उदय बुलेटिन
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देश के वीर जवान।
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नजरिया

26/11 की तवाही भी हार गई थी इंसानियत के सामने

आज ही के दिन हुआ था मुंबई अटैक।

Shivjeet Tiwari

Shivjeet Tiwari

भारत मे अतिथि देवो भव की परंपरा सदियों पुरानी है, यहाँ आये हुए अतिथि और अभ्यागत को अपने प्राणों की परवाह न करते हुए देशी-विदेशी टूरिस्टों की जान बचाकर ताज के कर्मचारियों ने दुनिया के सामने एक बड़ी मिशाल कायम की थी, इस मामले के बाद विश्व की चुनिंदा यूनिवर्सिटीज ने इस मामले पर शोध किये कि आखिर क्या था उन होटल कर्मियों के बीच, जो वहाँ से निकल कर अपनी जान बचा सकते थे लेकिन उन्होंने अपनी कुर्बानी देकर लोगों को बचाया।

तुकाराम ओमले , हेमंत करकरे और एनएसजी के मेजर समेत सैकड़ो लोगों ने इस बड़े आतंकी हमलों में अपनी जान पाकिस्तान से आये आतंकियों के हांथो गंवा दी थी, आज उसकी बरसी है।

कहते हैं वक्त घाव भर देता है लेकिन जख्म के निशान शरीर पर मरते दम तक रहते है, ऐसा ही कुछ हाल भारत मे 2008 के नवंबर माह में हुआ।

सिने जगत के महानायक का 26/11 के शहीदों को नमन:

सन 2008 के नवंबर की छब्बीसवी तारीख जिसने भारत के इतिहास पर स्याह अंकों से कुछ ऐसा लिखा जिसे भारतीय सदियों तक नहीं भूल पाएंगे, रात के अंधेरे में समुद्र के रास्ते से आये 10 पाकिस्तानी धर्मांध आतंकियों ने मुम्बई में वह मारकाट मचाई जो लगभग चार दिनों तक चली और सरकारी रिकार्ड में अंकित करीब 155 लोग काल के गाल में समा गए, साथ ही अलग-अलग जगहों पर करीब 305 लोग भयानक रूप से घायल हुए, घायलों और मृतको के शरीर पर हैंड ग्रेनेड के टुकड़े और एके 47 की गोलिया बर्बरता पूर्वक बरसाई गयी थी, हमले मुंबई के लियोपोल्ड कैफ़े,छत्रपति शिवाजी टर्मिनल, ओबेराय ट्राइडेंट, कामा अस्पताल, नरीमन हाउस और ताज होटल जैसे महत्वपूर्ण जगहों पर किये गए।

यह एक सुनियोजित आतंकी घटना थी आतंकी आकाओं को यह मालूम था कि कब कहाँ और कैसे हमले किये जायें, हालकि इस बारे में सुरक्षा ( गुप्तचर) एजेंसियों की बहुत बड़ी खामी नजर आयी थी।

ताज ने ताज ऊँचा किये रखा :

ताज होटल समुद्र के बेहद किनारे एक ऐसा होटल जिसमें रुकने के अलावा भव्यता देखने के लिए भी लोग दूर-दूर से आते है, आपको बताते चलें कि यह होटल देश की आजादी के पहले भी अपने वजूद में था आजादी के बाद इसे टाटा ग्रुप ने अपने अधिकार में लिया और हॉस्पिटैलिटी के नए आयाम स्थापित किये।

मुम्बई में जिस वक्त हमला हुआ उस वक्त ताज में भारतीय लोगों के अलावा बहुत सारे विदेशी अतिथि भी थे इन विदेशियों में इजरायल, अमेरिका, और ब्रिटेन के लोग भी थे और आतंकियों की पहली नजर इजरायल और अमेरिका के लोगों पर थी।

होटल स्टाफ ने सार्थक बनाया अतिथि देवो भव :

आतंकियों ने होटल में घुसते ही भयानक गोलाबारी की जिसकी वजह से एंट्रेंस पर ही लाशें बिछ गई और फिर आतंकियों ने होटल में स्थित अनेक कमरों की तलाशी लेना शुरू किया और ठहरने वाले अतिथियों को ढूंढ-ढूंढ कर गोली मारने की चाल चली।

हालांकि हमले के तुरंत बाद भारत की सुरक्षा एजेंसियां हरकत में आ गयी थी, मुम्बई एटीएस अपने चीफ की शहादत भी दे चुकी थी, मुम्बई पुलिस के ही एक सिपाही शहीद तुकाराम ओमले ने जिंदा आतंकी पकड़ा कर खुद सीने पर गोलियाँ खाई।

पर अब वक्त बड़े ऑपरेशन का था, जहाँ एनएसजी जैसा शातिर सैन्यबल अपने कामों के लिए जाना जाता है, उसने दिल्ली से मुम्बई पहुँच कर अपनी कार्यवाही शुरू की लेकिन असल समस्या थी बंधकों को बचाना जिसमें ताज के कर्मचारियों ने बहुत साहसिक काम किया जिसके लिए उन्हें देश-विदेश से बहुत सम्मान मिला, अपनी जान देकर होटल में ठहरे लोगो को बचाने की वजह को लेकर विश्व की जानी मानी यूनिवर्सिटीज ने अध्धयन किये जिसके कुछ रहस्य सांमने आये।

  1. अधिकांश कर्मचारी 23 से 30 वर्ष की उम्र के थे :- होटल ताज में उस वक्त जो 600 कर्मचारी मौजूद थे उनकी उम्र बेहद कम थी आप उन्हें युवा भी मान सकते है, युवावस्था में जोश के साथ काम करने की प्रवत्ति रहती है जिसकी वजह से कर्मचारियों ने अपनी जान की परवाह न करते हुए लोगों को बचाया।
  2. लगभग सभी छोटी जगहों से थे :उस वक्त होटल ताज में जितना भी स्टाफ था वह किसी महानगर से जुड़ा हुआ नहीं था, बल्कि भारत के दूरदराज क्षेत्रों से आये हुए लोग थे ताज ग्रुप ने एक इनिशिएटिव के तहत वंचित भारत के लोगों को नौकरी पर रखा था। और अध्ययन में यह सांमने आया कि ग्रामीण और छोटे शहरों के लोग आत्मिक ज्यादा होते है उन्हें मानव मूल्यों की परवाह ज्यादा होती है।
  3. चयन अंकों को देखकर नहीं हुआ : होटल ताज में उस वक्त के सभी कर्मचारियों का चयन योग्यता के आधार पर कम और नैतिक आधार पर ज्यादा किया गया था वेरिफिकेशन में यह सबसे पहले देखा गया कि उक्त व्यक्ति का समाज, स्कूल, माता-पिता, परिवार और पड़ोस में कैसा संबंध है, बाकी हॉस्पिटैलिटी तो ताज वाले खुद सिखा देते ही है।

यही कारण रहा कि मौके पर मौजूद कर्मचारियों ने मानव चेन बनाकर भी अतिथियों की रक्षा की और उसी समय आतंकियों ने गोलियां बरसा कर मानव चेन बनाये ताज होटल कर्मियों को मौत के मुंह मे धकेल दिया।

भारत हमेशा से शांति पसंद देश रहा है लेकिन हमारे पडोसी देश पाकिस्तान की नीतियां हमेशा हिंसा को बढ़ावा देती रही है, नतीजन भारत को भी जवाबी कार्यवाही करके पाकिस्तान को छकाना पड़ा है, भारत मुंबई हमले के बाद और अधिक मजबूत और सुदृढ हुआ है, देश मे लोगों के मन मे एकजुट होने की भावना बलवती हुई है।

उदय बुलेटिन देश के लिए शहीद होने वाले सुरक्षाबलों को सलाम करता है और जो आम नागरिक इस हमले में आतंकियों के हाथों मारे गए थे उनकी आत्मिक शांति की कामना करता है।

हमें अपने सुरक्षबलों पर गर्व है।