राजा मान सिंह एनकाउंटर: पुलिस दोषी करार लेकिन सफेदपोशों का क्या? क्या उन्हें बचाया नहीं गया

राजा मान सिंह के एनकाउंटर में कांग्रेस की भूमिका को सबसे ज्यादा जोड़ा गया था लेकिन समय बीतते-बीतते, कोर्ट की नजर में भी सब धूमिल हो गया और इस केस का ठीकरा राजस्थान पुलिस के ऊपर फोड़ दिया गया।
राजा मान सिंह एनकाउंटर: पुलिस दोषी करार लेकिन सफेदपोशों का क्या? क्या उन्हें बचाया नहीं गया
Raja Man Singh fake Encounter caseGoogle Image

जगह राजस्थान और वक्त 21 फरवरी 1985 का, राजा मान सिंह अपने समर्थकों के साथ एक बहु चर्चित कांड में खुद को सरेंडर करने जा रहे थे और भरतपुर जिले में डिप्टी एसपी भाटी और उनके पुलिस बल से कथित तौर पर गोली बारी हुई और पुलिस एनकाउंटर में राजा सिंह मारे गए। लेकिन इस घटना को कोई भी व्यक्ति गले से नीचे नहीं उतार पाया लोगों के आरोप थे कि राजा मान सिंह राजनैतिक साजिश का शिकार हो गए और इसके बाद से ही इस मामले को लेकर राज्य में जांच को लेकर सन्देह जताये जाने लगे। राजा मान सिंह की पुत्री ने इस मामले को लेकर एक बेहद लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी और नतीजन इस मामले में करीब 35 साल बाद फैसला आया। जिस फैसले में 11 पुलिसकर्मियों को दोषी करार दिया गया और यह भी साबित हुआ कि यह दरअसल हत्या ही थी कोई एनकाउंटर नहीं था लेकिन असल सवाल उठता है कि आखिर क्यों ? इसके पीछे क्या राज थे ?

मुख्यमंत्री का हेलीकॉप्टर और कार की टक्कर:

अब आप कहेंगे कि हेलीकॉप्टर और कार की टक्कर कैसे सम्भव है लेकिन जी जनाब आप बेहद करीब से सच को जान रहे हैं लेकिन इस सच को जानने से पहले आपको राजा मान सिंह को जानना चाहिए। राजा मान सिंह विदेशो में पढ़े, विदेश से भारत लौटने के बाद उनका मन राजशाही का हुआ लेकिन अब राजशाही तो बची नहीं थी तो इसका सीधा सा तातपर्य था बिना तिलक का राजा बनना और यह सब संभव था चुनाव लड़कर। शायद राजा मान सिंह ने ऐसा ही कुछ किया। नतीजन राजा मान सिंह लगातार चुनाव लड़ते रहे और जीतते रहे, प्रशिद्धि का आलम यह था कि मान सिंह राजस्थान की डींग विधानसभा से 7 बार चुनाव लड़े और जीते। सनद रहे कि राजा ने ये सब चुनाव किसी पार्टी के बैनर तले नहीं लड़े बल्कि ये सब निर्दलीय थे।

साल 1985 का वक्त कांग्रेस इस विधानसभा में किसी भी प्रकार से पार नही पा रही थी क्योंकि राजा मान सिंह के कद के सामने सभी छोटे पड़ रहे थे। कांग्रेस ने राजा मान सिंह के सामने किसी दूसरे राजा को उतारना बेहतर समझा और आखिर में कांग्रेस की तलाश आजाद भारत के जिले के एक राजा पूर्व आईएएस के ऊपर पूरी हुई। उन्हें राजा मान सिंह के विरोध में खड़ा किया गया और उसके बाद शुरू हुआ राजनीति का गंदा खेल।कांग्रेस समर्थकों ने राजा मानसिंह के बैनर पोस्टर फाड़ दिए ..... और राजा मानसिंह को नीचा दिखाने की कोशिश ऊंचे कांग्रेसी नेताओं के द्वारा करायी गयी।

चूंकि मामला पार्टी की साख पर केंद्रित था इसलिए कांग्रेस ने इस चुनाव में अपनी पूरी ताकत झोंक दी और चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी को जिताने के लिए तत्कालीन राजस्थान मुख्यमंत्री शिवचरण माथुर को डींग में प्रचार करने के लिए भेजा। इधर राजा मान सिंह अपने अपमान की आग में जल रहे थे उन्होंने इस बेइज्जती के लिए कांग्रेस को सबक सिखाने की सोची और रैली स्थल में खड़े हुए मुख्यमंत्री के हेलीकॉप्टर को अपनी कार से टक्कर मार दी और राजा यहीं नहीं रुके बल्कि कार को भाषण देने वाले मंच की तरफ भी दौड़ाया और गाड़ी से मंच को भी नुकसान पहुँचाया।

एफआईआर और पुलिस की तलाश:

चूंकि मामला मुख्यमंत्री का था भले ही राजा सिंह उस वक्त तक अपने क्षेत्र में खासा दबदबा रखते थे लेकिन मुख्यमंत्री के ऊपर इतना बड़ा मामला आखिर अधिकारियों को भी अपने नमक का फर्ज अदा करना था।सो वैसे ही हुआ, आनन फानन में एफआईआर दर्ज हुई और फैसला हुआ कि बहुत लंबे से नापना है। होते-होते खबर राजा सिंह के पास पहुंची मानसिंह ने खुद को पुलिस के हवाले देने का विचार किया और वह पुलिस के पास जा ही रहे थे कि उन्हें भरतपुर में घेरकर पुलिसकर्मियों के द्वारा गोली मारी गयी। हालाँकि इस मामले में कोर्ट ने इस एनकाउंटर को न सिर्फ गलत करार दिया बल्कि इसे हत्या भी कहा।

साथ ही इस मामले में एक नई बहस छिड़ गई कि आखिर जिस दिन हेलीकॉप्टर विवाद हुआ उसके अगले दिन ही राजा सिंह की हत्या क्यों हुई? क्या इसे राजनीतिक हत्या या साजिस नहीं माना जाना चाहिए ? राजा सिंह के साथी और समर्थक खुले आम कहने से नही चूकते की यह सब उस वक्त की कांग्रेस पार्टी और बड़े नेताओं के इशारे पर करायी गयी हत्या थी जो अब तक सत्ता की मलाई लूट रहे थे। आखिर पुलिस दोषी हुई लेकिन फिर मुख्य अपराधी कैसे बच गए सनद रहे कि इस मामले में सीबीआई ने भी जांच की थी।

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उदय बुलेटिन
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