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नजरिया

क्या समाज मे बढ़ रहा है अंतर्विरोध, क्या होगा परिणाम ?

पिछले कुछ दिनों से टीवी और सोशल मीडिया में दिखाई जा रही खबरों से समाज का एक बड़ा वर्ग आशंकित हो चुका है और अपने भविष्य को लेकर काफी चिंतित नजर आ रहा है।

Shivjeet Tiwari

Shivjeet Tiwari

लोग अब अपनी कालोनी, गली मुहल्लों में सब्जी भाजी बेचने वालों से आधार कार्ड की मांग कर रहे हैं। और अगर बेचने वाला किसी दूसरे समुदाय से है तो उसे एतिहातन बाहर का रास्ता दिखा दिया जा रहा है। आखिर इसके पीछे क्या कारण हो सकते है? ये चर्चा का विषय हो सकता है।

छिटपुट घटनाओं ने बढ़ाया आक्रोश :

अब चाहें फलों पर थूक लगाकर बेचता हुआ समुदाय विशेष का व्यक्ति हो या फिर सब्जियों को नाले के पानी से साफ करके लोगों को सब्जियां खिलाता हुआ विक्रेता। इन सबके पीछे एक चीज बेहद कॉमन थी जिसको लेकर समाज मे एक मजबूत धारणा सी बन चुकी है जिसे तोड़ना आसान तो बिल्कुल नहीं। क्योंकि किसी विश्वास और परिपाटी को बनाने में सदियां बीत जाती है लेकिन अगर कोई एक नुक्स निकल आये तो इसे टूटने में समय नहीं लगता। इसके ताजा रुझान बड़े शहरों से लेकर गांवों तक में नजर आने लगे है जिसमें फल और सब्जी विक्रेताओं के पहचान पत्र आधार कार्ड इत्यादि की तस्दीक करके ही गली मोहल्ले में फल और सब्जी बेचने की इजाजत दी जा रही है। ये अहर्ताएं न पूरी करने पर इन्हें बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है।

तबलीगी जमात ने बढ़ाई मुश्किलें :

हालाँकि यह कह देना कि कोरोना फैलाने का श्रेय तबलीगी जमात को जाता है यह बेमानी होगा। लेकिन यह भी सच है तबलीगी जमात के खुलासे के बाद देश मे छुपे हुए कोरोना संक्रमितों को संख्या में इजाफा हुआ और मामला यहीं तक सीमित रहता तब भी ठीक था लेकिन इसके बाद शुरू हुआ जाहिलियत का दौर, फिर चाहे वह जांच के लिए पहुँची टीम पर हमला करना, अस्पताल में सब जगह थूक-थूक कर कोरोना फैलाने के लगते आरोप, या फिर देश भर की मस्जिदों में छुपे हुए विदेशी मौलानाओं का निकलना और उनका संक्रमित पाया जाना। ये सब मामले आग में घी डालने का काम कर गए। नतीजन समाज का एक बहुत बड़ा हिस्सा इन हरकतों को लेकर चिंतित हो गया और बचाव के रास्ते खोजने लगा।

यहाँ पर एक बात की चर्चा करना बेहद आवश्यक है कि देश मे जामाती संगठनों से जुड़े हुए लोगों की बदतमीजी का स्तर लोगों को लगातार आक्रोशित कर रहा है यही कारण है सरकार को इन हरकतों को लेकर कड़े कदम उठाने पड़ रहे है और इसी चक्कर मे समाज में लागातर तल्खी नजर आ रही है. 

जिम्मेदार लोग वक्त पर नहीं बोल पाए:

लोगों के आक्रोश में उस वक्त उबाल महसूस किया गया जब समुदाय विशेष के नेता असदुद्दीन ओवैसी तब तक जमात के लोगों पर नहीं बोल पाए जब तक उन्होंने अपनी नासमझी और धर्मांधता की वजह से कोरोना को बढ़ाने का काम किया। लेकिन जब पुलिस उन लोगों के साथ सख्ती बरतने लगी और जनता का सीधा विरोध जमात से होने लगा तब ओवैसी ने समुदाय विशेष को निशाना बनाये जाने की बात कह दी। लोगों की माने तो ओवैसी जैसे नेता तब कहाँ गायब हो गए थे जब जमात की बेवकूफी की वजह से देश मे कोरोना के संक्रमितों की संख्या बढ़ाई जा रही थी।

डिस्क्लेमर : लेख में लिखे गए सभी विचार लेखक के है, उदय बुलेटिन के विचार इससे भिन्न हो सकते है, यहाँ लेखक यह सुनिश्चित करना चाहता है कि उसका उद्देश्य यह कतई नहीं है कि समुदाय विशेष की भावनाएं आहत हो, लेकिन चूंकि मामला देश की आम जनता से जुड़ा हुआ है तो लिखना आवश्यक हो जाता है।

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उदय बुलेटिन
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