार्टी के नेता अमानतुल्लाह खान गए थे, और आंदोलनकारियों से बात भी हुई थी।

इस मामले के बाद अब भारत दो धड़ो में बटा हुआ नजर आ रहा है एक वो पक्ष जो सीएबी का विरोध करके आंदोलनकारियो के साथ खड़े नजर आ रहे है तो दूसरे इस बिल के समर्थन में दिल्ली पुलिस के साथ खड़े नजर आए।

दोनो पछों को पढ़ लो और दोनो की दलीलें सुन लो !

  • कोयना मित्रा:
  • स्वरा भास्कर
  • और एक बॉलीवुड एक्टर है मोहम्मद जीशान अयूब अच्छे कलाकार है, मंझे हुए एक्टर है। साहब ने तो ट्वीट करके ये भी कहा कि मैं जामिया पहुच रहा हूँ, हो सकता है साहब मुंबई से दिल्ली के लिए निकल भी चले हो, या शायद दिल्ली में ही कहीं ठहरे हुए हो?

हालाँकि मोहम्मद जीशान अयूब जी की बातों में एकहरा पक्ष नजर आया वो एक तरफ छात्रों पर पुलिस द्वारा बल प्रयोग की बातों को तो मान रहे है लेकिन सरकारी और निजी संपत्ति बर्बाद करने को लेकर उनकी शंकाएं किलियर नहीं है, बस जलाने को लेकर उनके मन में ये बैठा हुआ है कि ये कारिस्तानी किसी और ने की है, जबकि दिल्ली पुलिस के अनुसार बस जलाने वाले लोग भागकर जामिया में अंदर चले गए थे।

चलो ये तो हुई बवाल की बातें, आखिर CAB की असलियत क्या है :

वैसे आपने कई बार सुन रखा होगा लेकिन अच्छी बातें आपको जल्दी से समझ मे आती कहां है ? चलो एक बार सरसरी तरह से समझा देते है

तो भैया ये एक ऐसा बिल है जो भारतीय हिन्दुओं, मुस्लिमों, सिक्ख ,ईसाइयों या किसी अन्य जाति धर्मों के किसी व्यक्ति पर लागू नही होता, ये मुख्यतः भारत के तीन सीमावर्ती पड़ोसी देश पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश पर लागू होता है, जहाँ पर हिन्दू, सिक्ख, ईसाई, पारसी, और बौद्ध इत्यादि अल्पसंख्यक है जिनके ऊपर धार्मिक आधार पर भेदभाव की घटनाएं आती रहती है, जैसे जबरन धर्मपरिवर्तन कराना, अपहरण करके जबरजस्ती निकाह कर लेना, इत्यादि इत्यादि।

तो इस बिल के अंतर्गत ये इन तीन देशों को अल्पसंख्यक (हिन्दू, बौद्ध, सिख, ईसाई ) को भारत मे नागरिकता देने का मार्ग बताता है। लेकिन राजनैतिक रस्साकशी के चक्कर मे जनता को बरगला दिया गया और बवाल काटा जा रहा है। बाकी अगर आपको इस बिल की बारीकियां पढ़नी है तो गूगल कर लीजिए।

नोट: हमारा काम अफवाह फैलाना नहीं है, बल्कि इनको शान्त करना है, अगर आपके आसपास ऐसी किसी अफवाह को जन्म दिया जाता है तो एक स्वस्थ्य भारतीय नागरिक होने के नाते आपका फर्ज बनता है कि आप उसका शमन तत्काल रूप से कर दें।

इस पर पूर्व आम आदमी नेता ने एक काबिले तारीफ बात कही है जिसका संज्ञान लेना बेहद जरूरी है।

डिस्क्लेमर : लेख में प्रयुक्त शब्दों का चयन लेखक का निजी विचार है और संविधान में वर्णित "अभिव्यक्ति की आजादी" के अंतर्गत आता है, अब ये आजादी केवल दिल्ली के पीएचडी वालों भर को थोड़ी है।

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उदय बुलेटिन
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