उदय बुलेटिन
www.udaybulletin.com
Opposition and Pakistan on Article 370
Opposition and Pakistan on Article 370|Uday Bulletin
नजरिया

कश्मीर का नया घटनाक्रम, विपक्ष वैचारिक असंतुलन में, पाक के कुकर की सीटियां निकल रही है

“सौ सुनार की और एक लोहार की”     

Shivjeet Tiwari

Shivjeet Tiwari

Summary

हम अपने जीवन काल के उस समय में हैं जब हमारे मस्तिष्क में समझ का बीज उग कर बढ़ा तब से ही हमें यही पाठ पढ़ाया गया कि “कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है” ये शब्द बोलने में जितना सरल था उतना आत्मिक नहीं है, ना ही यह हमें सुकून देने वाला था, ये तो ठीक वैसे ही था जैसे हम अपने पिता को किसी के साथ परिचय कराते समय “सगे पिता जी” नाम से संबोधित करते फिरे, हालांकि अब यह स्थिति बदल चुकी है, अब जम्मू कश्मीर भारत का वह अंग बन चुका है जिसे समझाने के लिए अभिन्न अंग जैसे बेहद उलझे हुए शब्द का प्रयोग नहीं करना पड़ेगा।

अमित शाह और नरेंद्र दामोदर मोदी की पुरानी जोड़ी ने अपने पहले की रफ्तार से फैसला देकर न सिर्फ पूरे देश को चौंकाया बल्कि हमारा पड़ोसी देश पाकिस्तान भी इसी उधेड़बुन में फ़सा रहा कि आखिर भारत इतनी सारी सेना और अर्धसैनिक बलों को जम्मू कश्मीर में डिप्लॉय करके हासिल क्या करना चाहते है, लेकिन जब तक इस अंधेरे के बादल छटते मामला बिल्कुल अलग दिशा को जा चुका था।

पाकिस्तान की छटपटाहट

धारा 370 और 35 A के हटने का सबसे बड़ा सदमा अगर किसी को पहुंचा है तो वह है पाकिस्तान। करीब एक हफ्ते के अंदेशे वाले टाइम के बाद जो फैसला आया वो पाकिस्तान की नजर में उसके लिए कहीं से भी मुफीद नहीं था, उसे ठीक उसी तरह कश्मीर के मामलों से अलग कर दिया गया जैसे किसी सड़ती हुई उंगली को शरीर से काट कर अलग कर दिया जाय।

मौके की नजाकत के मुताबिक पाकिस्तान ने अपनी पुरानी आदत (लोगों के पास जाकर दीन की दुहाई देना, मदद मांगने) का काम शुरू कर दिया लेकिन यहाँ भी पाकिस्तान को कोई खास सफलता नहीं मिली , इस मामले पर पाकिस्तान का मुख्य साथी चीन भी यथास्थिति को देख कर मिन्टोस खाकर बैठ गया।

अमेरिका ने इसे भारत का अंदरूनी मामला कहकर खुद को इस झमेले से दूर रखना ठीक समझा, हालांकि यू एन ओ ने दोनों देशों को संयम बरतने की सलाह दी है, जो समय-समय पर किन्ही भी दो देशों के बनते बिगड़ते संबंधों पर यूएनओ के द्वारा तात्कालिक रेमेडी दे दी जाती है। जिसपर कोई खास तवज्जो नहीं देता।

मामले को लेकर पाकिस्तान ने एक सत्र का भी आयोजन किया। जिसमें पाकिस्तान के तीनों सेनाओं के सेनाध्यक्ष और पक्ष विपक्ष के सभी नेता तो आये , लेकिन वजीरे आजम इमरान और वर्तमान विदेश मंत्री नदारद रहे, जिस पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को अपने ही संसद में फजीहत झेलनी पड़ी।

बाद में इस मुद्दे पर अपनी पकड़ बनाये रखने के चक्कर मे इमरान खान ने एक बैठक कराई जिसमें भारत के पुलवामा जैसे घटना का जिक्र भी किया और बताया कि भारत में इस तरह की घटनाएं दोहराई जा सकती है। हालांकि इमरान खान ने यह भी आगे कहा कि 'भारत इस हमले से बौखलाकर पाकिस्तान पर हमला बोल सकता है, और हमें मजबूरी में भारत के साथ युद्ध लड़ना होगा।'

इमरान खान यही नहीं रुके और कहा कि 'इस जंग में कोई नहीं जीतेगा, बल्कि इस जंग का असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा, अब इमरान खान की इस गीदड़भभकी को दुनिया कितनी संजीदगी से लेती है दुनिया जानती है। बाकी भारत अब आतंकी हमलों को झेलने के लिए तैयार है भारतीय सेना किसी भी आतंकी के बंदूक उठाने के पहले की उम्रख़त्म कर देती है, जिसका उदाहरण पिछले कुछ दिनों से देखा जा रहा है।’

कांग्रेस कशमकश की दुनियां में

संसद में गृहमंत्री के उद्घोषणा के बाद कांग्रेस उतने धड़ों में बटी नजर आ रही जैसे कोई तरबूज को अपनी ऊंचाई से फेंका गया हो। कई कांग्रेसी नेता पार्टी लाइन से हटकर कश्मीर के इस नए रूप को खुशी के साथ स्वीकारते नजर आ रहे हैं। जिनमें जनार्दन द्विवेदी, दीपेंद्र हुड्डा, मिलिंद देवड़ा, भुवनेश्वर कलिता और अब कांग्रेस के युवा नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया भी शामिल है।

जहां एक ओर कांग्रेस सेफ गेम खेलने के चक्कर में थी वह अब इस मामले को लेकर खुलकर सामने आगयी है और इस फैसले को लेकर कांग्रेस के नेताओं की बयानबाजी सामने आ चुकी है।

जहां कांग्रेस के बड़े नेता अधीर रंजन ने कांग्रेस की सत्ता में जनविरोध की आखिरी कील ठोकने का काम किया और सेफ गोल कर गए , जिन्होंने जम्मू कश्मीर को संयुक्त राष्ट्र द्वारा निगरानी में रहने वाला गैर निजी मामला बताया, इस मामले पर अमित शाह ने अधीर रंजन सहित कांग्रेस पार्टी को निशाने पर लिया , और सोनिया गांधी भी अधीर रंजन पर नाराज़गी जताते हुए नजर आयी वहीं दूसरे कांग्रेसी नेता अपनी ही पार्टी को पलीता लगाने के कार्यरत रहे।

बसपा ने खेला तगड़ा खेल

जहाँ एक ओर समाजवादी पार्टी और तृणमूल कांग्रेस जैसी क्षेत्रीय पार्टियां अपना रुख इस बदलाव पर उल्टा बनाये हुए थे, बसपा ने मौके पर चौका लगाते हुए, इस मुद्दे पर केंद्र सरकार का समर्थन करके सारे देश को चौंका दिया।

अमित शाह ने खुलकर कहा कि घाटी के लोग अपने हैं

विपक्षी दलों की शिकायत पर अमित शाह कश्मीर पर ऐसे खुलकर बोलते नजर आए जैसा आजतक कभी किसी गैर कश्मीर के नेता को संसद में बोलते नहीं देखा, अपोजिशन के नेताओं को इस तरह के जवाब दिए गए कि किसी भी तरह से यही नहीं लगा कि अमित शाह पहली बार केंद्रीय मंत्री बने हैं।

उन्होंने कश्मीर की चिंता करने वाले नेताओं को समझाया कि अगर घाटी के लोगों को कोई समस्या में है तो हमें बताये , वो लोग हमारे अपने है, हम न सिर्फ उन्हें अपने सीने से लगाएंगे बल्कि अगर आर्थिक मदद की जरूरत हुई तो 100 मांगने पर 110 मुहैया कराए जाएंगे।