चायनीज माल पर भारी पड़ता गाय का गोबर, महिलाएं बना रही गाय के गोबर से देशी दीए

देश की ग्रामीण महिलायें देश को आत्मनिर्भर बना रही हैं, अब दिवाली पर चाइनीज दिए न जलाएं
चायनीज माल पर भारी पड़ता गाय का गोबर, महिलाएं बना रही गाय के गोबर से देशी दीए
गाय के गोबर के दीएगूगल इमेज

चीन के साथ सीमा विवाद के बाद भारत में भारतीय उत्पादों को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है, इस मामले में हर साल लाखों रुपये के दीपकों का व्यापार अकेले चीनी अर्थव्यवस्था के हिस्से में जाता था लेकिन आत्मनिर्भर भारत अभियान और चीनी उत्पादों के बहिष्कार के चलते ग्रामीण जीवन मे बेहद अनुपयोगी गोबर को आय और पर्यावरण संरक्षण का अहम साधन बना दिया गया है, अब इस बार दिवाली में लोगों के घरों में गोबर से बने दीपक जलते नजर आएंगे।

राजस्थान में बन रहे पवित्र दिए:

वैसे तो गाय के गोबर को सनातन धर्म मे हमेशा से पवित्र माना जाता रहा है, कोई भी शुभ कार्य बिना गाय के गोबर द्वारा जमीन के लेपन इत्यादि के बिना प्रारंभ ही नहीं होता, पूजन इत्यादि में पहले भी गाय के गोबर के दीयों और आटे के बने दीयों का प्रचलन रहा है लेकिन बाजारवाद के चलते चीनी दीयों और झालरों इत्यादि ने दीयों के इस मौलिक रूप को न सिर्फ छीन लिया बल्कि इसे चायनीज दीयों के विकल्प के रूप में लोगों के सामने प्रस्तुत भी कर दिया। वैसे भारत मे मिट्टी के दीयों का प्रचलन रहा है लेकिन देशी कुम्हारों के बनाये हुए चीनी चमकदमक के सामने फीके पड़ते गए।

भारत के साथ हुए चीनी विवाद ने भारत मे आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत देशी उत्पादों को बढ़ावा दिया गया और इसी क्रम में गाय के गोबर से बने हुए दिए इत्यादि को बढ़ावा दिया गया और इस काम मे राजस्थान के जयपुर से बनते हुए नजर आए, यहां आपको बताते चले कि ये दिए देखने मे न सिर्फ सुंदर नजर नहीं आते बल्कि ये दिए प्रकृति के लिहाज से भी बेहद उम्दा है और अगर पैसों की बात की जाए तो चायनीज दिए इनकी कीमतों के सामने कभी नहीं टिकते।

Rajasthan: A group of women are preparing eco-friendly 'diyas' with cow dung in Jaipur. "Cow dung is believed to be...

Posted by Asian News International (ANI) on Monday, October 19, 2020

महिलाएं बना रही भारत को आत्मनिर्भर:

राजस्थान के जयपुर में गाय के गोबर से बने इन दीयों को जयपुर की महिलाओं द्वारा निर्मित किया जा रहा है, महिलाओं द्वारा दी गयी जानकारी में यह बताया गया कि महिलाओं का यह समूह एक दिन में 1000 दिए बना लेता है, सनद रहे कि महिलाओं के इस समूह में करीब 100 महिलाएं शामिल है।

बेहद सरल होगा निस्तारण:

चीन निर्मित दीयों के उपयोग के बाद सबसे बड़ी समस्या यह होती थी कि इनके उपयोग के बाद इनका क्या होगा, क्योंकि इन दीयों में रासायनिक तत्वों के अलावा पीओपी जैसे तत्वों का उपयोग होता था जो कहीं न कही पर्यावरण के लिए बेहद खतरनाक साबित होते थे, लेकिन गाय के गोबर और मिट्टी से निर्मित दिए न सिर्फ उपयोग के लिए बढ़िया है बल्कि निस्तारण के लिए बेहद उपयोगी साबित होते हैं।

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उदय बुलेटिन
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