क्या किसी शातिर दिमाग की चाल थी जाफराबाद की हिंसक मुहिम ? 

विदेशी मेहमान के सामने देश की राजधानी में हिंसा फैलाकर देश को बदनाम किया गया।
क्या किसी शातिर दिमाग की चाल थी जाफराबाद की हिंसक मुहिम ? 
Delhi ViolenceUday Bulletin
Summary

आखिर वही हुआ जिसकी स्क्रिप्ट लंबे समय से लिखी जा रही थी, दिल्ली जलने लगी, अब तक दिल्ली पुलिस के जवान समेत करीब 7 लोगों के मारे जाने की खबर है। देश मे इस आंदोलन को एक बार हवा फिर दी गयी जब दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश का पहला व्यक्ति भारत यात्रा पर है और दुनिया भर की मीडिया इसे कवर कर रही है।

अब ही क्यों ?

शाहीन बाग का इलाका जहां लंबे समय से प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को लेकर डटे हुए थे। लेकिन जैसे ही दिल्ली चुनाव समाप्त हुए इन आंदोलनों में एक अजीब सी मायूसी देखी गयी और परिणाम के बाद शाहीन बाग जैसे इलाके को लगभग खाली भी कर दिया गया। लेकिन अचानक से जाफराबाद इलाके में तेजी नजर आने लगी। इसके कई मायने हो सकते है, हालांकि जानकारों की माने तो इसका सीधा संबंध भारतीय राजनीति से जुड़ा हुआ है जिसके चलते इस कदम को उठाया गया। पहले तो जाफराबाद मेट्रो स्टेशन के नीचे जाने वाली सडकों को ब्लाक करके आवाजाही को रोक दिया गया और और इस बात की उम्मीद की गई कि दूसरा पक्ष इसके लिए विरोध में स्वर उठाये और ऐसा हुआ भी।

भीम आर्मी के आवाहन पर भारत बंद की कहानी लिखी गयी:

सड़को को बंद करके इसको एक जीत की तरह दर्ज कराया गया:

वहीँ दूसरी तरफ जनता शाहीन बाग से तो त्रस्त ही थी इस आग में घी डालने वाला काम कपिल मिश्रा ने कर दिया।

फिर वही हुआ जिसकी उम्मीद की जा रही थी, सीएए कानून का विरोध तो एक बहाना था, अपनी मजबूती को दर्ज कराने के लिए दिल्ली को घुटनों पर लाना था, और कुछ ऐसा हुआ भी।

दिल्ली पुलिस के सामने खुलेआम गोली चलाता हुआ युवक:

अब क्या हालात है?

कमोबेश बद से भी बदतर है, लोगों की संपत्ति को नुकसान पहुँचाया जा रहा है। सरेआम पेट्रोल पंप समेत सरकारी और निजी वाहनों को आग के हवाले किया जा रहा है। असल समस्या केवल जनता की बढ़ी है, लेकिन जिन्होंने इस बंद को बुलाया और दंगे को भड़काने की शुरुआत की उनका क्या ?

कहीं छवि खराब करने की कोशिश तो नहीं :

भारत को अगर एक तरीके से देखे तो उसकी पहचान विश्व मे एक बेहद मजबूत राष्ट्र की तरफ बढ़ रही है, और ऐसे में अमेरिकी राष्ट्रपति की मौजूदगी में देश की राजधानी में इस तरह के माहौल का बनना हज़ारों सवाल खड़े हो जाते है। जिनका जवाब सबके पास होने के बाद भी कुछ भी नहीं कहा जा सकता।

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उदय बुलेटिन
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