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सबरीमाला मंदिर में नहीं हो सकी महिलाओं की एंट्री

स्त्री-पुरुष समानता और मानवाधिकार के आधार पर आए सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के 20 दिन बाद भी 10 से 50 साल उम्र की कोई बच्ची या महिला अयप्पा के दर्शन नहीं कर पाई है।

AKANKSHA MISHRA

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केरल: केरल के सबरीमाला मंदिर में 10 से 50 वर्ष की महिलाओं के प्रवेश को लेकर अब तक प्रदर्शन जारी है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी अभी तक 10 से 50 वर्ष की महिलाओं को भगवान अयप्पा के दर्शन के लिए मंदिर में प्रवेश करने का मौका नहीं मिला है। महिलायें सबरीमाला पहाड़ी तक पहुंच तो जा रहे हैं लेकिन प्रदर्शनकरियों के विरोध पर वो वापस लौटने को मजबूर हैं। दरअसल सबरीमाला मंदिर में रजस्वला आयु वर्ग को प्रवेश की अनुमति नहीं हैं। हालाँकि देश के सर्वोच्च न्यायालय ने स्त्री-पुरुष समानता और मानवाधिकार के आधार पर आए फैसला लिया था जिसमें 10 से 50 साल उम्र की कोई बच्ची या महिला अयप्पा के दर्शन कर सकती है। सबरीमाला मंदिर के कपाट को सभी आयु वर्ग की महिलौन के लिए खोल दिया गया था।

- केरल में भारी विरोध प्रदर्शनों के बीच लगभग 100 पुलिसकर्मियों के सुरक्षा घेरे के बीच दो महिलाएं सबरीमाला मंदिर की ओर आगे बढ़ रही हैं। इनमें एक पत्रकार जबकि एक भक्त है।

- हैदराबाद की पत्रकार कविता और उनके चार सहयोगी सहित अन्य महिला भक्त को 80 पुलिसकर्मी घेरे हुए हैं, जबकि बाकी 20 पुलिसकर्मी उनसे आगे चल रहे हैं और रास्ता क्लियर कर रहे हैं।

- पांबा से मंदिर तक के रास्ते में आमतौर पर लगभग दो घंटे लगते हैं। पुलिस महानिरीक्षक एस.श्रीजीत के नेतृत्व में इन्होंने सुबह लगभग 6.45 बजे चढ़ाई शुरू की।

- रास्ते में एक प्रदर्शनकारी भक्तकों के सामने आकर उन्हें रोकने लगा लेकिन पुलिस ने उसे हटा दिया। भक्तों का एक गुस्साया समूह मंदिर के प्रवेश द्वार के रास्ते के सामने खड़ा है, जहां से होकर ही मंदिर जाया जाता है।

- सूत्रों के मुताबिक, मंदिर का तांत्री परिवार और पांडलम शाही परिवार के सदस्य महिलाओं को मंदिर में प्रवेश से रोकने के लिए मंदिर को बंद करने पर विचार कर रहे हैं।

- इस बीच सबरीमाला के पुजारी परिवार के एक वरिष्ठ सदस्य ने 10 से 50 साल आयुवर्ग की महिलाओं के मंदिर में प्रवेश पर रोक की परंपरा का सम्मान करने व महिलाओं से अयप्पा के मंदिर में न जाने का आग्रह किया। महिलाओं के प्रवेश पर रोक इसलिए है कि माना जाता है कि अयप्पा 'ब्रह्मचारी' थे।

- स्त्री-पुरुष समानता और मानवाधिकार के आधार पर आए सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के 20 दिन बाद भी 10 से 50 साल उम्र की कोई बच्ची या महिला अयप्पा के दर्शन नहीं कर पाई है।

- ये प्रदर्शनकारी 10 से 50 आयुवर्ग की महिलाओं के भगवान अयप्पा मंदिर में प्रवेश को मंजूरी देने का विरोध कर रहे थे।

- मंदिर परिसर में मीडिया से बात करते हुए मुख्य पुजारी कांतारारू राजीवरू ने कहा, "हम महिलाओं का बहुत सम्मान करते हैं। इसके अलावा दूसरी तरह की पूजा के लिए आने पर उनका बेहद सम्मान किया जाता है।"

- उन्होंने कहा, "हमने हमेशा कानून का सम्मान किया है, लेकिन सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद हम महिलाओं से विनम्रता से आग्रह करते हैं कि उन्हें इस पवित्र मंदिर की परंपरा को तोड़ने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।"

-सुप्रीम कोर्ट के 28 सितंबर के फैसले के बाद पहली बार बुधवार को मंदिर के कपाट खुले थे। कोर्ट ने अपने फैसले में 10 से 50 आयुवर्ग की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश की मंजूरी दी थी।