उत्तर प्रदेश में हो रहे बलात्कारों के विरोध में छात्रों ने किया नुक्कड़ नाटक

बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी झाँसी के छात्रों ने नुक्कड़ नाटक के माध्यम से यूपी की कानून-व्यवस्था की पोल खोल दी
उत्तर प्रदेश में हो रहे बलात्कारों के विरोध में छात्रों ने किया नुक्कड़ नाटक
झांसी विश्वविद्यालय के छात्र नुक्कड़ नाटक करते हुए उदय बुलेटिन

बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी झांसी के छात्रों और आम युवाओं ने उप्र में हो रहे बलात्कारों को लेकर नुक्कड नाटक के जरिये निशाना साधा, छात्रों ने समाज मे चेतना लाने और सरकारी सिस्टम पर तंज कसते हुए झांसी शहर के इलाइट चौराहे पर कार्यक्रम किये।

बेटी होना अभिशाप बना:

उत्तर प्रदेश के झांसी शहर के अंतर्गत बेहद व्यस्ततम चौराहे पर झांसी विश्वविद्यालय के छात्रों द्वारा नुक्कड़ नाटक के माध्यम से समाज को उत्तर प्रदेश में बेटियों की स्थिति से अवगत कराया गया। छात्रों ने अपनी प्रस्तुति के माध्यम से लोगों को यह बताया कि उत्तर प्रदेश में बेटियां किसी भी हाल में सुरक्षित नही है। उत्तर प्रदेश बेटियों के लिए वर्तमान स्थिति में किसी नर्कगाह से कम नजर नहीं आता, फिर चाहे वह हाथरस की दलित बेटी का मामला हो या बलरामपुर का मामला, इन सभी घटनाओं में केवल एक चीज कॉमन नजर आती है और वह है बेटी के साथ होता अन्याय।

सिस्टम बच्चियों पर ही उंगली उठाता है:

नुक्कड़ नाटक के जरिये रंगमंच के छात्रों और कलाकारों द्वारा उत्तर प्रदेश के सरकारी तंत्र पर करारे प्रहार किए गए नाटिका में कलाकारों ने दर्शाया कि अगर किसी आम व्यक्ति की बेटी अचानक ही लापता हो जाये तो प्रदेश का पुलिस सिस्टम इस मामले में सबसे नकारात्मक भूमिका निभाता है, बेटी-बहन के गायब हो जाने की स्थिति में स्थानीय थानों में तैनात पुलिसकर्मियों का सबसे पहला सवाल यह होता है कि क्या बेटी का किसी के साथ कोई चक्कर तो नहीं था? जरा पता लगाओ किसी के साथ भाग तो नहीं गयी और जब तक मामले में सरगर्मी आती है तब तक बेटी की लाश किसी नाले या फिर झाड़ियों में सडी गली स्थिति में पाई जाती है।

बेटियों से पहले बेटों पर नजर:

छात्रों ने नुक्कड़ नाटक के जरिये समाज मे यह चेतना लाने का प्रयास किया कि बेटियों के पहनावे, घूमने फिरने से पहले बेटों पर नजर रखना आवश्यक है। लेकिन समाज की मानसिकता यह है कि बेटियों पर नजर रखी जाए इसका कोई न तो प्रमाणिक आधार है ना ही इसकी वैज्ञानिकता। जिस जगह छह वर्षीय बच्ची का बलात्कार कर दिया जाता है वहाँ पहनावे और चाल चलन की गुंजाइश ही नजर नहीं आती।

इस नुक्कड़ नाटक के मौके पर नाटिका में पुष्पेंद्र सिंह, भारत आजाद, पारस पाठक, स्नेहा कुमारी सोनू, मोहित प्रजापति और गौरव पांडेय इत्यादि युवा उपस्थित रहे।

⚡️ उदय बुलेटिन को गूगल न्यूज़, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें। आपको यह न्यूज़ कैसी लगी कमेंट बॉक्स में अपनी राय दें।

Related Stories

उदय बुलेटिन
www.udaybulletin.com