सीमेंट का शवदाह गृह रेत सा क्यों ढहा? असल सच ठेकेदार ने कहा

गाजियाबाद के कातिल शवदाह गृह के लिए सोशल मीडिया में हज़ारों बातें चल रही है लेकिन हमें सबसे मारक एक बात लगी "सीमेंट का शवदाह गृह, रेत सा ढह गया, भ्रस्टाचार अभी भी जिंदा है, खामोशी से कह गया
सीमेंट का शवदाह गृह रेत सा क्यों ढहा? असल सच ठेकेदार ने कहा
सीमेंट का शवदाह गृह रेत सा क्यों ढहा?Google Image

मामले को लेकर गाजियाबाद प्रशासन ने कड़ी कार्यवाही करते हुए ठेकेदार अजय त्यागी की गिरफ्तारी की और सख्ती के दौरान ठेकेदार ने वो सच उगला जिसके बारे में सब जानते है लेकिन कह नही पाते।

पकड़ा गया कातिल ठेकेदार:

अब दुनिया मे कलम चलाने की इतनी कीमत शायद भारत के प्रधानमंत्री की भी नही होगी। जान बचाने वाले डॉक्टर ने भी कभी कोई मरीज देखने की कीमत इतनी नही ली होगी, लेकिन करप्शन की हद तो देखिए पढ़े लिखे कमीशनखोरों ने मौत के बाद अंत्येष्टि होने वाली जगह को भी कमीशनखोरी में तब्दील कर दिया। दरअसल इस मामले पर सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ भी कड़ी नजर रख रहे है इसलिए जब ठेकेदार पर हत्या का मुकदमा दर्ज कराया गया तो ठेकेदार ने गायब होने में भलाई समझी लेकिन सरकार और प्रशासन ने इस हरकत पर कड़ाई करते हुए भगोड़े ठेकेदार पर 25,000 रुपये का नकद इनाम घोषित किया। आखिर प्रशासन की कोशिश रंग लाई और ठेकेदार को गिरफ्त में लिया गया और मामले की तह तक पहुंचने के लिए पूँछतांछ शुरू की गई।

ठेकेदार ने बताया दी है बड़ी रिश्वत:

चूंकि मामला बहुत ज्यादा मौतों का है इसलिए जब कड़ाई हुई तो ठेकेदार ने बताया कि इस शवदाह गृह के निर्माण में भारी भरकम रिश्वत दी। ठेकेदार ने बताया कि उसने इस निर्माण के लिए निर्गत पहली किश्त के दौरान ही कुल मिलाकर 16 लाख रुपये जेई और ईओ को चुकाए थे। यही नही यह रिश्वत शवदाह गृह में गैलरी निर्माण के लिए चुकाए गए थे।

पैसों का हुआ बंदरबांट और नियमों को रखा ताक पर:

मामले में गिरफ्तार होने के बाद ठेकेदार ने इस मामले की कई परतें खोली है जिसमें रिश्वतख़ोरी का अदृश्य सिंडिकेट और नियमों की अनदेखी शामिल है, ठेकेदार ने इस मामले में बताया कि उसके द्वारा रिश्वत देने के बाद सभी बंदिशें हट गई थी और उसने नियमों को ताक पर रखकर दूसरी अन्य फर्मों के माध्यम से निर्माण कराया इस मामले में अन्य फर्मों की भी जाँच कराई जा रही है।

क्या कहते है अन्य ठेकेदार?

इस मामले में उदय बुलेटिन ने उत्तर प्रदेश के कई जिलों में ठेकेदारी से काम कराने वाले विभागों से जुड़े हुए ठेकेदारों से बात की और इसका सार यह निकला कि लगभग हर सरकारी निर्माण (जो ठेकेदार के माध्यम से हो रहा है) में निर्गत धनराशि का एक बड़ा हिस्सा जिम्मेदार लोगों के पेट मे जाता है, ठेकेदारों ने बताया कि उन्हें भी लगता है कि काम ऐसा हो जिससे किसी को भी जन धन की हानि न हो लेकिन इस सब के बाद भी उन्हें जेई, ए ई, ई ओ, इत्यादि को साधना पड़ता है। एक ठेकेदार ने तो बाकायदा यह भी बताया कि निर्गत राशि के 10 प्रतिशत के चढ़ावे के बिना काम की मंजूरी ही नही मिल सकती ये बेहद न्यूनतम रिश्वत है। ये कभी कभार 40 प्रतिशत तक पहुँच जाती है।

ठेकेदारों ने इस बाबत यह जानकारी भी उपलब्ध कराई की अगर कोई ठेकेदार इन अधिकारियों के नियमों पर न चलकर रिश्वतखोरी को नही स्वीकारता तो सबसे पहले उसके काम को पास नही किया जाएगा और बांकी धनराशि निर्गत नही होगी और भविष्य के कामों के लिए प्रतिबंध लागू हो जाएगा।

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उदय बुलेटिन
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