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क्या विश्व स्वास्थ्य संगठन जैसी संस्थाएं खत्म हो जाएंगी ? 

अमेरिका की फंडिंग के बगैर विश्व स्वस्थ्य संगठन का चलना मुश्किल हैं।

Shivjeet Tiwari

Shivjeet Tiwari

कम से कम हालात तो यही कहते है, जब भी किसी न्यायोचित संस्था का राजनैतिक दुरुपयोग होगा तभी ऐसे हालात बनेंगे लोगों का इन संस्थाओं पर से भरोसा टूट जाएगा कुछ ऐसे ही हालात इन दिनों विश्व स्वास्थ्य संगठन के हैं। अमेरिका ने अपनी कही हुई बात पर अमल करना शुरू कर दिया है।

संस्थाओं का भविष्य खतरे में है:

यहाँ अमेरिका ने जैसे ही विश्व स्वास्थ्य संगठन को दी जाने वाली फंडिंग को बंद करने का एलान किया तो पूरी दुनिया मे इस तरह की संस्थाएं अपने वजूद को लेकर चिंतिंत हो चुकी है। चिंता का विषय इसलिए भी है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन सबसे ज्यादा फंडिंग अमेरिका से ही पाता रहा है। यूनाइटेड नेशंस से लेकर विश्व ट्रेड ऑर्गनाइजेशन और यूनेस्को इत्यादि भी ट्रम्प की आलोचना झेल चुकी है, और इस बार विश्व स्वास्थ्य संगठन ऐसी गलती कर गया जिसकी दुनिया को उम्मीद नहीं थी।

WHO का कोरोना को लेकर लचर रवैया :

अब इसे विश्व स्वास्थ्य संगठन का लचर रवैया कहा जाए या फिर बीमारी के बारे में जानबूझकर सही जानकारी दुनिया तक नहीं पहुचाई गयी? शायद इसी का नमूना है कि आज पूरी दुनिया इस बीमारी की गिरफ्त में है। दरअसल सबसे खफा करने वाली बात को अमेरिका लंबे समय से क्वोट करता आ रहा है कि 14 जनवरी 2020 को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने जारी किए गए बयान में कहा था कि इस बीमारी में इंसान से इंसान जाने की कोई क्षमता नहीं है। जबकि इसी क्षमता की वजह से अब यह बीमारी पूरी दुनिया में तहलका मचा रही है।

मौत का आंकड़ा लाखों में पहुंचा :

ताजा जानकारी के अनुसार अब तक वुहान वायरस (कोविड 19) के द्वारा दुनिया भर में करीब 1 लाख 19 हजार से ज्यादा मौतें हो चुकी है और अमेरिका खुद अपने देश मे इस महामारी को लेकर त्रस्त है। अमेरिका में रोजाना हज़ारों के हिसाब से जानें जा रही है। अमेरिका के अनुसार विश्व स्वास्थ्य संगठन ने ताइवान की कोरोना संबंधी जानकारी विश्व समुदाय से छिपाकर मानवता के साथ धोखा किया है। सनद रहे इससे पहले भी विश्व स्वास्थ्य संगठन पर चीन की तरफदारी करने के आरोप लगते रहे है अब देखना यह होगा कि इस तरह की वैश्विक संस्थाओं का भविष्य क्या होगा।

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उदय बुलेटिन
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