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Real Story Of Unnao Rape Case
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सिर्फ रेप और हत्या तक सीमित नहीं है उन्नाव केस

रेप, हत्या के पीछे की असल बजह कहीं जातिबाद तो नहीं?

Shivjeet Tiwari

Shivjeet Tiwari

Summary

पूरा समझेंगे तो किसी हिंदी फिल्म की तरह लव ,सेक्स, धोखा, बदला और वो सब है जो किसी हिंदी फिल्म को मकबूल बनाता है, लेकिन शर्मिंदगी की बात यह है कि यह दुखद कहानी एक लड़की की मौत पर खत्म हुई, और वो भी रेप के बाद।

इस मामले को समझने के लिए रेप और हत्या को सबसे पहले किनारे पर रखते हैं, क्योकि ये तो वो बातें है जो जग जाहिर है इसके पहले एक लंबी पटकथा है जो समय-समय पर इसके अंदर आने वाकई किरदारों ने लिखी और इसे देश का बहुचर्चित मामला बना दिया।

चलिये आपको इस केस की अंतिम घटना से रूबरू करा देते हैं:

उत्तर प्रदेश का उन्नाव शहर, जहाँ एक रेप पीड़िता अपने केस के सिलसिले में अदालत से न्याय मांगने की कोशिश में थी तभी जमानत पर निकले रेप के आरोपियों ने उसे रास्ते मे रोककर ज्वलनशील पदार्थ की मदद से बुरी तरह जला दिया जलने का आलम यह था कि युवती करीब नब्बे प्रतिशत तक जल चुकी थी। युवती ने खुद किसी अनजान व्यक्ति के फोन की मदद से उत्तर प्रदेश पुलिस की हेल्पलाइन को कॉल कर मदद मांगी।

यहाँ एक बात बतानी पड़ेगी की महिला इस घटना के बाद करीब एक किलोमीटर पैदल चलती रही और आग की जलन से चिल्लाकर लोगों से मदद मांगती रही।

पुलिस के पहुंचने पर पुलिस ने चिकित्सा के लिए स्थानीय स्वास्थ्यकेन्द्र पर भर्ती कराया और स्थिति बिगड़ने पर बड़े अस्पतालों का रुख किया गया, इतने पर भी हालात न सुधरने पर एयर एम्बुलेंस के माध्यम से उत्तर प्रदेश सरकार ने अपने खर्चे पर पीड़िता को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया जहाँ लगभग चवालीस घंटे की जंग के बाद युवती जिंदगी से हाँथ धो बैठी।

यहाँ आपको बता दे कि उत्तर प्रदेश पुलिस युवती को संभालने के तुरंत बाद ही आरोपियों को अपने गिरफ्त में ले चुकी थी जानकारी के अनुसार लगभग पांच व्यक्ति इस घटना में शामिल रहे, इस घटना के बाद भी जिन लोगों ने आरोपियों को देखा वह यह बताने से नही चूक रहे थे कि आरोपियों के चेहरे पर इतने बड़े अपराध करने के बाद भी कोई पछतावा नजर नही आ रहा था।

पीड़ित युवती और आरोपी एक दूसरे को जानते थे :

जानते क्या थे दोनो ने एक वक्त पर साथ जीने मंरने की कसमें तक खाई थी, मुख्य आरोपी शिवम मृतक युवती के साथ करीब दो महीने तक साथ मे बाहर भी रहा था।

दर्ज शिकायतों में पीड़िता मृतक युवती ने यह उल्लेख किया है कि शिवम ने उसे शादी का झांसा देकर किसी दूसरे स्थान पर लगभग दो माह रखा और उसका नियमित रूप से शारिरिक शोषण किया गया।

लेकिन यह दौर लंबे समय तक नहीं चला और आखिरकार शिवम ने एक वक्त में मृतका से शादी के लिए मना कर दिया यहाँ सनद रहे कि उस वक्त तक मृतका और शिवम दोनो के परिवार वाले इस संबंध को लेकर खुश नहीं थे, या दूसरे शब्दों में दोनो पक्ष इसको लेकर विरोध में थे।

शादी नकारी और दुश्मनी शुरू हो गयी :

Claimed Marriage Certificate
Claimed Marriage Certificate
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जैसे ही शिवम ने इस शादी के लिए मना किया और युवती घर आयी उसी वक्त ही रायबरेली के लालगंज थाने और उन्नाव के बिहार थाने (एक जगह का नाम, बिहार प्रदेश नही) में यौन शोषण की शिकायत दर्ज कराई जिसमें शादी का झांसा देकर शोषण करने का मामला दर्ज है) इसमें एक बात और गौर करने वाली है कि इस एफआईआर में एक नया व्यक्ति जुड़ा जिसका नाम शुभम है यह वही व्यक्ति है जिसने मृतका और शिवम के प्रेम प्रषंग में बड़ी भूमिका निभाई थी।

मृतका के परिवार ने मृतका के साथ शुभम पर भी बलात्कार का केस दर्ज कराया, लिखी गयी रपट के अनुसार दो माह के अंतर्गत मृतका के ऊपर शिवम ने दबाब डाला कि वह शुभम के साथ शारीरिक संबंध बनाए लेकिन मृतका के मना करने के बाद एक सुनसान जगह बुलाकर शिवम ने शुभम को मृतका पर जबरजस्ती यौन संबंध बनाने का समर्थन किया। रिपोर्ट में यह अंकित है कि उक्त स्थान पर शिवम ने शुभम के साथ मिलकर मृतका के साथ रेप जैसी वारदात को अंजाम दिया।

एफआईआर हुई और पुलिस उलझन में :

हालाँकि एफआईआर पहले यौन शोषण फिर बहला फुसला कर झांसा देने और फिर कहीं जाकर बलात्कार के रूप में परिणित हुई, क्योंकि मामला था ही पेचीदा। इस मामले में सीधा बलात्कार का मुद्दा नहीं था इसलिए पुलिस ने भी इसे संदेह की दृष्टि से देखा और इसकी पूरी छाप आरोपियों के जमानत के वक्त नजर आयी जहां अदालत ने रेप जैसे जघन्य अपराध होने के बावजूद आरोपियों को जमानत मंजूर कर दी।

खैर पुलिस ने दोनो नामित व्यक्तियों पर बलात्कार के चार्जेज लगाकर जेल भेजा और मुकदमे की कार्यवाही शुरू हुई, मृतका को सरे राह जलाने की घटना के करीब पांच दिन पहले ही आरोपी जमानत पर जेल से बाहर आये थे।

जेल जाने के बाद दुश्मनी ने लिया दूसरा रंग :

जानकारों की माने तो जो शुभम कल तक मृतका और शिवम का मददगार था वह आज खुद बलात्कार के केस में शामिल था और जो शिवम कल तक मृतका के साथ शादी करने के लिए तैयार था अब वह पूरी तरह विरोध में था, यहाँ आपको बताते चले कि शिवम और मृतका के परिवार जो कल तक शादी के खिलाफ थे उसमें से मृतका का परिवार अब शादी के लिए राजी हो चुका था लेकिन शिवम का परिवार शुरू से अंत तक शादी के विरोध में रहा।

जमानत पर बाहर आये और कहानी का दुखद अंत लिखा गया :

शिवम और शुभम दोनो जमानत पर बाहर आने के बाद ही मृतका के किस्से को किसी तरह समाप्त करने की जुगत में थे, और उन्हें मौका भी मिला, पेशी को जाती युवती को जला दिया गया, बाकी का सारा घटनाक्रम आप के सामने गुजरा है सो उसपर कुछ बताने की जरुरत नहीं है।

असल कहानी वो नहीं जो दिखाई दी, दरअसल जान तो जातिवाद ने ली :

पहले प्रेम में अंधेपन तक पागलपन और नशा खत्म होने पर मुकरना यही असल जड़ है इस मामले की।शिवम और मृतका के परिवार जब तक इस मामले को लेकर विरोध में थे तब तक मामला शांत रहा लेकिन जैसे ही शिवम ने शादी के लिए नकारा मृतका का परिवार और खुद मृतका शादी के लिए अड़ गए और प्रेम संबंध को झांसा देकर यौन शोषण और बलात्कार में बदला गया जो यकीनी और कानूनी तौर पर सही भी है, लेकिन जब मामला जातिवाद पर पहुंचा तो शिवम का परिवार और खुद शिवम इस मामले को अंजाम तक पहुंचाने के लिए आमादा हो गए, यहाँ आपको बताया जाना चाहिए कि शिवम ब्राम्हण परिवार से संबंधित है और मृतका विश्वकर्मा (लोहार ) जाती से।

अदालत मामले को संजीदगी से लेती तो यह होता ही नहीं :

इस मामले पर अगर पुलिस की विवेचना और खोजबीन के बाद किसी से चूक हुई है तो वह है न्यायालय जिसने इतने संगीन आरोपो के बाद आरोपियों को जमानत दी, जबकि अदालत को कार्यवाही के दौरान जातीय संघर्ष जैसी समस्या के बारे में अंदाजा जरूर हुआ होगा।

बाकी आरोपियों को तो बस मौके की तलाश थी, इन्हें मौका मिला और यह जघन्य कृत्य को किया गया। सजा तो न्यायालय तय ही करेगा लेकिन वही न्यायालय अपने जमीर पर लगे दागों को कैसे साफ कर पायेगा? 

नोट: मामला कुछ भी रहा हो भले ही वह प्रेम प्रसंग क्यों न रहा हो, अगर आप इस मामले को आगे बढ़ा रहे थे तो नैतिक और सामाजिक और साथ मे कानूनी आधार पर विवाह को आगे बढ़ाना था। लेकिन फिर भी फर्जी सामाजिक मान्यताओं और झूठी शान के चक्कर मे एक सुखद लक्ष्य को नरक में तब्दील किया गया जिसका अंजाम दोनो हत्यारोपियो को भुगतना ही पड़ेगा। वास्तव में जातिवाद भारत की मूलभूत व्यवस्थाओं को चुनौती देता हुआ विषाणु साबित होगा।

  • डिस्क्लेमर: घटनाक्रम के सभी तथ्य और साक्ष्य समाज में उपलब्ध जानकारियों के आधार पर जुटाए गए है, लेखक किसी भी प्रकार से हत्यारोपियों के प्रति को दया भावना नहीं रखता।