Allahabad University Professor Connection With Tablighi Jamaat
Allahabad University Professor Connection With Tablighi Jamaat|Uday Bulletin 
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आखिर इस समुदाय को हो क्या गया है, मस्जिदों से लोग अभी भी निकल रहे है 

बीमारी को दूर करने के लिए दुनिया जद्दोजहद कर रही है वही भारत मे एक समुदाय अभी भी बीमारी को छुपाने के लिए जगहों की तलाश कर रहा है पुलिस और स्वास्थ्य विभाग इनकी धर पकड़ के लिए भागमभाग कर रहा है। 

Shivjeet Tiwari

Shivjeet Tiwari

प्रयाग में मिले विदेशी जामाती :

देश मे केंद्र और प्रदेश सरकारों द्वारा कोरोना उन्मूलन के लिए हर संभव प्रयास किये जा रहे है जिसमें लोगों को सामुदायिक जगहों से दूर करने से लेकर अन्य सभी कोशिशों को अंजाम दिया जा रहा है जिससे लोग इस भयानक संक्रमण से बच सके, लेकिन कोरोना संक्रमण से अभी तक अछूते प्रयाग में अचानक उस वक्त हलचल मच गई जब प्रशासन को यह जानकारी मिली कि इलाहाबाद विश्वविद्यालय के प्रोफेसर ने अपने घर मे विदेशी जमातियों को छुपा रखा है। हालाँकि इस जानकारी पर प्रयाग पुलिस सहमत नहीं थी कि कोई पढ़ा लिखा व्यक्ति जो कि इतने बड़े विश्वविद्यालय में राजनीति शास्त्र पढ़ाता हो वह इस तरह का कार्य भी कर सकता है, लेकिन अब इसे धर्मांधता कहिये या मूर्खतापूर्ण कृत्य, प्रोफेसर साहब ने 9 थाईलैंड के जामाती सहित 19 लोगों को अपने घर मे पनाह दे रखी थी, इस पर स्थानीय प्रशासन ने सभी जमातियों सहित अन्य सहयोगियों (कुल मिलाकर 30) लोगों के ऊपर सुसंगत धाराएं लगाकर मुकदमा पंजीकृत कर दिया है और 21 तारीख तक ही सभी लोगों को नैनी जेल में भेजकर क्वारण्टाइन किया गया है।

कमोबेश यही हाल बाँदा का रहा :

दरअसल बाँदा के रहुनिया मुहल्ले के पास कटरा क्रासिंग के आगे एक मस्जिद है जिसमें पिछली देर शाम जामाती लोगों के छिपे होने की खबर मिली। खबर मिलते ही प्रशासन के हाँथ पैर फूल गए और भारी दल बल के साथ 16 लोगों के साथ करीब 19 लोगों को हिरासत में लिए गया। ये लोग लॉक डाउन की घोषणा के बाद ही मस्जिद में छुपे हुए थे ताकि प्रशासन को इनकी भनक न लग पाये लेकिन तभी आस-पास के लोगों को इनपर संदेह हुआ और जानकरी पुलिस तक भेजी गई।

क्या हो सकता है अंजाम ?

ये वक्त कहीं भी छुपकर बैठने और संक्रमण को छिपाने का नही है यहां सबसे पहले एक बात किलियर करनी पड़ेगी कि अगर आपके अंदर संक्रमण छुपा बैठा है तो आपको अपनी जान की परवाह के साथ अपने समाज की चिंता करनी होगी। अगर आप कहीं छुप रहे है तो न सिर्फ आप अपने साथ बल्कि अपने परिवार के साथ, अपने समाज के साथ गद्दारी पर उतारू है।यकीन मानिए आप किसी आत्मघाती से कम साबित नही होंगे। कोरोना का किसी जाति समुदाय या धर्म से कोई लेना देना नहीं है वह सिर्फ और सिर्फ कैरियर बनकर लोगों की लाशें बिछाना जानता है।

अनपढ़ तो अनपढ़ पढ़े लिखे भी जाहिलपन पर उतारू :

अब आप प्रयाग का ही संदर्भ ले लीजिए, एक विश्वविद्यालय का प्रोफेसर जो छात्रों को राजनीति विज्ञान पढ़ाता है उसके द्वारा की गई यह हरकत समाज मे एक बहुत बड़ा सवाल पैदा करती है कि क्या किसी लिए मानवता से ज्यादा भी बड़ी कोई चीज हो सकती है? जो एक शिक्षक को उसके समाज सुधारने वाले वचन से विमुख कर दे, इसका सीधा-सीधा अर्थ यह लगाया जा सकता है कि प्रोफेसर साहब अपने कर्तव्यों से बढ़कर दीनी भाइयों के लिए समर्पित हो गए।

डिस्क्लेमर : लेख में लेखक ने यथावश्यक समाज की दशा को बताने का प्रयास किया है, ये लेख लेखक के निजी विचारों पर आधारित है, हमारा उद्देश्य किसी जाति, धर्म, समुदाय का विरोध करना नही है।

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