Top Events Of Year 2019
Top Events Of Year 2019|Uday Bulletin
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पुराना साल तो गया लेकिन कुछ यादे जेहन में छोड़ गया, आओ ताजा कर लें ! 

साल 2019 की देश और दुनिया की सबसे बड़ी बातें।

Shivjeet Tiwari

Shivjeet Tiwari

Summary

देखो साहब साल तो आते ही है 365 दिन बाद जाने के लिए, आखिर पराया धन जो ठहरा, कब तक उसका दुख मनाओगे, नए साल में मस्त रहो, लेकिन 2019 की कुछ पुरानी खट्टी-मीठी यादे है जो भुलाए नही भूलेंगी, तो आइए कुछ सरसरी निगाह डाले ही लेते है।

मोदी का नशा देश पर कायम रहा :

जनाब बात ईवीएम हैक होने की हो या फिर मोदी के दोबारा प्रधानमंत्री बनने की, एक ही बात है। विपक्षी इसे हैक हूक करना बताते रहै और नरेंद्र दामोदर दास मोदी जनता के दिलो में अपना घर बनाकर दोबारा प्रधानमंत्री बन बैठे।

कड़ी निंदा के बाद असल निंदा :

भारत मे जितना रोचक मोदी का दोबारा प्रधानमंत्री बनना नहीं रहा उतना तो अमित शाह का गृहमंत्री बनना साबित हुआ। पीछे पांच वर्ष में भारत ने पाकिस्तानियों की कड़ी निंदा का स्वाद चखा उसके बाद आया अमित शाह का दौर इससे मिलता-जुलता एक फ़िल्म का डायलॉग है " मैं जो कहता हूँ वो करता हूँ, और जो नहीं कहता डेफिनेटली करता हूँ"

केसर का मामला :

केसर से याद आया केसर तो कश्मीर में होती होती है और कश्मीर कुछ दिनों पहले तक जितना भारत का हुआ करता था उतना ही पाकिस्तान अपना दावा ठोका करता था। हालांकि आम बोलचाल की भाषा मे मोटा भाई यानी कि अमित शाह ने अपनी आदतन कश्मीर को एक झटके में ऐसी लपेट लगाई की पाकिस्तान सोता ही रह गया। कुलमिलाकर पाकिस्तान को अंधेरे में रखकर बवाल कायम किया गया और कश्मीर के तमाम उटपटांग नियमों और धाराओं को हटाकर पूरी तरह से भारतीय गणतंत्र में शामिल किया। इस घटना को इतिहास में लंबे समय तक याद रखा जाएगा।

राम मन्दिर फैसला :

लगभग एक सदी से मंदिर और मस्जिद के मालिकाना हक वाला मामला सुप्रीम कोर्ट में काफी लंबे समय से पेंडिंग पड़ा हुआ था जिसको पांच जजों की पीठ ने बिना किसी अड़चन के फैसला सुनाया और सारे देश मे न्याय की एक नजीर पेश की गई। हालाँकि इस मामले पर कुछ पक्षो और संगठनों द्वारा पुनर्विचार याचिका भी दायर की गई लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने बिना देखे उसे खारिज भी किया और फैसले को बरकरार रखने का आदेश दिया। ये फैसला 2019 को इतिहास में जिंदा रखेगा।

तीन तलाक कानून :

जुलाई के महीने में मोदी सरकार ने मुस्लिम महिलाओं को मानसिक, शारिरिक, और आर्थिक प्रताड़ना से बचाने के लिए तीन तलाक बिल को कानून बनाकर पेश किया और पास भी हुआ। मुस्लिम महिलाओं को बर्बरता पूर्वक तलाक देने की प्रवत्ति को न सिर्फ आपराधिक घोषित किया बल्कि इसे दंडयुक्त भी बनाया गया ताकि महिलाओं के अधिकार जीवित रहे।साल 2019 का ये फैसला भी इतिहास के गर्भ में लंबे समय तक याद रखा जाएगा।

बैंकों का विलय :

भारत मे खस्ताहालत हो चुके बैंकों को मोदी सरकार ने ठीक करने के लिए अन्य मजबूत बैंकों के साथ विलय की घोषणा की और देना और विजया जैसे बैंकों को मिलाकर एक किया गया इसके साथ ही आगे घोषणाएं हुई कि ओरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्स और यूनाइटेड बैंक, का विलय पंजाब नेशनल बैंक में किया जाएगा। इसके साथ ही यूनियन बैंक, कारपोरेशन बैंक, और आंध्रा बैंक के साथ विलय प्रस्तावित रहेगा, इसके साथ ही इलाहाबाद बैंक का विलय इंडियन बैंक के साथ होना बताया गया।हालाँकि इन बैंकों का विलय इनके विकाश में कितना मददगार साबित होगा इस का नजारा बाद में ही पता चलेगा।

भारत की नही लेकिन, कुछ जुड़ते मामले बगदादी निबटाये गए :

आखिर 2019 का साल आतंक का अंत लेकर आया अक्टूबर 2019 का माह बगदादी के लिए काल बन गया और अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 29 अक्टूबर को व्हाइट हाउस के हवाले से कहा कि अबू बकर अल बगदादी को इंसाफ के दायरे में लाकर मानवता खत्म करने की कोशिश में बगदादी मारा गया। गौरतलब हो बगदादी लंबे समय से दुनिया के लिए सरदर्द बना हुआ था जिसे नेवी सील कमांडो ( अमेरिका) ने सुरंग में घुसकर घेर लिया जहाँ बगदादी ने खुद को आत्मघाती विस्फोट में उड़ा लिया। जिसमें बगदादी के कुछ गुर्गे और बच्चे शामिल थे। बगदादी की बीबियों को अमेरिकी कमांडोज ने गोलियों से खत्म कर दिया था।

हैदराबाद दुष्कर्म कांड:

ये 2019 का एक दर्दनाक पहलू है कि इस वर्ष में भी महिलाओ और बच्चियों के ऊपर होते बलात्कारों में कोई कमी नही आई और साल के आखिरी वक्त में एक ऐसी घटना हुई जिसको लेकर पूरा देश गुस्से में भर गया। 26 नवंबर के दिन हैदराबाद की वेटनरी डॉक्टर(उम्र लगभग 26 वर्ष ) के साथ मदद करने के बहाने दुष्कर्म किया गया और जिंदा जलाया गया हालाँकि आरोपियों की पहचान होने पर पुलिस ने न सिर्फ उन्हें गिरफ्तार किया बल्कि भागने की कोशिश करने पर पुलिस की गोलियों से मारे गए हालाँकि ये किसी कहानी का अंत नही था। उसके अगले ही पल भारत के प्रत्येक कोने पर ऐसी ही बालात्कार की घटनाओं को अंजाम दिया जा रहा था।

एनआरसी और कैब:

कैब तो बाद में सीएए बना और पूरे देश मे विरोध की नई परिपाटी चली। जगह-जगह पर उग्र आंदोलन हुए और देश मे पुलिस समेत आम पब्लिक पर गोलिया बरसाई गयी। फिर चाहे वह बंगाल हो या दिल्ली का जामिया। सरकार के ऊपर मुस्लिमों को देश से बाहर करने की अफवाह ने कई प्रदेशों में अभी तक धारा 144 लगा रखी है।

ये कुछ मामले थे जिनपर हमने रोशनी डालने का प्रयास किया है, हालाँकि नया साल भी कुछ ज्यादा नहीं बदला केवल 19-20 का फर्क लेकर आया है उम्मीद है नया साल भारत और विश्व के लिए कल्याणकारी साबित होगा।

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उदय बुलेटिन
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