gangster Vikas dubey
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गैंगेस्टर विकास दुबे लंबे वक्त तक राजनीति का हथियार बना रहा, जब बेकाम हुआ तो बाहर फेंक दिया

गैंगेस्टर विकास की मां ने बताया कि उनका बेटा राजनीति में जाने के लिए अपराध के रास्ते पर चल पड़ा, वह पहले बीजेपी में फिर बसपा में और अब सपा में था।

Shivjeet Tiwari

Shivjeet Tiwari

आपको हिंदी सिनेमा के कुछ पात्र याद होंगे जो राजनैतिक संरक्षण में रहकर अपराध को अंजाम देते है, लेकिन एक वक्त ऐसा आता है जब उसकी जगह कोई दूसरा अपराधी ले लेता है। ठीक वैसा ही माजरा कुछ विकास दुबे का है, जहाँ पर विकास प्रदेश के नेताओं के हाँथ कि कठपुतली बनकर आपराधिक ढंग से साफ सफाई करता रहा। बाद में जब खुद को कांटा बनने लगा तो बाहर निकाल कर फेंक दिया, अब विकास के लिए उत्तर प्रदेश की जमीन को इतना गर्म किया जा रहा है कि वह ठीक तरीके से पांव न रख सके। नतीजन आज नहीं तो कल तक विकास जमीन पर लेटा हुआ मिलेगा और ऐसा होना भी चाहिए क्योंकि स्वस्थ समाज मे विकास जैसे लोगों की कोई जगह नहीं है, लेकिन क्या देश की राजनीति इस बात की गारंटी दे सकती है कि फिर कोई विकास पैदा नहीं होगा"?

ददुआ ठोकिया खत्म पर विकास निर्दोष कैसे:

उत्तर प्रदेश में बसपा का शासन काल, जो दुर्दांत डकैतों के लिए काल के समान रहा, फिर वह चाहे उत्तर प्रदेश के चित्रकूट मानिकपुर का क्षेत्र हो, डकैती जगत का सबसे लंबा जीवन जीने वाला डकैत ददुआ जिसको मारने के लिए एसटीएफ ऑपरेशन करने गयी मारकर लौटते समय एक वक्त तक ददुआ को गुरु मानने वाला डाक्टर अम्बिका पटेल उर्फ ठोकिया सरकार के मंसूबे जान चुका था, वह ददुआ से दुश्मनी भुलाकर पुलिस पर टूट पड़ा और भारी संख्या में एसटीएफ के जवान शहीद हो गए हालांकि बाद में पुलिस ने जुगत भिड़ाई और ठोकिया के साथ-साथ घनश्याम केवट (जिसके साथ उत्तर प्रदेश की सबसे लंबी मुठभेड़ हुई, जिसमे डीजीपी तक को गोली मारी गयी) भी निबटा दिए गए वहीँ कानपुर में हिस्टिसिटर सम्मेलन में विकाश दुबे को क्लीन चिट दी गयी, नजरिया यह है कि जो अपराधी राज्य के दर्जा प्राप्त मंत्री को थाने में घुसकर गोलियों से भून देता है वह निर्दोष कैसे ?

माँ ने कहा, मन दुखी है, मार दो इसे :

सत्ता बदलती रही लेकिन विकाश का विकास होता रहा:

आज भले ही सरकारें और विपक्ष पुलिसकर्मियों के शहीद होने के बाद घड़ियाली आंसू बहाती हुई नजर आए लेकिन ये वही पक्ष और विपक्ष है जिन्होंने इस आपराधिक दानव को न सिर्फ फलने फूलने दिया बल्कि इसी विकास ने भाजपा के नेता को पुलिस थाने में घुसकर गोली मारी और सपा सरकार ने इसे जिलापंचायत के लिए उम्मीदवार भी बनाया, कभी बसपा और कभी सपा, राजनैतिक दलों की सेवा लेता रहा। सत्ताएं आती रही और जाती रही लेकिन विकास हमेशा से ही सत्ता की छांव तले पलता बढ़ता रहा वहीँ भाजपा के नेता (दर्जा प्राप्त मंत्री ) को थाने में गोली मारी गयी उसी के शासन में सरकार ने कोई एक्शन नहीं लिया बल्कि छुटपुट जानकारियों के अनुसार भाजपा के तमाम नेता इसी विकास की मदद लेते और देते रहे हैँ। यही कारण है कि डिप्टी एसपी रैंक के अधिकारी के ऊपर गोली चलाने का साहस विकाश कर पाया। उसे उम्मीद थी इतने बड़े वाकये के बाद भी वह बच पायेगा लेकिन मामला उल्टा हो गया और समीकरण फेल होने लगे। शनिवार के दिन पुलिस ने विकास के महल नुमा मकान और बंकर को उसी जेसीबी से ढहा दिया जो उसके मकान के सामने खड़ी थी और घटना वाले दिन पुलिसकर्मियों की जान लेने में विकास की सहायक बनी।

क्या हो सकता है भविष्य?

किसी महापुरुष ने कहा था कि अपराध समाज का अंग है और यह हमेशा रहेगा, ठीक वैसे ही जिस तरह की राजनीति भारत में और प्रदेश में पैर पसारे हुए बैठी है उसके अनुसार एक विकास के मर जाने के बाद ही दूसरा विकास पैदा होगा, पैदा क्या होगा बल्कि हो चुका होगा क्योंकि किसी न किसी को जगह तो लेनी ही होगी बस फिक्र इस बात की है कि इस बार यह कांटो का ताज कौन पहनेगा ताकि सत्ताओं के आगे रहकर उनके कांटे हटाये जाते रहे।

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उदय बुलेटिन
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