नितिन गडकरी अपनी ही पार्टी के खिलाफ क्यों कर रहे हैं बयानबाजी !

नितिन गडकरी इन दिनों सुर्खियां में हैं। वैसे तो नितिन गडकरी अपने बयानों के कारण अक्सर चर्चा में बने रहते हैं। लेकिन इस बार के बयान में या यूं कहे तो तंज में इशारा पीएम मोदी की तरफ है।
नितिन गडकरी अपनी ही पार्टी के खिलाफ क्यों कर रहे हैं बयानबाजी !
Nitin GadkariGoogle Image

नितिन गडकरी इन दिनों सुर्खियां में हैं। वैसे तो नितिन गडकरी अपने बयानों के कारण अक्सर चर्चा में बने रहते हैं। लेकिन इस बार के बयान में या यूं कहे तो तंज में, इशारा पीएम मोदी के तरफ है। बीजेपी में ऐसा कई नहीं है जो पीएम मोदी पर सवाल उठा सके। ऐसे में गडकरी के तंज के अनेक मायने है। इस बारे में हम आगे बात करेंगे लेकिन पहले जानते है कि गडकरी न कहा क्या था।

दरअसल, नितिन गडकरी ने हाल ही में मुंबई में एक कार्यक्रम में शरीक होने गए थे। जहां भाषण के दौरान उन्होंने कहा कि

सपने दिखाने वाले नेता लोगों को अच्छे लगते हैं लेकिन उन सपनों को पूरा न करने पर जनता उनकी पिटाई भी करती है। इसलिए सपने वो ही दिखाओं जो पूरे हो सके।

नितिन गडकरी

गडकरी यहीं नहीं रुके उन्होंने खुद का उदाहरण देते हुए कहा कि

मैं सपने दिखाने वालों में से नहीं हूं मैने जो कहा है वो 100 फीसदी डंके की चोट पर पूरा किया है।

नितिन गडकरी

क्या वाकई मोदी सरकार ने वादे पूरे नहीं किए है?

गडकरी के इस बयान को पीएम मोदी के संदर्भ में जोड़ कर देखा जा रहा है। अगर मोदी सरकार का ट्रैक रिकॉर्ड देखा जाए तो सड़क, बिजली, रसोई गैस सब्सिडी जैसे मुद्दे पर तो सरकार ने सफलता पाई है। लेकिन ऐसे बहुत सारे मुद्दे है जिन पर मोदी सरकार की खूब आलोचना भी हुई है। जैसे गंगा की सफाई को लेकर। आपको याद होगा जब नरेंद्र मोदी बीजेपी के पीएम पद के उम्मीदवार थे तो उन्होंने कहा था

मुझे न किसी ने भेजा, न मैं यहां आया हूं,,, मुझे तो मां गंगा ने बुलाया।
नरेंद्र मोदी

चुनाव जीतने के बाद मोदी सरकार ने पहली बार गंगा मंत्रायल बनाया और उमा भारती को पहली बार गंगा मंत्री भी बनाया गया। लेकिन हुआ कुछ नहीं.. एक आरटीआई रिपोर्ट से पता चला कि गंगा कई जगहों पर और भी गंदी हो गई है।

अब आते हैं किसानी पर किसानों की समस्या आज की नहीं बल्कि दशकों से है। तभी तो लोगों ने नरेंद्र मोदी पर भरोसा कर सत्ता की चाबी उनके हाथ में दी। लेकिन हुआ क्या सरकार जरूर किसानों की बेहतरी के लिए काम करने का दावा कर रही हो। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहती है। किसान अक्सर अपनी मांगों को लेकर धरना प्रदर्शन करते रहे है।

ऐसा ही हाल रोजगार का है। रोजगार के क्षेत्र में भी मोदी सरकार युवाओं के भरोसे को कायम नहीं रख पाई है। ऐसे में मोदी कैबिनेट के वरिष्ठ मंत्री का सरकार के खिलाफ बयान देना विपक्षी पार्टी के लिए नो बॉल पर फ्री हिट जैसा है।

लेकिन ये पहला मौका नहीं है जब गडकरी ने बीजेपी नेतृत्व पर उंगली उठाई हो। इससे पहले भी पुणे के एक कार्यक्रम में गडकरी ने कहा था

जब सफलता मिलती है तो उसके कई दावेदार होते है लेकिन विफलता में कोई साथ नहीं देता। लोग एक दूसरे पर उंगली उठाते है। सफलता का श्रेय लेने के लिए होड़ मची रहती है। अगर मैं पार्टी का अध्यक्ष हूं और मेरे सांसद अच्छा काम कर रहे हैं तो इसका जिम्मेदार कौन होगा? जाहिर है मैं हूं।

नितिन गडकरी

ये बयान 24 दिसंबर 2018 को आया। माना जा रहा है कि तीन राज्यों में हुई बीजपी की हार पर गडकरी का नेतृत्व पर तंज था।गडकरी के इस तरह के बयानों के बाद से ही बीजेपी में मोदी विरोधी सुर उठने लगे है।

दरअसल, गडकरी नागपुर से आते है और संघ के चहेते है। विरोधी पार्टियों से भी उनके रिश्ते अच्छे बताए जाते है। कई उद्योगपतियों से उनके जान पहचान है। बीजेपी में भी जो लोग मोदी के नाम पर विरोधियों का हाथ पकड़ रहे है वो भी नितिन गडकरी के नाम पर एक साथ आ सकते हैं। लेकिन सवाल है कि नितिन गडकरी का नाम इतनी तेजी से उठ क्यों रहा है? इसका जवाब हाल मे हुए सर्वे से मिलता है। सर्वे में बीजेपी को पूर्ण बहुतम नहीं मिल रही है। ऐसे में बीजेपी को साथियों की जरूरत होगी लेकिन मोदी के नाम पर विरोधी को छोड़िए। अपने पार्टी के कुछ नेता साथ नहीं दे रहे हैं । जिस वजह से कयास लगाए जा रहे है कि अगर आम चुनाव के बाद साथी की जरूरत पड़ी तो गडकरी नरेंद्र मोदी का विकल्प हो सकते है। गडकरी के नाम पर विपक्षी पार्टियां बीजेपी का साथ दे सकती है।

हालांकि ये सब अभी कयास ही लगाये जा रहे हैं। कहीं न कहीं मीडिया मोदी और शाह की रणनीति को कम कर आंक रही है। 2014 से पहले भी तमाम सर्वे में बीजेपी के लिए अच्छी खबर नहीं थी। लेकिन चुनाव के बाद सारे दावे उल्टे पड़ गए। अब ये देखना होगा कि 2019 आम चुनाव में ऊंट किस करवट बैठेगा।

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उदय बुलेटिन
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