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भारत के प्रधानमंत्री का बयान काफी कुछ कह जाता है, पूरा विश्व मामले को लेकर आशंकित है

पीएम मोदी ने कहा है कि भारत शांति चाहता है, लेकिन वह उकसाने पर हर हाल में मुंहतोड़ जवाब देने में सक्षम है

Shivjeet Tiwari

Shivjeet Tiwari

खुले माहौल में जनता के सामने चीन के लिए भारत के पीएम का यह कहना कि हम शांति चाहते जरूर है लेकिन अगर सवाल देश की अखंडता और सुरक्षा का है तो हम सक्षम है, सीधे शब्दों में यह चीन के लिए ऐसी चेतावनी है जिसका असर बीजिंग पर दिखने लगा है।

मीटिंग के पहले उठा भारत चीन मुद्दा:

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बीते दिन देश के सभी प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों के साथ कोरोना जैसी महामारी को लेकर विचार विमर्श करने के लिए वर्चुअली मुखातिब हुए उससे पहले ही प्रधानमंत्री ने पूर्वी लद्दाख में शहीद हुए भारतीय सैनकों की शहादत को याद किया। प्रधानमंत्री यहीं नहीं रुके बल्कि उन्होंने साफ-साफ शब्दों में चीन को चेताया कि अब वह पुराना भारत नहीं है वह अगर शांति चाहता है तो इसका मतलब यह नहीं है कि वह अपने सैनकों की शहादत स्वीकार करेगा।

वहीँ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत चीन मामले के लिए एक सर्वदलीय मीटिंग का आयोजन किया है जो 19 जून को करीब शाम के पांच बजे शुरू होगी।

हमारे देश के जवानों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा:

वहीँ देश के रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने भी देश के जवानों की शहादत को नमन करते हुए अपने विचार साझा किये।

क्या हो सकते है मायने?

अगर प्रधानमंत्री मोदी के ट्रैक रिकार्ड को खंगाला जाए तो इन मामलों की सबसे अच्छी और सच्ची परख चीन का जिगरी दोस्त पाकिस्तान भलीभांति जानता है। क्योंकि अगर आंकड़ों को देखा जाए तो जब भी प्रधानमंत्री ने यह कहा है की जवानों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा तो इसका मतलब यह निकलता है कि भारत अपनी तरफ से पूरी तैयारी में है, हालांकि यह भी सच है कि सामने चीन जैसा देश होने की वजह से भारत सर्जिकल स्ट्राइक जैसी घटना को अंजाम तो नहीं देगा लेकिन यह भी सत्य है अगर युद्ध जैसी स्थिति हुई तो भारत बिना किसी दबाव के चीन को मुंहतोड़ जवाब देगा। शायद इसी ट्रैक रिकार्ड को देखकर चीन के बड़े मंत्रियों द्वारा मामले को शांति से निबटाने की बात कही जा रही है। लेकिन चीन के ट्रैक रिकार्ड को देखा जाए तो इसका दोगलेपन पूरी दुनिया जानती है।\

वहीँ इस मामले पर अमेरिकी खुफिया एजेंसियों और ताइवान ने सूचना उपलब्ध कराई है कि इस झड़प में जहा भारत के 20 जवान शहीद हुए हैं वहीँ चीन को करीब 43 सैनिकों को जान से हाँथ धोना पड़ा है। हालांकि इस मामले पर अभी तक चीनी सेना के द्वारा कोई खुलासा नहीं किया गया है।

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उदय बुलेटिन
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