मोदी ने पीएम केयर पर तगड़ा दांव खेल दिया, विरोधियों को बोलने का मुंह नहीं बचा
पीएम केयर्स फंड से ख़रीदे जायेंगे वेंटीलेटर
मोदी ने पीएम केयर पर तगड़ा दांव खेल दिया, विरोधियों को बोलने का मुंह नहीं बचा
pm cares fund ventilatorsGoogle image

कोरोना महामारी के दौरान अगर कोई दूसरी चीज चर्चा में रही तो यह था पीएम केयर फंड जिसके लिए भारत मे विपक्ष के साथ-साथ कुछ मीडिया हॉउस ने भी बाकायदा कोर्ट में जाकर अर्जियां दी। जिससे फंड की जानकारी और ऑडिट हो सके लेकिन अब इस मामले पर भाजपा और मोदी सरकार ने बहुत तगड़ी चाल चल दी है जिसके लिए विपक्ष के पास कोई जवाब नहीं है।

गड़े मुर्दे उखाड़ दिए:

चूंकि वेंटिलेटर एक महंगा चिकित्सा उपकरण है जिसकी उपलब्धता बहुत कम अस्पतालो में पाई जाती है शायद यही कारण है कि सरकार के पास इनकी बिक्री और उपयोग का पूरा हिसाब उपलब्ध है। अगर आकड़ो की माने तो पिछले सत्तर सालो में भारत के पास अब तक केवल 47481 वेंटिलेटर थे। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना महामारी की भयावहता के मद्देनजर पीएम केयर्स के फंड को नए वेंटिलेटर खरीदने में खर्चने का मन बनाया है। और प्रधानमंत्री की अगुवाई वाली टीम ने देश और विदेश में वेंटिलेटर के लिए ऑर्डर भी जारी कर दिया है।

क्या है वेंटिलेटर का आंकड़ा:

अगर भारत के चिकित्सा इतिहास को देखे तो आजादी के बाद से इसकी कोई ऐसी उपलब्धि नहीं रही जिसको ज्यादा बेहतर मान लिया जाए। अगर आज के एलोपैथी मेडिकल सिद्धांतों को माने तो रेस्पेटरी सिस्टम में अटैक करने वाले रोगों में वेंटिलेटर की आवश्यकता ज्यादा बढ़ जाती है। चिकित्सा के क्षेत्र में अग्रणी अमेरिका भी इस चिंता को लेकर परेशान था यही कारण है कि जब महामारी का कहर बढा तो अमेरिका के अस्पतालों में वेंटिलेटर की भयानक कमी देखी गयी। वहीँ अगर भारत की बात करें तो यहाँ सार्वजनिक (सरकारी क्षेत्र) के अस्पतालों में 17800 वेंटिलेटर की उपलब्धता है वहीँ निजी क्षेत्र के अस्पतालों में यह आंकड़ा 29631 तक पहुँच जाता है। लेकिन अगर दोनों का योग भी करे तो ये संख्या महज 47481 तक ही सीमित रहती है। अब अगर देश की आबादी और कोरोना जैसी महामारी के हालात पर नजर डाले जाए तो ये संख्या शून्य मालूम होती है।

अब अगर नए और पुराने दोनो वेंटिलेटर की संख्या को जोड़कर प्रस्तुत किया जाए 97481 हो जाती है हालांकि भारत जैसी भारी जनसंख्या के बीच ये संख्या भी कोई खास मायने नहीं रखती लेकिन इस दौरान अगर संख्या बढ़ी है तो ये काबिले तारीफ है।

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उदय बुलेटिन
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