Coronavirus and Nature
Coronavirus and Nature|Google
नजरिया

आज मंथन का दिन है, आइए अपने कर्मों पर नजर डाले। 

एक अदने से वायरस ने हमें अपनी करतूतों पर सोचने को मजबूर कर दिया। 

Shivjeet Tiwari

Shivjeet Tiwari

हम उस विश्व मे जी रहे है जहाँ रोज नए-नए हथियार और संसाधन खोजे जा रहे है आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के नए आयाम पैदा किये जा रहे है।हम लोगों के अंग बदलने में सक्षम है, हम एक व्यक्ति का ह्रदय, गुर्दा दूसरे व्यक्ति में फिट कर सकते है लेकिन ये क्या ? हम आज बेबस भी है, हमारे जेहन में ख़ौफ़ भी है और दुनिया मे तैरती हुई खबरों को लेकर आतंकित है। और ऐसा नहीं कि ये खबरे झूठी है, सच और हमारा डर भी जायज है तो फिर आज के ख़ौफ़ का कारण क्या है ?

कोई दूसरा? जी नहीं हम सब, एक बार फिर सुनिए हम सब ........

हमने कोई कसर नहीं छोड़ी........हमने उस नेचर, प्रकृति से पंगा ले लिया है जिसके सामने हम बच्चे भी नहीं है गर्भस्थ शिशु की भांति है जिसको पूरी तरह से अपनी माता पर आश्रित रहना है लेकिन फिर भी अपनी नादानियों के चलते माँ के पेट पर ही लाते चला रहा है। आखिर प्रकृति भी कब तक सहती उसने एक के बाद एक करवट लेनी शुरू कर दी है जिसका खामियाजा हर एक इंसान को भुगतना है।

हम बहुत भुल्लकड़ है :

हमने मदर नेचर के हर इशारे और हर हिदायत को अपने जूतों पर रखकर आगे बढ़ते गए और आगे जाने की जद्दोजहद में हमने इतने नियम तोड़े की हमे खुद याद नहीं। हालांकि प्रकृति हमे कभी सुनामी, तो कभी भूकम्प तो कभी सार्स और इबोला जैसे माध्यमो से संकेत करती रही। लेकिन हमें इतनी फुर्सत ही कहाँ थी हमने नेचर के इशारों को धता बताकर किसी तरह अपना काम निकालना चाहा और अब हालात यह है कि जो महाशक्ति देश किसी भी देश को चुटकियों में मिटाने की कूबत रखते थे आज वो एक बेहद छोटे वायरस के सामने घुटने टेक कर बैठे हुए है।

इंसान फिर से जानवर बन गया :

कहते है इंसान बदलाव से पहले जानवर था वह चारो पैरों पर चलता था, चारा, कच्चा मांस खाने का आदी था फिर इंसान विकसित हुआ, विचार आये खुद को स्थापित किया और उसके बाद उसने नेचर को नुकसान पहुचाना शुरू कर दिया और उसका इस कदर दोहन किया इसकी गवाह सदियां है। फिर नेचर ने अपने सबसे पहले दिमाग वाले बेटे को समझाने का प्रयास किया, नहीं माना तो हल्के-फुल्के नजारे दिखाए लेकिन इंसान कहाँ सुधरने वाला था उसने हर नसीहत को नकारा फिर नेचर ने इंसान को जानवर की तरह ही बनाने की कसम खा ली और आप देख सकते है जो जानवर कभी मुश्क लगाए घूमते थे आज इंसान मुश्को में नजर आएगा (मास्क मुश्क का नया रूप माना जा सकता है)।

बड़े-बड़े तीस मार खान धराशायी :

कहने को अमेरिका, चीन, रूस, अंतरिक्ष मे स्थापित सैटेलाइट को लेजर बीम और मिसाइल से मार गिरा सकते है लेकिन नेचर की एक हरकत ने इन सभी महाशक्तियों को जमीन पर लिटा दिया है। इलाज की तो बात ही छोड़ दीजिए ये देश केवल बचाव भी नहीं कर पा रहे।आखिर चीन में जहां से ये वायरस निकला और जहां जहां गया वहाँ कब्रिस्तानों की कमी पड़ गयी। आखिर यही होता है प्रकृति से विरोध का अंजाम। मानवता जीने की उम्मीद रखने के सिवाय और कुछ नहीं कर पा रही।

उदय बुलेटिन के साथ फेसबुक और ट्विटर जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।

उदय बुलेटिन
www.udaybulletin.com