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After rain in  Lucknow
After rain in  Lucknow|Uday Bulletin
नजरिया

बारिश ने खोली विकास की पोल, जनता परेशान

बारिश होते ही शहर में हर जगह लोग परेशान हो रहे।

Varun Singh

Varun Singh

उत्तर प्रदेश में विकास को लेकर बहुत से कार्य किये जा रहे। कहीं मेट्रो सिटी तैयार की जा रही तो कही विकास को दिखाने के लिए अन्य प्रयास हो रहे। लेकिन समय सभी की पोल खोल ही देता है। ऐसे में बरसात का मौसम हो और उत्तर प्रदेश के विकास की बात न हो, ऐसा असंभव है।

पूरे प्रदेश की बात न कर अगर सिर्फ प्रदेश की राजधानी व महानगर का दर्ज़ा प्राप्त लखनऊ की ही बात की जाए तो आपको शहर में ही चारो तरफ जलभराव की स्थिति देखने को मिल जाएगी। कहीं सड़क पर लगा बरसात का पानी तो कहीं रोड के किनारे बने नाले आपको शहर की हकीकत बयान कर ही देंगे।

जिम्मेदार कौन ?

बता दें की नगर निगम की तरफ से पूरे शहर में सीवर लाइन का जाल भी बिछा दिया गया है लेकिन ये भी कहीं न कहीं शहर के विकास पर प्रश्नचिन्ह लगाते दिखाई देती है। जिस सीवर लाइन का निर्माण जनता की समस्या को दूर करने के लिए किया गया था वही सीवर लाइन अब उसके समस्या की प्रमुख वजह बनती दिखाई दे रही है। कहीं इनके ढक्कन टूटे हुए हैं तो कहीं खुले पड़े हैं। अब इस स्थिति में अगर किसी जनता को इसका दुष्परिणाम झेलना पड़ जाये तो इसका दोष किसे दिया जायेगा।

गली तो गली, यहाँ तक की मुख्य सड़कों पर भी कई दिनों तक जलभराव देखने को मिल ही जाता है। राजधानी के बहुत से ऐसे इलाके हैं जहाँ बारिश के चलते लोग सड़क के एक किनारे से दूसरे किनारे भी नहीं जा सकते हैं और इसकी प्रमुख वजह है सड़कों का जलमग्न होना।

बात लखनऊ के फैज़ाबाद रोड स्थित चिनहट मार्केट की करें तो यहां इंद्र देव के थोड़ा सा मेहरबान होते ही चारो तरफ पानी ही पानी दिखाई देने लगता है और इसकी वजह सड़कों से पानी का न निकल पाना है।

इसी प्रकार गोमती नगर में शहीद पथ के साथ लगे लिंक रोड की बात करें तो यहाँ जलभराव व सीवर लाइन के ढक्कनों का टूटा होना एक बड़े हादसे को चुनौती दे रही है।

कुछ ऐसा ही हाल है फैज़ाबाद रोड के मटियारी चौराहे की, जहाँ मुख्य चौराहे के निकट ही सीवर लाइन का ढक्कन टूटा मिल जायेगा।

सिविल हॉस्पिटल के सामने भी

बरसात के आते ही लखनऊ की सड़के बहुत कुछ बोलने लगती हैं, हालाँकि इसकी आवाज शायद नगर निगम तक नहीं पहुँच पाती हैं, यह इसलिए कहा जा सकता है क्योंकि शहर के सिविल हॉस्पिटल एक ऐसा जगह है जहाँ से एक तरफ मुख्यमंत्री, तो वहीँ राजभवन की भी दूरी कुछ ख़ास दूर नहीं है। इसके पास ही लखनऊ का प्राणि उद्यान भी स्थित है जहाँ रोजाना बहुत से लोग घूमने के लिए आते हैं। फिर भी नगर निगम के पास बरसात के समय घुटने तक पानी भरने से निजात दिलाने का कोई उपाय नहीं है। फलस्वरूप लोग उसी जलभराव के बीच से निकलने को मजबूर हैं।

सचिवालय भी आया चपेट में

बीते दिनों नगर निगम के सभी दावे तब और झूठे साबित हो गए जब विधानसभा सत्र के दौरान हुई बारिश ने सचिवालय को भी नहीं छोड़ा। सदन में मुख्यमंत्री समेत पक्ष व विपक्ष के अनेक नेता शामिल थे। लेकिन सुबह से हो रही बारिश के कारण हुए जलभराव के चलते सभी को इस जलभराव के बीच से ही निकलना पड़ा।

ऐसे ही शहर के आलमबाग , चारबाग़, गोमतीनगर, इंदिरानगर , मुंशीपुलिया व टेढ़ीपुलिया जैसे इलाकों में भी यही स्थिति देखने को मिली।