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नजरिया

अखंड भारत की पूरी होती संकल्पना, अमित शाह का अमोघ अस्त्र

जम्मू कश्मीर को दो टुकड़ों में बांट कर भारत गणराज्य में धारा 370 और 35 A को समाप्त किया गया

Shivjeet Tiwari

Shivjeet Tiwari

Summary

कहते है पूत के पांव पालने में दिखाई देने लगते है, भाजपा ने अपने चुनावी घोषणापत्र “ संकल्प पत्र” में जम्मू कश्मीर को भारत को बिना किसी धारा अवरोध के भारत मे शामिल करने का वचन दिया था और आज दिनांक  5 अगस्त को सुबह-सुबह राज्य सभा मे एक तूफान उठा और एक राष्ट्र दो निशान की परंपरा को जमींदोज करके भारत का अभिन्न अंग बनाया गया, हालांकि कश्मीर शुरू से ही भारत का अभिन्न अंग था लेकिन जम्मू कश्मीर को दिए गए विशेष प्रावधानों और शर्तों के आधार पर विशेष राज्य का दर्जा दिया गया था

20 अक्टूबर 1947 को जब कश्मीर पर पाकिस्तानी आजाद कश्मीर सेना और कबाइली लड़ाकों ने हमला किया तब तत्कालीन जम्मू कश्मीर के राजा हरिसिंह ने भारत के साथ जुड़ने की कवायद की और दिनांक  26 अक्टूबर 1947  को भारत के साथ सशर्त अस्थायी विलय किया गया जिसे "Instruments  of accession of jammu and kashmir to india  कहा गया , इस समझौते के अंतर्गत भारत गणराज्य के अंतर्गत तीन प्रमुख मामले रखे गए, जिनमे  रक्षा, संचार और विदेशी मामले थे !

इन मामलों में भारत कश्मीर के मसलों पर न सिर्फ नजर रखेगा बल्कि हस्तक्षेप भी रहेगा लेकिन अन्य मामलों जैसे न्याय, नियमावली जैसे संवेदनशील मुद्दों पर जम्मू कश्मीर की सरकार पर निर्भर रहना पड़ता था,
यहाँ तक कि अगर कोई कानून भारतीय संसद द्वारा बनाया जाता था और उसे राष्ट्रपति की संस्तुति के बाद पूरे भारत मे लागू किया जाता था , लेकिन फिर भी जम्मू कश्मीर में इसे लागू कराने के लिए जम्मू कश्मीर की सरकार से अनुमति लेनी पड़ती थी,
भारतीय दंड संहिता, विवाह संबंधित तमाम कानून जम्मू कश्मीर के ही थे, इस बाबत जम्मू कश्मीर के तत्कालीन नेतृत्व ने तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू से तमाम सशर्त अनुबंधों पर दस्तखत कराए थे, जिनका खामियाजा भारत आज तक अलग अलग तरीके से भुगत रहा था

विवाह का अटपटा कानून:

धारा 370 औऱ 35A के रहते कोई भी कश्मीरी लड़की अगर किसी भारतीय के साथ विवाह करती थी तो उसे कश्मीर की नागरिकता का त्याग करना पड़ता था,
बल्कि अगर वही लड़की पाकिस्तान के किसी लड़के के साथ शादी करती थी तो उस लड़के और लड़की को दो देशों की नागरिकता मिल जाती थी
धारा 370 और पैतीस ए हटने के बाद जम्मू कश्मीर में सारे नियम कायदे भारत गणराज्य के माने जाएंगे

एक देश दो झंडे:

जम्मू कश्मीर के पास न सिर्फ अपनी खुद की संविधान सभा थी जिसने कश्मीर के लिए भारत से अलग संविधान बनाया था , बल्कि कश्मीर का खुद का राष्ट्रध्वज भी था, हर मौके पर भारतीय तिरंगे को कश्मीर के झंडे के साथ फहराया जाता था,
  यहाँ की विधान सभा पांच साल के लिए न होकर 6 साल के लिए होती थी हालांकि अब 370 के हटने के बाद केवल तिरंगा झंडा ही ध्वज माना जायेगा
धारा 370 और 35A के रहते जम्मू कश्मीर में भारतीय चिन्हों, प्रतीकों और राष्ट्र गान समेत झंडे के अपमान करने पर कोई भी जुर्म नही बनता था , हालांकि अब इस तरह का कोई भी अपराध कड़े जुर्म की श्रेणी में आएगा

संपत्ति का अधिकार अब छीण हुआ:

कश्मीर को भारत से अलग रखने में आर्टिकल 35 ए की अहम भूमिका थी, जिसकी वजह से कोई भी भारतीय नागरिक  जम्मू कश्मीर में किसी भी जमीन को न खरीद सकता था न ही उसका कमर्शियल उपयोग कर सकता था, इस प्रकार से भारतीय प्रकृति संसाधनों पर केवल कश्मीर का ही अधिकार था, जबकि भारत सरकार के सभी आर्थिक लाभ कश्मीर द्वारा उपभोग किये जाते थे

न्यायालय के आदेश कश्मीर में लागू नही होते थे :

जम्मू कश्मीर में भारतीय न्यायपालिका के कोई  भी आदेश जम्मू कश्मीर पर लागू नही होते थे, लेकिन  अब यह समस्या भविष्य के लिए समाप्त हो चुकी है

विशेष: भारतीय विद्यार्थियों के लिए जम्मू कश्मीर के इतिहास को लेकर काफी बदलाव हो चुके है,कुल मिलाकर सामान्य ज्ञान में भी बदलाव हो चुका है और कंपटीशन का सिलेबस बढ़ा दिया गया है   पूरा देश जहां एक ओर केंद्र सरकार के इस कदम को लेकर उत्साहित है, वही सरकारी एजेंसीयां किसी भी स्थिति को लेकर बेहद सजग है, हालांकि भाजपा सरकार ने नोटबन्दी की फजीहत से सबक लेते हुए वो सब तैयारियां की होंगी जो संभावित है या संज्ञान में है