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नजरिया

अलग अलग घटनाओं पर दोमुंहे सांपो का दोहरा रवैया

पार्किंग विवाद के कारण 100 साल पुराने मंदिर में तोड़-फोड़ 

Shivjeet Tiwari

Shivjeet Tiwari

आज एक विशेष मुद्दे पर चर्चा करते हैं। हालांकि यह स्पष्ट करना जरूरी होगा कि इस मुद्दे पर खुलकर बात करनी होगी, नहीं तो हम उस जहर को अपने शरीर में रखकर कुंठा को जन्म दे सकते है ,जो किसी भी स्थिति में एक स्वस्थ समाज को मजबूत नहीं बना सकती।

चलिए कुछ घटनाओं पर नजर डालते है

कुछ साल पहले दिल्ली के एक चर्च पर हमला हुआ था। जिसमें चर्च के कांच फोड़ने की घटना सामने आई थी। पूरे देश की मीडिया और बुद्धिजीवी वर्ग इस मामले को लेकर मुखर हुआ था। आरोपी पकड़े गये और उनपर कानून के तहत कार्यवाही हुई।

हाल में झारखंड में हुई मोब लिंचिंग की घटना ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया। एक चोर को भीड़ द्वारा पीटा गया और उस से कुछ उन्मादी युवकों ने जय श्री राम के नारे लगवाये। अस्पताल में उस व्यक्ति की मौत हुई।

आमिर खान जैसा सुपरस्टार देश मे खुद को असुरक्षित महसूस करता है। नसीरूद्दीन शाह जैसा व्यक्ति अपने बेटे के बारे में यह कहते हैं कि उसे अपनी पीढ़ी की चिंता है।

किसी भी निजी लड़ाई को कब साम्प्रदायिक बनाकर पेश करना है ,या फिर तख्तियां उठाकर हो हल्ला मचाना है कोई इनसे सीखे। ये अचानक बिलों से निकल कर डसना शुरू कर देते है।

लेकिन पुरानी दिल्ली की घटना के बाद सारे बुद्धिजीवी और महान पत्रकार लापता हो गए है ,अगर किसी को नजर आए तो बताना न भूले।

घटना क्रम

पुरानी दिल्ली के चावड़ी बाजार नामक जगह के पास पार्किंग करने को लेकर दो लोगों में बहस हुई। बहस के बाद यह बात हांथापायी तक पहुंच गयी, जैसे तैसे दोनों पक्ष के लोग अपने अपने घर को लौट गए। अचानक एक पक्ष का व्यक्ति जो धर्म से मुस्लिम है (माफ कीजिये मजबूर होकर धर्म का उल्लेख करना पड़ा, जो कि मैंने आवश्यक समझा) करीब तीन सैकड़ा के आस पास की कट्टर उन्मादी भीड़ लेकर बदला लेने निकलता है। वहां उसे बदले का साफ्ट टारगेट 100 साल पुराना हिन्दू मंदिर नजर आता है। पुजारी और आसपास के लोगों को मारा पीटा जाता है। धर्म के नाम पर अल्लाहु अकबर, नारा ए तकबीर को ऊंची आवाज में नारे लगाये जाते है, मंदिर की मूर्तियां तोड़ दी जाती है।

पुजारी और पड़ोस में रहने वाले गुप्ता जी की पत्नी और जवान बेटी को बाल पकड़ कर घसीटा जाता है। मंदिर के अंदर गंदी गालियां दी जाती है। धार्मिक ग्रन्थों को नष्ट कर दिया जाता है।

और ये सब होता है उस जगह से मात्र 1 किलोमीटर दूर जहां द्वश के बड़े अखबार हाउस बने है। स्वरा भाष्कर को इसमें कुछ भी अलग नजर नहीं आता। नसीरुद्दीन शाह भयानक नींद में है आमिर खान को अपने काम से फुर्सत नहीं मिली, और देश के सो काल्ड सेक्युलर महापुरुष मिट्टी में गड कर तमाशा देखने मे व्यस्त है।

इन धार्मिक मामलों में असल समस्या आपके नजरिये की है। अगर आप किसी धर्म विशेष के ऊपर हुए अत्याचार ओर देश की डेमोक्रेसी को खत्म हुआ मान लेते है औऱ यह घोषणा कर देते है कि देश मे कुछ नहीं बचा । लेकिन यही स्थिति दूरे पक्ष के साथ होती है तो आप इसे रूटीन क्राइम मानकर आंख मूंद लेते है तो आपको अपना इलाज किसी अच्छे डॉ से कराना चाहिए क्योंकि ये बीमारी आपको दिवालिया पन की तरफ ले जा रही है ।

यह भी सच है कि मुझे हिन्दू होने पर शर्म आती है जैसे स्लोगन से भरी तख्तियां ही बनाई जाती है, क्योंकि अन्य लोगों पर किये गए धार्मिक उन्मादों से आपको कोई फर्क नहीं पड़ता , इस से पूरी तरह साबित होता है कि ये जो सारे काम आप समाज मे करते है उसके लिए या तो आपको पैसा मिला होता है या फ़िर आप निजी स्वार्थ के चलते यह सब करने पर मजबूर होते हो ।

मेरा यह मानना कभी नहीं रहा कि मंदिर के पक्ष में तख्तियां निकली जाए , या फिर ऐसे नाटक किये जायें । लेकिन सच को समझकर आप इन घटनाओं का विरोध तो कर सकते है । यकीन मानिए की अगर आप इस घटना का आवश्यक और कठोर विरोध नहीं करते तो भविष्य में संभावित घटनाओं पर आपको विरोध करने का कोई अधिकार नहीं है ।

मैं ये नहीं कहूँगा की सारे लोगों ने विरोध नहीं किया , विरोध करने वाले कर चुके है लेकिन बाकियों का क्या ?

पूर्व आम आदमी पार्टी के नेता कपिल मिश्रा ने तो ये तक कह दिया कि वो अरविंद केजरीवाल जो झारखंड की घटना पर मुवावजा देने को तैयार है उनका एक मंत्री इमरान हुसैन भीड़ में शामिल था।

मंत्री इमरान हुसैन भीड़ में शामिल था

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