हाथरस की नकली भाभी
हाथरस की नकली भाभी
नजरिया

बतोले चचा काफी परेशान है, माजरा हाथरस की नकली भाभी से जुड़ा हुआ है

हाथरस मामले में नकली भाभी कांड के बाद, उदय बुलेटिन के बतोले चचा भी एक ऐसी भाभी की तलाश कर रहे हैं जो मौका पड़ने पर भाभी की कमी पूरी कर सके, खासतौर पर होली में रंग खेलने के लिए।

Shivjeet Tiwari

Shivjeet Tiwari

दरअसल हाथरस कांड में एसआईटी और लोकल इंटेलिजेंस यूनिट ने पीड़ित के घर हादसे के दो दिन बाद ही नकली भाभी के होने की खबर दी हालांकि जब तक जांच एजेंसियां भाभी तक पहुँचती तब तक भाभी अपने देवरों को चकमा देकर निकल ली, हालांकि यूपी पुलिस और जांच एजेंसियां इस मामले को परत दर परत खोल कर जानकारी जुटा रही हैं लेकिन इस भाभी वाले प्रकरण को लेकर बतोले चचा काफी टेंसनियाये पड़े है, चचा की बातें चाचा की जुबानी सुनो"

देखो गुरु, हम रहे अपने भाइयों में सबसे बड़े ,तो हमारे घर मे काफी महिला पदों पर भर्ती हुई, कभी कोई बहू लगी कभी सास, तो कभी दीदी लेकिन जिंदगी में एके कसक रही भाभी की यानी कि भौजाई नही मिली काहे की हमसे हमारे घर मे कोई बड़ा ही नहीं है। हमहि पहिले थे जो पैदा होने के लिए रिजर्वेशन कराकर आये थे इस भूलोक पर, हालांकि ऐसा नहीं कि इस दुनिया मे कोई हमारी भाभी नहीं हुई, दूर के रिश्तों में भाभियाँ थी, पड़ोस में भी थी, कई बार भाभी बोलने के चक्कर मे मुहल्ले पड़ोस में अपने से 10 साल छोटे लड़कों की पत्नियों को भाभी कह भी देते थे लेकिन कमबख्त मौके पर ही छीछालेदर कर देना उनका फेमस शगल बन चुका था। जवाब भी इत्ता मारक होता कि काहे गुरु तुम तो हमसे 10 साल बड़े हो, फिर भौजाई कैसे हुई हमारी पत्नी ?

हमहू मन मारकर सीधा सरल जवाब देते भाई भूल हो गए हमको लगा राम मनोहर की बहुरिया है, लेकिन ससुरा यहां भी बवाल, वही पड़ोसी तमककर जवाब देता की तो तुमते तो मनोहरा भी तीन महीने छोटा है तुम कातिक में भये थे और मनोहरा फाल्गुन में ......हम मन मे बुदबुदाते रहिते यहां हमे दुइ साल पहले की घटना याद नहीं, इनको पचास साल का कांड याद है, खैर अब भौजाई यानी कि भाभी को लेकर संभावना जग गयी है काहे की जब ते हाथरस कांड हुआ बिटिया के बारे में रेडियो टीवी अखबार में देखा सुना, काफी तकलीफ हुई लेकिन इसी बीच एक खबर औरो सुनने को मिल गयी, कि पीड़ित परिवार के घर मे एक नई नवेली भाभी भी उत्पन्न हो गयी।

उत्पन्न होने का यो मतलब न निकाल लो कि भाभी आज कल में ही पैदा हुई, भरी पूरी भाभी थी, उम्र तीसक साल से ज्यादा, वैसे है बड़ी भद्र महिला, इज्जतदारी से पेश आती रही मजाल क्या की कौनो मीडिया वाला पत्रकार उनसे बिना बयान लिए चला जाये और उनका चेहरा भी नजर में आये।

खैर सरकार और जांच एजेंसियां अपने काम मे लगी हुई है भाभी जी कितना दौड़ लगाए एक न एक दिन तो मुँह दिखाई होनी ही है, मुहल्ले के छुटकू बोलते रहे कि जो नकली भाभी रही वो कौनो कालेज में प्रोफेसर भी है, खैर हमें का, भाभी जाने और भाभी के देवर, हमें अपनी प्रॉब्लम इस मामले में सॉल्व होती नजर आ रही है।

जहाँ तक सोशल मीडिया में बात फैल रही है उसके हिसाब से भाभी जी का नाम शक्ल सब उजागर हो गया है, सोशल मीडिया में जानकारी मिली है कि भाभी जी राहुल गांधी की जबर फैन है, बाकायदा फॉलो भी करती है, और तो और जानकारी यह भी मिली है कि जब राहुल गांधी और उनकी दादी जैसी शक्ल वाली बहन प्रियंका गांधी वाड्रा (किलियर नही है गुरु हम वाड्रा और गांधी में) पीड़ित परिवार में मिलने गयी थी आवभगत का सारा जिम्मा नकली भाभिये सम्भाली थी, बाकायदा भेंटभांट भी हुई गले लगाकर।

अब लगता है गुरु की अबकी बार गांधी सरकार का नारा लगाया जाए काहे कि जब कांड में घी डालने के लिये पीड़ित परिवार के घर मे नकली भाभी की पोस्टिंग की जा सकती है तो सरकार बनने पर हो सकता है कि हर मतदाता के घर मे एक एक नकली भाभी उपलब्ध करा दी जाए ताकि देवरों को ठेस न पहुँचे।

गुरु हमारी समस्या भाभी से बहुत विकट रूप में है, काहे कि जैसे फागुन चढ़ता है औ पलाश के पेड़ अपनी काली काली पत्तियों के बीच मे से लाल-लाल फूल निकालता है हमारे मन का होरियारा ( होली में हुड़दंग मचाने वाला) अपनी उम्र के बंधन तोड़कर होली के लिए तैयार होता है लेकिन जैसे भाभी खोजो मामला फुस्स.…....

काहे की न भाभी न होली !!!!!

एकाध बार ट्राय भी किये पड़ोस में एक भैया है हमसे पूरे तीन मिनिट बड़े, सोचा भौजाई यही है मायके नहीं गयी तो सोचा एक बाल्टी रंग उड़ेल दे, बड़ी शिद्दत से रंग घोला बिसलरी वाले पानी में और पहुँच गए दरवाजे, देखा भैया भांग का अंटा खाये मस्त है हमने निकलने का उम्दा प्रयास भी किया लेकिन असफलता हाँथ लगी, भैया बिल्कुल देशी कुत्ते की माफिक नींद से जागकर बोले "बतोले- कहाँ घुसे जाय रहे हो ?

हम बोले भैया होली खेलेंगे भौजाई के साथ,

इहा हमारे साथे खेलो, काहे हमारे कांटे लगे है का ??

ज्यादा हुशियार न बनो, निकलो तुरंत घर वरना अधकटा डंडा है हाँथ में अगली होली तक दर्द करेगा।

बेमन से वही बाल्टी अपने ऊपर उड़ेलकर घर आये तब से भाभी की बहुत चाह है, अगर ऐसी कोई नकली भाभी मिले तो हमारे पते पर भिजवाने का कष्ट करें।

डिस्क्लेमर: हजार बार बता चुके है बतोले चाचा रोमांचक ह्रदय के व्यक्ति है, मौके बे मौके अपनी गुड़गुड़ाहट लोगों के सामने रखते रहते है, तो लिखे हुए लेख को हल्के ह्रदय से पढ़े और केवल आनंद ले, दिल और दिमाग लगाने की बिल्कुल जरूरत नही है, सीरियस तो बिल्कुल नहीं होना है, काहे कि इसमे कुछ ऐसा है ही नही जिसे आप सहेज कर रख सकें।

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उदय बुलेटिन
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