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Uttarakhand Ayurved Medical Student Protest
Uttarakhand Ayurved Medical Student Protest|Social Media
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आयुर्वेद के विद्यार्थियों का अनशन लगभग एक माह से चालू है, सरकार के कानों पर जूं तक नही रेंग रही 

1 महीने से आयुर्वेद चिकित्सा के छात्र कर रहे हैं आंदोलन और उत्तराखंड की भाजपा सरकार प्राइवेट कॉलेज मालिकों की गुलामी कर रही है।

Shivjeet Tiwari

Shivjeet Tiwari

Summary

दुनिया भर में भारतीय आयुर्वेद का डंका बज रहा है, आयुष मंत्रालय आयुर्वेद के प्रचार और प्रसार के तमाम दावे करता आ रहा है और उसी आयुर्वेद को दुनिया भर में फैलाने का असल काम भविष्य के डॉक्टर करते है उन्हें आजकल सरकार की बंदिशों और लाठियों का सामना करना पड़ रहा है।

मामला देश के उत्तराखंड राज्य से जुड़ा हुआ है जहाँ करीब करीब सभी प्राइवेट कालेज के आयुर्वेदिक छात्र आंदोलन पर है और मुद्दा है फीस बढ़ोत्तरी का, मामला यह है कि एक सेसन में सभी प्राइवेट कालेजो में ली जाने वाली फीस को 80 हजार से बढ़ाकर 2 लाख पचास हजार रुपये कर दिया है, छात्र लगभग एक माह से भी ज्यादा समय से इस गालत तरीके से बढ़ाई गई फ़ीस को लेकर आंदोलन कर रहे है।

Uttarakhand Ayurved Medical Student Protest
Uttarakhand Ayurved Medical Student Protest
Uttarakhand Ayurved Medical Student Protest
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हाईकोर्ट और सरकार की अवमानना :

प्रदेश में चल रहे सभी प्राइवेट आयुर्वेदिक कालेजो के संगठन में इस कदर की ताकत है कि उन्होंने सबसे पहले कोर्ट के फीस वापसी के आदेश और उसके बाद सरकार के आदेश पत्र को भी नकार दिया है, प्रदेश के आयुष विभाग के फीस विनियामक ने सबसे पहले फ़ीस बढ़ाने का आदेश जारी किया लेकिन इससे पहले भी कालेजो द्वारा विद्यार्थियों से बढ़ाकर फीस वसूली गयी, आरोप यही तक सीमित नही , बल्कि कई विद्यार्थियों द्वारा यह भी रिपोर्ट किया गया कि कालेजो द्वारा सरकार के आदेश के पहले भी फ़ीस को वसूला गया और सरकार के निर्देशो के बाद उन विद्यार्थियों से भी फ़ीस वसूली गयी जिन्होंने पहले ही फीस जमा कर दी थी।

सरकार भी कम दोषी नही :

हालाँकि यह मामला 2015 से चला आ रहा है लेकिन करीब 4 सालो बाद भी सही निष्कर्ष नही निकाल पाया है यही नहीं

सरकार का ढुलमुल रवैया केवल फ़ीस बढ़ाकर कम करने तक ही नही रहा बल्कि सरकार ने बिना कोई जायज तर्क दिए फ़ीस को कई गुना तक बढ़ाया और जब हाईकोर्ट ने इस मामले पर सरकार को लताड़ते हुए अपना आदेश दिया तब भी सरकार अपने आदेशो को कालेजो द्वारा अनुपालित कराने में असफल रही, इसका मुख्य कारण प्राइवेट आयुर्वेद कालेजो का यूनियन है जिसने अपनी धौस द्वारा सरकार की जड़े हिलाकर सरकार को झुका लिया और हाईकोर्ट के आदेशों को धता बताया, यही नही जब इस बारे में हाईकोर्ट को फिर यह जानकारी दी गयी कि कॉलेज हाईकोर्ट के आदेशों को मानने से इनकार कर रहे है और यह सीधे-सीधे कोर्ट की अवमानना का मामला है, तब हाईकोर्ट ने सरकार को तलब करके लताड़ा और आदेश को तत्काल प्रभाव से पालन कराने के आदेश जारी किए।

सरकार ने छात्रों के आंदोलन को दबाने के लिए आंदोलन कर रहे छात्रों पर शांति भंग करने का आरोप लगाकर लाठीचार्ज जैसी गतिविधियों को अंजाम दिया जिसके फलस्वरूप कई छात्र अस्पताल के बिस्तरों पर घायल होकर पड़े है। 

गैर-राजनीतिक और विपक्ष का छात्रों को समर्थन :

इस मामले पर पूरे उत्तराखंड में हो हल्ला मचा हुआ है तमाम छात्र संगठन और गैरराजनीतिक संगठन छात्रों के इस विरोध में बराबर सहयोग दे रहे है यहाँ तक कि कांग्रेस भी छात्रों के साथ अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की वजह से जुड़ी हुई है।

आयुर्वेद के विद्यार्थियों का अनशन लगभग एक माह से चालू है, सरकार के कानों पर जूं तक नही रेंग रही 
आयुर्वेद के विद्यार्थियों का अनशन लगभग एक माह से चालू है, सरकार के कानों पर जूं तक नही रेंग रही 

#राष्ट्रीय_आयुर्वेद_संस्थान के छात्रसंघ अध्यक्ष #Dr_Bhanwra_Ram तथा संस्थान के अन्य साथियों के साथ उत्तराखंड में चल...

Posted by Sunil Tetarwal on Friday, October 25, 2019

छात्रों के अनुसार हमारा यह विरोध प्रदर्शन किसी पार्टी और दल के खिलाफ नही बल्कि हमारा विरोध कालेजो की मनमानी को लेकर है, यह भी सच है कि सरकार कालेजो के प्रति बेहद गुलामी वाला रवैया अपना रही है और कॉलेज हाईकोर्ट और सुप्रीमकोर्ट की वह गाइडलाइंस जिसमे "फीस बढ़ाने का अधिकार सरकार और यूनिवर्सिटी को है, हालाँकि यह निर्धारण शुल्क नियामक अथारिटी की संस्तुति के बाद ही होगा" का खुल्लमखुल्ला मजाक उड़ाया जा रहा है।