पैर पसार रहा कोरोना, सरकार उधेड़बुन में! क्या करें क्या न करें?

जनता लॉक डाउन की आहट को लेकर परेशान है वही सरकार ऐसी स्थिति में है जहां पर उन्हें इस बिंदु पर विचार करने में समय लग रहा है कि आखिर उपयोगी बचाव कदम क्या होना चाहिए।
पैर पसार रहा कोरोना, सरकार उधेड़बुन में! क्या करें क्या न करें?
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गलती सरकार की भी नही है और कोई भी सिस्टम इतने लंबे वक्त के लिए तैयार ही नही होता, दरअसल उत्तर प्रदेश देश की सर्वाधिक जनसंख्या वाला राज्य है जहां पर देश की आबादी का एक बेहद बड़ा हिस्सा निवास करता है, जाहिर सी बात है जहाँ जनसंख्या होगी वहां कोरोना जैसी संक्रामक बीमारी का प्रसार ज्यादा होगा, एक ओर जहां व्यापारी और लोग लॉक डाउन की आहट को लेकर परेशान है वही सरकार ऐसी स्थिति में है जहां पर उन्हें इस बिंदु पर विचार करने में समय लग रहा है कि आखिर उपयोगी बचाव कदम क्या होना चाहिए।

सरकार दे रही नाइट कर्फ्यू पर जोर:

अगर ताजा आदेशों ओर नजर डाली जाए तो सरकार सतर्कता के नाम पर रात्रि कर्फ्यू पर ज्यादा बल दे रही है। उत्तर प्रदेश के बाँदा में जैसे ही कोरोना संक्रमितों की संख्या बढ़ी तो जिला प्रशासन ने रात्रि कर्फ्यू की घोषणा कर दी। हालांकि रात्रि कर्फ्यू कोरोना से कितना निजात दिला सकते है ये एक बहुत बड़ा प्रश्न है?

बैंकर लगा रहे गुहार:

अगर बैंक कर्मियों की माने तो बीते साल के कोरोना काल मे भी बैंक कर्मियों द्वारा लगातार जान पर बाजी लगाकर वित्तीय कार्य संपन्न कराया था। बैंक कर्मियों के मुताबिक सरकार ने अपने आदेशों में सरकारी और निजी कर्मियों को आधे कर्मियों को वर्क प्लेस में आने की परमिशन दी है जबकि बैंक में ऐसा कोई सर्कुलर जारी नही किया है। हालांकि बैंक में ही सभी लोगों का सीधे संपर्क होता है, बैंकों में संक्रमण की स्थिति भीड़भाड से भयावह हो सकती है।

व्यापारियों में है भय का माहौल:

अगर व्यापारियों की बात करें तो व्यापारी सरकार द्वारा जारी होने वाले आगमी आदेशों को लेकर भयभीत है। व्यापारियों को अंदेशा है की अगर लॉक डाउन जैसी स्थिति फिर उत्पन्न होती है तो व्यापार रसातल को पहुँच सकता है। वैसे भी बीते साल के लाक डाउन ने व्यापार की कमर तोड़ रखी है।

शिक्षण संस्थान और छात्र असमंजस की स्थिति में:

अगर बात छात्रों की करें तो इस मामले पर छात्र और शिक्षण संस्थान इस संक्रमण काल को अलग नजरिये से देख रहे है, छात्रों की माने तो उन्हें सरकार द्वारा निर्धारित की गई परीक्षा को लेकर असमंजस की स्थिति है कि क्या ये परीक्षाएं होगी भी अथवा नही? हालांकि परीक्षा स्थल पर होने वाली भीड़ भाड़ को लेकर छात्रों के परिजनों में भय उत्पन्न हो रहा है

लोगों मे कम है कोरोना का भय:

लेकिन इस कोरोना संक्रमण में सरकार को अगर सबसे ज्यादा किसी से भय है तो वह है जनता की गलतियों से, दरअसल आम आदमी इस वक्त कोरोना से बेहद हल्के में ले रहा है और सरकार के निर्देशों का पालन नही कर रहा है यही कारण है ऐसी स्थिति में सरकार के माथे पर चिंता की लकीरें उभर रही है।

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उदय बुलेटिन
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