बीते साल से हमने सीखा क्या? वही पुरानी कहानी है गुरु, बतोले चचा से सुनो 2021 का वर्षफल

भविष्य किसी ने नही देखा, अगर देखा होता तो 2019 में ही 2020 कि भयावहता के बारे में आगाह कर दिया जाता।
बीते साल से हमने सीखा क्या? वही पुरानी कहानी है गुरु, बतोले चचा से सुनो 2021 का वर्षफल
बीते साल से हमने सीखा क्या?Google Image

देखो अगर दिमाग मे ये संजोए बैठे हो कि कोई चमत्कार टाइप का होगा ! तो ऐसा कुछ नही है, लगभग सब कुछ वैसा ही है जैसा 2020 था, थोड़ा बहुत अंतर तो समोसों के साइज में भी होता है। खैर बात बीते साल से कुछ सीखने और नए साल के भविष्यवाणी से जुड़ा हुआ है तो हमारे पास ज्ञान का अथाह भंडार है, लेते जाइये, शुक्रिया की कोई जरूरत नही है।

आखिर बीता साल कैसा रहा?:

अरे गुरु साल वाल क्या कहो 2020 को ये तो पक्का वाला काल था गुरु। शुरुआत इन्हीं सर्दियों से हुई थी और अंत भी सर्दियों से हुआ। लेकिन मजाल क्या जो साल के हर दिन में अनिश्चितता न भरी रही हो, शुरुआत के दिनों से ही पहले ख़बरों में सामने आया कि चीन में किसी ने चमगादड़, सांप और कुत्ता वगैरह खा लिया है तो वहां कोई अजीबोगरीब बीमारी फैल रही है। खैर हम उस वक्त तक निशंक थे कि कोई बात नही भारत मे थोड़े ही है। लेकिन भूगोल का एक सिद्धांत अचानक से याद आया कि दुनिया है न जो वो तो गोल है और ये दुनिया यानी कि पृथ्वी घूमती भी है। कुछ लोग भारत से गये और कुछ लोग बाहर से आये जो कोरोना को मुफ्त में भारत लेकर आ गए। फिर शुरू हुआ ग़दर का माहौल, सबसे पहिले सरकार ने जनता कर्फ्यू का टेस्ट ड्राइव कराया और बाद गुड़ दिखाकर ईंट मार दी, ले लॉक डाउन, दे लॉक डाउन और ये सब चलता रहा और अभी भी चल ही रहा है।

सरकार बोली कि सबको खाना देंगे, दिया भी, लेकिन भारत जितनी आबादी को खाना मुहैया कराना कोई हसीं खेल तो है नही, मजदूरों ने अपनी खोई हुई पुरानी दुनिया की खोज के लिए वास्कोडिगामा बनकर रेल की पटरियां, सड़के हाइवेज नाप डाले। कुछ मजदूर ट्रेन में कुचलकर मारे गए तो कुछ वाहनों की टक्कर से, लोग कोरोना से तो मर ही रहे थे लेकिन बिना कोरोना के भी लोग बेदर्दी से मारे गए।

खैर इसके बाद शुरू हुआ लोगों के वायरोलॉजी के विशेषज्ञ बनने का दौर, लोगों ने बताया कि गर्मी आने दो ये वायरस तो भारत की गर्मी के आगे घुटने टेक देगा। लेकिन हालात इससे बिल्कुल उलट रहे, ज्यों ज्यों गर्मी ने अपने तेवर दिखाए लॉक डाउन के बावजूद कोरोना अपनी फितरत के हिसाब से आगे बढ़ता रहा। इसी दौरान शुरू हुआ वैक्सीन का झमेला, कोई 80 प्रतिशत कारगर समझ मे आयी तो कोई 90 प्रतिशत खैर हाल फिलहाल में हालात यह है कि देश दुनिया मे लगभग सभी जगह टीकाकरण की शुरुआत की जा रही है देखते है कि आखिर ये अजर अमर कोविड इन वैक्सीनों के सामने हार मानता है या नही।

2020 ने हमें क्या क्या सिखाया?

  • यही कि आप कुछ दिनों के लिए यांत्रिक सुख सुविधाओं से दूर रहकर भी जिंदा रह सकते है।

  • पति पत्नी बिना कलह किये घर मे रह सकते है।

  • पत्नियों को पति के घरों में होने के फायदे नुकसान समझ मे आये।

  • पतियों ने सीखा कि ऑफिस में बॉस की डांट भी पत्नी के जुल्मों सितम से बेहतर है।

  • जो लोग गांव देहात के घर मकानों को छोड़कर महानगरों में बस गए थे उन्हें सबक मिला कि ग्राम्य जीवन की अपनी एक अलग पहचान है।

  • लोगों ने अंग्रेजी के कुछ भयानक शब्द सीखे जैसे "आइसोलेशन, क्वारंटाइन, स्ट्रेन, सेनेटाइजेशन, इत्यादि इत्यादि।

भविष्य कैसा रहने वाला है:

देखिए भविष्य किसी ने नही देखा, अगर देखा होता तो 2019 में ही 2020 कि भयावहता के बारे में आगाह कर दिया जाता।

भले ही वैक्सीन आने वाली है टीकाकरण शुरू होने वाला है लेकिन लोगों की नाक और मुँह से मास्क इतनी जल्दी उतरने वाला नही है। दूरी बनाइये, साफ रहिए, खानपान पर विशेष ध्यान रखिये और ऊपर वाले से दुआ मनाइए की चाइना वाले फिर से कुछ उलजुलूल न खाए वरना पता नही अबकी बार मास्क कहां कहां लगाना पड़े।

और भविष्य में कोरोना से बचने के लिए अठावले बीजमंत्र "गो कोरोना गो को सम्पुट नो कोरोना नो के साथ पाठ किया जा सकता है, इससे कोरोना भागे या न भागे लेकिन आत्मिक सुख मिलता रहेगा।

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उदय बुलेटिन
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