Akhilesh Yadav on Kanpur Encounter
Akhilesh Yadav on Kanpur Encounter|Google Image
नजरिया

क्या अखिलेश यादव राजनीतिक विरोध में संवेदना को मार चुके है? पूर्व डीजीपी ब्रजलाल ने अखिलेश को सुनाया

राजनैतिक विरोध की एक निर्धारित हद होती है लेकिन भारत मे और खासकर उत्तर प्रदेश में यह अपनी निम्नतर सीमा पर पहुँच चुका है यहां, पुलिसकर्मियों की मौत पर भी मजे लिए जा रहे हैँ।

Shivjeet Tiwari

Shivjeet Tiwari

पिछले दिनों कानपुर में हुए पुलिस हत्याकांड में उत्तर प्रदेश पुलिस के डिप्टी एसपी रैंक के अधिकारी से लेकर एसआई और आरक्षियों की जाने गयी जिसको लेकर पूरे प्रदेश और देश मे संवेदना की लहर दौड़ गयी लेकिन पूर्व में प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके अखिलेश यादव इस मामले पर बड़ी ही असंवेदनशील पोस्ट कर बैठे, अखिलेश यादव ने बीबीसी हिंदी द्वारा बनाये गए वाहयात कार्टून को अपने सोशल मीडिया के लगभग सभी एकॉउंट से पोस्ट किया जिसको लेकर सब जगह थू-थू होती हुई नजर आ रही है।

क्या था अखिलेश यादव का पोस्ट:

पोस्ट क्या था, शहीदों की शहादत पर भद्दा मजाक था, दरअसल एक कार्टून है जिसमें उत्तर प्रदेश पुलिस के द्वारा यह कहते हुए दिखाया जा रहा है कि सभी अपराधियों को यूपी पुलिस द्वारा चारो तरफ से घेर लिया है। इस पर अपराधियों द्वारा भी सेम टू यू कहते हुए दिखाया गया है, इस मामले पर लोगों के द्वारा तल्खी दिखाई जा रही है कि एक जिम्मेदार नेता इस तरह के वाहयात और फर्जी की अभिव्यक्ति की आजादी वाली बातें राजनीतिक विद्वेष के बहाने कैसे पोस्ट कर सकता है।

पोस्ट पढ़ लीजिये:

हालांकि इस पर लोगों के भी बयान सामने आने लगे है, लोगों ने अखिलेश की मानसिकता पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं।

अभिनेष नाम के ट्विटर यूजर ने तो बाकायदा अखिलेश यादव को आइना भी दिखा दिया और बताया कि मुख्य आरोपी विकाश दुबे आपकी पार्टी का ही गुर्गा था।

हालांकि आपको बताते चले कि अभी तक समाजवादी पार्टी के द्वारा विकाश दुबे को लेकर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

मामले में बेहद तल्ख प्रतिक्रियाएं सामने आ रही है, लोग अखिलेश के कार्यकाल के मामले ताजा कर रहे हैँ। पूर्व डीजीपी ब्रजलाल ने अखिलेश यादव पर तीखा प्रहार किया है, सनद रहे कि चित्रकूट के घनश्याम केवट मुठभेड़ में एडीजी पोस्ट पर तैनात रहे श्री ब्रजलाल ने मौके पर जाकर मोर्चा संभाला था और 16 जून 2009 की मुठभेड़ में घनश्याम केवट उर्फ न्याम की गोलियों से बाल-बाल बचे थे।

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उदय बुलेटिन
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