उदय बुलेटिन
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रमजान 
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नजरिया

खजूर व रमजान के बीच है बेहद ही गहरा संबंध, अब तक नहीं जानते होंगे आप

रमजान में खजूर का क्या है महत्व, इसके पीछे छिपी है ये मान्यता 

Puja Kumari

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मुस्लिम धर्म में सबसे पाक महिना रमजान का माना जाता है, जिसकी शुरूआत आज से हो गई है। हर सच्चे मुसलमान के जीवन में रमजान के महीने का बेहद ही ज्यादा महत्व होता है क्योंकि कहा गया है कि इस माह में जन्नत के दरवाजे खोल दिए जाते हैं और इस माह में की गयी इबादतों का सवाब भी उनको दूसरे माह के मुकाबले कई गुना ज्यादा मिलता है। लोग रमजान के शुरूआत के काफी समय पहले से ही इसकी तैयारियों में जुट जाते हैं, बस इंतजार होता है तो चांद का, जिसका दीदार करके ही पहले रोजे की शुरूआत की जाती है।

रमजान में रोजा का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि गर्मी की तपिश में प्यास व भूख की तड़प होने बाद भी हर रोजेदार खुदा का शुक्रिया अदा करता है इसके अलावा उसके सामने दुनिया की तमाम चीजें खाने को रखी होती हैं पर वो उसे खुदा के इजाजत के बिना हाथ तक नहीं लगाता। यह परीक्षा ही रोजेदार को खुदा के करीब ले जाती है।

मान्यता है कि रोजा के दौरान सभी रोजेदार पूरे दिन के 5 वक्त की नमाज अदा करते हैं। रोजा रखने की शुरुआत सुबह सेहरी से की जाती है जो कि सूरज निकलने से पहले ही खाया जाता है वहीं शाम का समय इफ्तार का होता है जिसका अर्थ होता है व्रत खोलना। हर रोजदार शाम के समय आमतौर पर खजूर और पानी से अपना रोजा खोलते हैं जिसके बाद ही अन्य बाकी चीजों का सेवन करते है। इसलिए आज हम आपको ये बताएंगे कि आखिर रोजा में इफ्तार के दौरान सबसे पहले खजूर का ही सेवन क्यों किया जाता है?

रमजान 
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इसके पीछे वैज्ञानिक व इस्लामिक दोनों ही कारण छिपे हुए हैं

डॉक्टरों का मानना है कि रोजा खोलते समय कई लोग काफी ज्यादा खाना खा लेते हैं जिसकी वजह से उनको कई तरह की शारीरिक समस्याओं का सामना करना पड़ा है ऐसे में जो व्यक्ति खजूर पहले खा लेता है तो इसकी वजह से उसे भूख कम लगती है और एनर्जी भी काफी मिलती है और पूरा दिन कुछ न खाने के बाद भी कमजोरी नहीं महसूस होती। खजूर में फाइबर की मात्रा ज्यादा पाई जाती है जो कि पाचन क्रिया के लिए काफी लाभदायक सिद्ध होता है। खजूर का सेवन करने से कोलेस्ट्रॉल का स्तर भी कम होता है, जिससे दिल की बीमारीयां होने का खतरा नहीं रहता है

रमजान में खजूर का महत्व 
रमजान में खजूर का महत्व 
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इसके अलावा खजूर खाने के पीछे इस्लामी मान्यता भी छिपी हुई है, कहा जाता है कि पैगम्बर मोहम्मद रमजान के दिनों में खजूर से ही रोजा खोलते थे क्योंकि वहां खजूर काफी मात्रा में मिल जाते थें, और इसकी पौष्टिकता को ध्यान में रखकर इफ्तार में इसे खाया जाता है। लोगों का तो ये भी कहना है कि इस्लाम अरब से शुरू हुआ था और वहां पर खजूर बेहद सस्ता व आसानी से मिल जाता था जिसकी वजह से इफ्तार में खजूर खाने का चलन भी शुरू हो गया।

इफ्तार के खाने में विशेष स्वादिष्ट व्यंजन शामिल होता हे जिसमें शरबत, कबाब, बिरयानी, व अन्य कई तरह की मिठाईयां मौजूद होते हैं लेकिन बिना खजूर की मौजूदगी के ये सब फीका है क्योंकि धर्मिक व वैज्ञानिक दोनों ही दृष्टिकोण से यह बहुत ही ज्यादा लाभकारी माना जाता है।