ज्ञानवापी मस्जिद
ज्ञानवापी मस्जिद|विकिपीडिया
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वाराणसी में ज्ञानवापी मस्जिद को ज्योतिर्लिंग मंदिर बताया जा रहा है, शुरू हुयी कानूनी लड़ाई।

राम मंदिर का निर्माण शुरू होने के साथ ही अब वाराणसी में 'ज्ञानवापी परिसर' को मुक्त कराने की कानूनी लड़ाई शुरू हो गई है।

Shivjeet Tiwari

Shivjeet Tiwari

राम लला हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे, इसके बाद नया नारा संज्ञान में आ रहा है। बम भोले हम आएंगे, डमरू वहीँ बजायेंगे, दरअसल अयोध्या के बाद अब मामला बनारस (वाराणसी) की ज्ञानवापी मस्जिद (Gyanvapi Masjid) लोगों के निशाने पर आ चुकी है। इस मामले में अदालत में पहले से ही वाद दायर था। अब यह सुनवाई अदालत में शुरू हो चुकी है, लेकिन एक पक्ष (सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड) के सुनवाई में न पहुंचने की वजह से अदालत ने सुनवाई टाल दी है।

अब ज्ञानवापी बनी मुद्दा:

अभी हाल में ही भारत के प्रधानमंत्री द्वारा अयोध्या में बहुप्रतीक्षित श्रीराम भव्य मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन किया गया है।उसके बाद एक नया मामला तेजी से संज्ञान में आया है और इस बार जगह है वाराणसी की ज्ञानवापी मस्जिद । जिसके मूल स्थान को लेकर लोगों के द्वारा अलग प्रकार का ही दावा किया जा रहा है। दरअसल हिन्दू पक्ष का कहना है कि काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर से सटी हुई मस्जिद को लेकर अपना पक्ष अदालत में रखा है और कोर्ट को बताया है कि यह वास्तव में मस्जिद नही बल्कि एक ज्योतिर्लिंग मंदिर था जिसमें शिवलिंग की स्थापना थी। कालांतर में हुए मुगल आक्रमण में इस मंदिर को तोड़कर इसे मस्जिद (Gyanvapi Masjid) का रूप दिया गया।

हिन्दू पक्ष के अनुसार मस्जिद की हो जांच:

मामले से जुड़े हुए हिन्दू पक्ष का कहना है कि हमारे दावे की सत्यता और पूरी पड़ताल के लिए पुरातात्विक जांच होनी चाहिए जिसमें इस सो काल्ड मस्जिद के सभी रहस्य सामने आ जाएंगे। लोगों के अनुसार दरअसल यह एक मंदिर था जिसकी दीवारों के ऊपर गुम्बद नुमा आकृति बनाकर इसे मस्जिद की तरह बना दिया गया जो हर प्रकार से गलत है।

कोर्ट में टली सुनवाई:

मामले में अदालत ने सुनवाई करने की पूरी तैयारी कर ली थी लेकिन तभी दूसरे पक्ष सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के वकील के न पहुँचने की वजह से इस सुनवाई को अगले एक सितंबर तक के लिए टाला गया है। संभव है कि 1 सितंबर के बाद इस मामले में खासा उबाल देखने को मिले।

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उदय बुलेटिन
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