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राजस्थान में बच्चों की मौत पर इतनी खामोशी सब पर सवाल उठाती है

कोटा के अस्पताल में बच्चों की मौत के मामले को नजरंदाज करने पर मायावती का प्रियंका गाँधी पर हमला

Shivjeet Tiwari

Shivjeet Tiwari

Summary

इतने बड़े चिकित्सा संस्थान के होते हुए बच्चों का इतनी संख्या में मौत के आगोश में समाना सरकार और सिस्टम पर सवालिया निशान लगाता है। उसके बाद सूबे के मुखिया गहलोत का संवेदनहीन बयान देना उसपर कोढ़ पर खाज की स्थिति लाता है। लेकिन मजेदार बात तो तब होती है जब लोग इस मुद्दे पर बात करते हुए नजर आने चाहिए, वो बेहद शांत है, मानो बच्चों की जान इनके लिए कोई कीमत नहीं रखती।

उत्तर प्रदेश का गोरखपुर, और गोरखपुर का सरकारी चिकित्सा संस्थान जहाँ जापानी बुखार से अचानक बच्चों की मौत होना शुरू हुई। बदकिस्मती कहें या अस्पताल या सिस्टम या सीधे शब्दों में सरकार की खामी, संस्थान में आक्सीजन सप्लाई अनवरत न होने के कारण कई बच्चों की जान चली गयी और वह दृश्य देश का सबसे तकलीफ दायक बन गया जहाँ सूखे हुए आंसुओ के साथ एक महिला अपने नवजात शिशु की लाश को ढोये चली जा रही है। जिस उम्र में बच्चों को किलकारी मारना था वो बिना जान के अपनी माँ से चिपका हुआ था।

ये भी सच है कि जब बीमारियों का प्रकोप अपने चरम पर होता है तब शिशु मृत्यु दर जाहिर तौर पर बढ़ती है लेकिन उस वक्त सरकार के क्या कदम होने चाहिए? सरकार का पहला कदम है कैसे भी करके होती मौतों पर अंकुश लगाने की कोशिश करना, संसाधन उपलब्ध कराना और बिना कुछ कहे अपना काम करते जाना। लेकिन जैसा आप जानते है नेताओं का कोई भरोसा नहीं क्योंकि वो बक्त-बेवक्त कुछ ऐसा बोलने के लिए जाने जाते है जो संवेदनशीलता को मारने जैसा होता है। ठीक ऐसा ही योगी सरकार के एक नेता ने किया, और कहा कि मौतें तो होती रहती है, खैर सरकार कुछ कदम उठाती इससे पहले ही देश के विपक्षी दल, मीडिया ने सरकार पर दबाव बनाया, मामले खड़े किए, प्राइम टाइम पर इन खबरों को हवा दी गयी।

लेकिन राजस्थान के कोटा में एक सैकड़ा से ज्यादा बच्चे एक ही अस्पताल में बिना किसी कारण के मर रहे हैं और उस प्रदेश का मुख्यमंत्री मौतों को नैसर्गिक करार देता है। मीडिया से कहता हुआ नजर आता है किस हर अस्पताल में तीन, चार, सात मौते होती है इसमें कोई नई बात ही नहीं है। और देखने वाली बात तो आज ये है कि जो मीडिया और दल गोरखपुर के समय सीना फाड़ कर चिल्ला रहे थे उनकी किसी की मुखर आवाज इस मामले में नजर नहीं आती। जो नेता यूपी में दंगा पीड़ितों के यहाँ जाकर दरवाजा खोद डाल रहे है उन्हें राजस्थान की उन माओं से मिलने की फुर्सत नहीं है जिनके बच्चे अभी-अभी मौत के मुँह में समाए है।

हालाँकि यह भी सच है की मौतों को टाला नही जा सकता लेकिन जिम्मेदार मुखिया का इस तरह से बयान देना बेहद बेशर्मी भरा है। इस तरह के बयान समाज मे गलत संदेश देते है। 

बसपा सुप्रीमो मायावती ने भी अपने ट्विटर पर कुछ ऐसा ही कहने की कोशिश की है:

बसपा सुप्रीमो मायावती ने कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा पर सीधे तौर पर आरोप लगाए है जिन्होंने राजनितिक जगह मजबूत करने के चक्कर मे उत्तर प्रदेश को नाप डाला है लेकिन कांग्रेस पार्टी शासित प्रदेश में बच्चे मर रहे है वहां जाना ठीक नही समझा।

सोशल मीडिया में राजनैतिक पार्टियों और मीडिया को लेकर भरपूर असंतोष व्याप्त है लोग इस मामले को लेकर तमाम प्रतिक्रियाएं जाहिर कर रहे है, और कोटा के दोषी नामक हैशटैग से इस को प्रचारित कर रहे है।

संजय भटनागर नामक उपयोगकर्ता ने तो कुछ लोगों को इस मामले पर बात न करने पर एन्टी नेशनल तक कह दिया।