उदय बुलेटिन
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Independence Day
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नजरिया

स्वतंत्रता दिवस: और आजादी के अलग मायने

आज़ादी कभी भीख में नहीं मिलती इसे जीतना पड़ता 

Shivjeet Tiwari

Shivjeet Tiwari

Summary

पंद्रह अगस्त सन उन्नीस सौ सैंतालीस, आधी रात को भारत ब्रिटिश दासता से मुक्त हो गया, लोगों ने  एक दूसरे को मिठाईयां बांटी, हर्षोल्लास मनाया,  समय का पहिया अपनी चाल चलता रहा और छब्बीस जनवरी उन्नीस सौ पचास को भारत ने एक लिखित संविधान को अपनाकर खुद को एक गणतंत्र राष्ट्र भी घोषित किया, लगातार देश विरोधी विदेशी ताकतों जैसे सांपो का मुँह कुचलते हुए भारत आज एक वैश्विक विश्व शक्ति बनकर उभर रहा है।

अब भारत का दखल सिर्फ एशिया तक सीमित नही है यूरोप और अमेरिका जैसे महाद्वीपों में भारत की अच्छी खासी तूती बोलती है, फिर चाहे वह इजराइल और रूस जैसे ताकतवर देशों के मुखिया हो या दुनिया का बेताज बादशाह अमेरिका, सबको भारत मे अपना भविष्य दिखता है, हाल में हुई घटनाक्रम में भारत ने जम्मू कश्मीर के विवादित मुद्दे को अपनी तेज इच्छाशक्ति दिखाते हुए बिना किसी लाग लगाव के अपने गणतंत्र में धारा 370 और 35 A हटाकर सम्मिलित कर लिया, और पूरी दुनिया भारत के इस ताकतवर कदम को देखती रह गयी, हालांकि अब तक भारत इसमे दूसरे देशों और यूनाइटेड नेशंस जैसे संगठनों के मुँह की ओऱ देखा करता था।

यह कहना गलत नहीं होगा कि भारत ने अपने आप मे बेइंतहा बदलाव किए हैं, वो चाहे नासा की टेक्नोलॉजी को धता बताकर चांद पर दुनियॉ को पानी की मौजूदगी दिखाना हो, या बेहद कम खर्चे  में मंगल पर पहुंचना हो।

भारत ने एक छोटे समय में लंबा रास्ता तय किया है, हमने सामरिक दृष्टि से अपने आप को मजबूत किया और दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचने पर मजबूर किया, भारत ने  हर उस मोर्चे पर जमकर काम किया जो उसे एक ऊंचे दर्जे का देश बनाता है।

लेकिन ये तो हुई खुद का महिमामंडन करने वाली बात, इसमे शक कोई नहीं कि भारत ने बेहद प्रगति की है लेकिन असली स्वतंत्रता के मायने बेहद अलग है,  जो इन सब उपलब्धियों के सामने बेहद बड़े है, तो असली आजाद भारत कैसा हो सकता है उसकी कुछ झलकियां हम आपके सामने रखने का प्रयास करेंगे:

सही मायनों में भृष्टाचार मुक्त भारत ही असली आजादी होगी:

आपको पता है भारत में भृष्टाचार एक बेहद संक्रामक बीमारी की तरह फैला हुआ है, लगभग हर दफ्तर , हर विभाग इसी भृष्टाचार के दीमक द्वारा लगातार चट किया जा रहा है, वैश्विक स्तर पर भृष्ट देशों की रैंकिंग में ऊंचे पायदान पर जाते हुए दिखे है , ऐसी स्थिति में हम अगर अपनी जीडीपी का बखान करें तो ये हमारे लिए केवल शर्म की बात होगी,  तो सबसे पहले हमें अपने देश को इस दीमक से बचाना होगा, इसका हल कभी किसी सरकार से तो कभी नही निकल सकता , ये मामला अब हम आम जनता के हांथो में है, आप फैसला कीजिये और निश्चय कीजिये कि भविष्य में कभी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से भृष्टाचार को न तो बढ़ावा देंगे और ना ही कभी करेंगे, लो मिल गयी आजादी इस बुराई से।

देश खुद एक धर्म है, इसको समझे:

भारत धार्मिक विविधताओं वाला देश है ,जहां अनेक धर्म सम्प्रदाय के लोग सदियों से रहते आये है शायद आप लोगों को स्मरण भी नही होगा कि विश्व मे पहली मस्जिद भारत मे ही तामील कराई गई थी, यहाँ जिउस, पारसी, जैन, बुद्ध, ईसाई, सिख, मुस्लिम, और हिन्दू समेत अन्य धर्म अत्यधिक समन्वयता के साथ रहते आये है, लेकिन पिछले कुछ दिनों से भारत मे अलग-अलग धर्मो के लोग अपना-अपना राग अलापने में लगे है, कभी गाय के नाम पर अखलाख को मार दिया जाता है तो कभी मुस्लिम लड़की से मोहब्बत करने के जुर्म के नाम पर देश की राजधानी में सरे बाजार एक युवा की गला काट कर हत्या कर दी जाती है।

असल समस्या तो इसके बाद हो जाती है जब राजनेता सिर्फ अपना वोट बैंक बचाये रखने के चक्कर मे इन घटनाओं के बारे में अपना वक्तव्य राजनैतिक चश्मे को पहन कर देखते है, कभी कोई घटना मॉब लिंचिंग हो जाती है तो कभी कोई घटना रेग्युलर अपराध,

नेताओं का क्या है उनका काम केवल अपना सत्ता सुख सुनिश्चित करना है लेकिन इस से आम जनता का भविष्य बिगड़ जाएगा, इसे समझने की जरूरत है, फैसला आपका है और भविष्य भी आपका।

जिस देश की राजधानी में एक बिटिया गैंगरेप करके मार दी जाती है, उस देश का मंगल पर पहुचना लज्जाजनक लगता है:

देश तेजी के साथ बढ़ रहा है, हम नार्मल विद्युत बल्ब से सीएफएल के आगे चल कर एलईडी पर पहुँच गए, हालांकि अब तो लखनऊ की एक बिटिया ने एक नया तत्व खोजा है जो बेहद चमकीला है और जिसके प्रयोग से एक वाट के बल्ब से आज के 8 वाट के बल्ब से बराबर रोशनी प्राप्त की जा सकेगी, हालकि ये सिर्फ एक जानकारी थी, अब असल मुद्दे पर आते है.....

आपको निर्भया तो याद होगी, एक बस जो रात भर दिल्ली की सड़कों पर दौड़ती रही, उसकी आबरू कुछ वहसी गिद्धों द्वारा रात भर नोची जाती रही, इसके बाद तो देशभर में इस तरह की घटनाओं की बाढ़ सी आ गयी, लोगों ने हर घटना के बाद मोमबत्ती जलाई और भविष्य में ऐसी घटना न होने देने के लिए अपने आप को मनाया, लेकिन अगले दिन कोई न कोई खबर किसी निर्भया की ही होती है, कभी उन्नाव, तो कभी हमीरपुर ,तो कभी अलीगढ़, यहाँ तक कि नवजात बच्चियां भी इस प्रकार के पाशविक कृत्यों की शिकार हुई, और लगातार होती जा रही है, यहाँ तक कि जब आप इस विषय को पढ़ रहे होंगे, तो निश्चय ही कोई महिला या बच्ची किसी दुष्ट के द्वारा दुराचारित की जा रही होगी या फिर उनका उत्पीड़न हो रहा होगा।

हमे असल आजादी के मानक इस प्रकार स्थापित करने है कि बड़े से बड़े महानगर और छोटे से छोटे गांव में जब किसी माँ-बाप की लाडली किसी जगह अकेले भी निकले तो उसके माता पिता को उसके भविष्य की कोई आशंका न हो।

इसका सबसे बड़ा उपाय है चरित्र को ऊंचा उठाना, समाज मे ऐसा माहौल बनाना की यह अपराध किसी प्रकार से माफी योग्य नही है , ये नहीं कि अपना हित साधने के लिए आप अपराधियों को सिलाई मशीन बांटने में जुट जाएं

लिब्राण्डुओ से देश की अस्मिता बचाएँ :

माफ कीजियेगा, अगर आपको इस लिब्राण्डु शब्द के कोई गलत शब्द की बू आ रही होगी तो आपको चिंतिंत होने की जरूरत नही है, यह लिबरल+अंडों के समूह से मिलकर बना है, मतलब वही सो काल्ड पढ़े-लिखे लिबरल जिनको लिबरल शब्द ने इतना मोहा है कि वो अपने माता पिता से भी अपने असली पिता होने का सबूत मांग बैठे, और वही लिबरल जो एक शिक्षा के मंदिर में आधी रात को भारत तेरे टुकड़े होंगे का नारा बुलंद करते है, और सुबह बवाल खड़ा होने पर उनके जैसे ही कुछ लिब्राण्डुओ द्वारा बचाव की मुद्रा में लाये जाते है, और यहाँ तक तो ठीक था, अदालत द्वारा शाब्दिक रूप से लतियाये जाने के बावजूद वो जनता के बीच मे नेता के तौर पर प्रोजेक्ट भी किये जाते है।

यहां इन सो काल्ड लिब्रलो के "हमे चाहिए आजादी " के नारे और उसके संदर्भ को अलग से समझना होगा, आखिर आजादी है क्या ? क्या आजादी सिर्फ यह सुनिश्चित करती है कि आप अपने देश को गाली दे सकें, उसके खंड-खण्ड में बांटने की बातें कर सके, जी नहीं अगर यही आजादी है तो आप का भविष्य निश्चित ही किसी दूसरे की गुलामी में बीतेगा, असल आजादी तो अनुशासन में है, नियमो में है , बशर्ते वो समाज मे बाधा न बने।

नजरिया स्पष्ट रखें, क्या पता आपको कोई लिबरल आजादी दिलाने आता ही हो।

और आखिरी में खुद अपनी जमात की आजादी:

पत्रकारिता लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ माना जाता है, सनद रहे माना जाता है, हालांकि अब वो है नहीं, यह पत्रकारिता की जमात अब गुटो में बटी हुई नजर आती है , कभी कोई जमात सत्ता पक्ष के विरोध में पूर्णतया मुखर हो जाती है तो कभी कोई जमात सत्ता पक्ष के केवल वह पक्ष देखती और दिखाती है जो उन्हें दिखाने होते हैं।

यहां तक तो सब ठीक था, लेकिन अब इन्हीं जमातों में से कुछेक लोग ऐसे भी है जो हमारे चिर प्रचलित विरोधी देश की जुबान बोलने का माद्दा रखते है, अभही हाल में ही पाकिस्तान के उच्चायुक्त अब्दुल बासित  के द्वारा ऐसे ही घटनाक्रम का उल्लेख किया गया है, ऐसे लोगों की आजादी उसी क्षण समाप्त हो जानी चाहिए, लेकिन फिर भी पत्रकारिता की आड़ लेकर ये खुलेआम बचकर निकलते नजर आते है,

अगर देश के विरोधियों के मुद्दे अपने मुंह से निकलना आजादी है तो आप निश्चय ही गर्त में जा रहे है

पर्यावरण, जनसुरक्षा, न्याय, अधिकार और कर्तव्य:

हम आज तकनीकी के युग मे जी रहे हैं, लेकिन हमने अपनी सो काल्ड आजादी के चक्कर मे अपनी पीढ़ियों की जीवन जीने की आजादी को खतरे में डाल दिया है, बिना वृक्षो के भविष्य का जीवन कैसा होगा?पर्यावरण का क्या होगा, इस पर विचार करना होगा।

जन सुरक्षा के अंतर्गत समाज मे प्रत्येक वर्ग समुदाय के लोगों को समान अधिकार, जीवन जीने की आजादी की मांग प्रबल है जिसकी जरूरत भी है लेकिन असल मे ये है कहाँ? गौर से देखिए फिर बताइये, अगर रिक्शे वाला आपके घर के अंदर जूते पहन कर आ जाये या उसके कपड़े ज्यादा कीमती न हो, तो आपकी नाक अपनी आजादी के लिए विद्रोह कर देगी ! मुझे इस इस आजादी से नफरत हो जाएगी, आपको नजरिया बदलना होगा।

न्याय, जनाब इस आजादी की बात करना ही बेमानी साबित होगा, जमीन के एक टुकड़े के लिए 3 पीढियां लगातार अदालतों के चक्कर काटते-काटते मर जाती है, कहते है कि देरी से मिला हुआ न्याय भी अन्याय ही होता है, मुझे इस बंधन से आजादी चाहिए होगी

अधिकार और कर्तव्य, न जी ना इस बात की तो चर्चा ही मत करिए इस देश मे आजादी की बात करने वालों और मनाने वालो को अधिकार तो चाहिए लेकिन कर्तव्यों का कोई लेखा जोखा नही, आप खुद देख सकते है बताने की जरूरत नही

मुद्दे अभी बहुत बांकी है लेकिन कुछ आप को भी चुनने होंगे, आखिर आप भी इस देश भारत के निवासी है, अगर आपको लगता है कि कोई ऐसा मुद्दा है जिसको हम अपने इस पटल पर उठाए तो लिख भेजिए हमे, (info@udaybulletin.com) पर हम उन्हें अपने पाठक वचन के तौर पर जनता और सरकार के सामने रखेंगे

आखिरी में आप सभी को स्वतंत्रता दिवस की अनेकानेक शुभकामनाएं, आप भारत को ऐसे ही उन्नत विचारो से आगे बढ़ाते रहे, और उदय बुलेटिन की पूरी टीम आपको हार्दिक बधाइयां समर्पित करती है