उदय बुलेटिन
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Zomato Controversy 
Zomato Controversy |Social Media
नजरिया

जोमैटो का दोहरा रवैया, उपभोक्ताओं के निशाने पर

“आदमी के जीवन की तीन मूलभूत सुविधाएं रोटी, कपड़ा और मकान, में से रोटी की समस्या तो जोमैटो और स्वीगी जैसे उपक्रमों ने हल कर दी है”

Shivjeet Tiwari

Shivjeet Tiwari

जी हाँ अगर ग्रह मंत्री आपके घर से रूठ कर कहीं चले भी जाये तो कोई चिंता की बात नही है, अगर आपकी जेब करारे नोटों से या फिर प्लास्टिक मनी और डिजिटल मनी से भरी हुई है तो घबराने की कोई जरूरत नहीं है बस स्टोरेज में कुछ एमबी की जगह लेने वाले इन एप में से किसी को इंस्टाल कीजिये , भोजन हाजिर है।

लेकिन कहते है ना कि जब पेट खाली होता है तब पेट भरने के अलावा दूसरा कोई विकल्प नहीं सूझता ,लेकिन जैसे ही पेट भर जाए तो खुराफात उफान मारकर बाहर निकल कर आती है।

ऐसा ही कुछ जोमैटो के एक ग्राहक ने किया

मामला यह था कि सावन माह में जबलपुर के अमित शुक्ला नाम के उपभोक्ता ने जोमैटो से कोई खाने का आइटम का ऑर्डर किया लेकिन जब डिलीवरी देने कोई गैर हिन्दू आया तो शुक्ला जी का दिमाग सनक गया, और जोमैटो से खाने की वापसी के लिए कहा , कारण की जगह शुक्ला जी ने बताया कि उसने खाना सिर्फ इस लिए वापस भेजवाया क्योंकि खाना देने वाला मुस्लिम था। खैर इतने पर भी शुक्ला जी का मन नहीं भरा तो ट्विटर पर जोमैटो को एक ट्वीट कर दिया।

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बस फिर क्या था, जोमैटो ने हाजिर जवाबी दिखाते हुए धर्मनिरपेक्षता का हवाला देकर एक ट्वीट किया जिसका सार तत्व कुछ ऐसा था...

"खाने खुद अपने आप मे एक धर्म है"

खैर मामला जनता की अदालत में पहुंचा और सोशल मीडिया पर जोमैटो ने अच्छी खासी वाहवाही लूटी। लेकिन कुछ समय बाद जोमैटो अपने ही बुने वाहवाही के जाल में फस गया। कुछ ऐसा हुआ जिसकी उम्मीद जोमैटो को कभी भी नहीं होगी। हमारे देश के खोजी उपभोक्ताओं ने सैकड़ों फिट गहरे गड़े हुए जोमैटो के पुराने ट्वीट को निकाल लिया और जोमैटो के मुंह पर फेंक मारा।

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मामला यह था कि 16 मई को वाजिद नाम के उपभोक्ता ने जोमैटो को यह ट्वीट किया कि आप मुझे नॉन हलाल (एक प्रकार का गैर हलाल भोजन जिसे धर्म विशेष में धार्मिक मान्यताओं के आधार पर गैर धार्मिक माना जाता है) भेजा हुआ है ,इस प्रकार से आप मुझे गलत तरीके से चार्ज कर रहे है और जब मैं यह ऑर्डर कैंसल करना चाह रहा हूँ तो आप इसे कैंसल नहीं कर रहे है।

तब जोमैटो ने वाजिद को लिखा "कि हम आपके द्वारा जो संतोषजनक फीडबैक प्राप्त करना चाह रहे है वह आप के द्वारा नहीं प्राप्त हुआ, कृपया आप अपना आर्डर नंबर भेजे ताकि आपकी समस्या का निदान हो सके"

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मामला यही बिगड़ गया

दरअसल अमित शुक्ला के अनुसार वह श्रावण मास में किसी गैर हिन्दू से खाना नहीं लेना चाह रहा था , लेकिन जोमैटो ने शुक्ला जी को खाने को खुद एक धर्म बता दिया, लोगों की शिकायत यह है कि जोमैटो को खाने को धर्म की तरह पेश करने की याद 16 मई को नहीं आई, या सिर्फ नाम और धर्म देखकर खाने का धर्म या फिर खाने को ही धर्म बनाया जा सकता।

दरअसल जो पंडित अमित शुक्ला ने किया आज के परिदृश्य में कहीं से भी जायज नहीं है, लेकिन जैसे ही वाजिद का ट्वीट वायरल हुआ पंडित अमित शुक्ला के समर्थन की बाढ़ सी आ गयी। लोगों के अनुसार जब वाजिद के खाने में हलाल और गैर हलाल जैसे मुद्दों को लेकर जोमैटो मुखर हुई तो क्या अमित शुक्ला की मांग गलत थी। अगर शुक्ला की मांग गलत थी तो वाजिद की मांग क्या थी?

अगर दूसरे मायनों में इस विवाद को देखा जाए तो कही न कही अब जोमैटो का पड़ला हल्का होता दिख रहा है। अब उसे दोहरी मार झेलनी पड़ रही है , एक ओर जहां वह सोशल मीडिया पर फजीहत झेल रहा है वहीं उपभोक्ता अब जोमैटो को अनइंस्टॉल करके भविष्य के बिजनेस की संभावना को दर्शा रहे है, हालांकि अब मामला जनता की अदालत में है , स्नैपडील, स्नैपचैट, और कई मामलों में ऐमज़ॉन जैसे साइटों और एप ने जो समस्याओं को झेला है अब उसी चक्कर में जोमैटो पड़ती दिख रहा है।