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 रणदीप सुरजेवाला
रणदीप सुरजेवाला|IANS
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“पराक्रम पर्व” पर कांग्रेस की आलोचनाओं में कितना दम ?

कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने कहा मोदी ने वोट के लिए सैनिकों की शहादत का इस्तेमाल किया , हमने अनेक सर्जिकल स्ट्राइक किए हैं पर देश की सुरक्षा को हमेसा ध्यान में रखा। 

AKANKSHA MISHRA

AKANKSHA MISHRA

नई दिल्ली : कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रणदीप सुरजेवाला ने प्रधानमंत्री पर आरोप लगाया है की प्रधानमंत्री मोदी भारतीय सैनिको की शहादत का इस्तेमाल अपना वोट बैंक बढ़ाने के लिए करते हैं। शुक्रवार को मोदी सरकार द्वारा सर्जिकल स्ट्राइक (2016 ) की दूसरी बरसी पर 'पराक्रम पर्व' मनाये जाने के बाद उन्होंने ये आलोचना कि है। कांग्रेस का कहना है की 2016 की कार्रवाई ऐसी नहीं है कि यह पहली बार हुई है, बल्कि अतीत में भी इस तरह की कई सर्जिकल स्ट्राइक की गई है।

आइये जानते है कब कब हुई है सर्जिकल स्ट्राइक

मई 1998 - सयुंक्त राष्ट्र की वार्षिक किताब में दर्ज यह दिन हम भारतीयों के लिए किसी बड़े त्यौहार से कम महत्व नहीं रखता। साल 1998 ने पाकिस्तान सेना ने सयुंक्त राष्ट्र में भारत द्वारा की गई सर्जिकल स्ट्राइक का विरोध किया था और 321 पेज की शिकायत दर्ज कराई थी। जिसके मुताबिक कुछ सैनिक लाइन ऑफ कंट्रोल के 600 मीटर अंदर घुस गए थे और बंदाला सेरी में 22 आतंकियों को मौत के घाट उतार दिया था। पाकिस्तान के चश्मदीदों की माने तो करीब एक दर्जन सैनिकों ने आधी रात में इस ऑपरेशन को अंजाम दिया था। इस दौरान सेना ने वहा कुछ पर्चे भी छोड़े थे जिसपर लिखा था "बुरे काम का बुरा नतीजा", "एक आंख के बदले 10 आँख" ,"बदला ब्रिगेड ", "एक दांत के बदले पूरा जबड़ा " हालांकि नई दिल्ली ने इसकी जिम्मेवारी नहीं ले थी। यह सर्जिकल स्ट्राइक अटल बिहारी वाजपयी के कार्यकाल के दौरान कि गई थी।

21 जनवरी, 2000 (नीलम नदी के पार नडाला इन्क्लेव)- कारगिल युद्ध के 6 महीने बाद 21 जनवरी को नीलम नदी के नडाला इन्क्लेव में पोस्ट पर रेड के दौरान ७ पाकिस्तानी सैनिकों को पकड़ा गया था। बाद में इन सैनिको को मार दिया गया था और उनके शवों को पाकिस्तान वापस भेज दिया गया था। भारतीय सेना का कहना है की भारत की ओर से इस कार्रवाई को कैप्टन सौरभ कालिया और ४ जाट रेजिमेंट के ५ जवानों की शहादत के बाद किया गया था । यह सर्जिकल स्ट्राइक अटल बिहारी वाजपयी के कार्यकाल के दौरान कि गई थी।

18 सितंबर, 2003 (पुंछ का बरोह सेक्टर) - पाकिस्तान द्वारा सयुंक्त राष्ट्र में दर्ज शिकायत के अनुसार यह दावा किया गया की भारतीय सैनिकों ने १८ सितम्बर 2013 को बरोह पोस्ट में हमला किया था जिसमें 5 जवान समेत पाकिस्तानी जेसीओ मारे गए थे। यह सर्जिकल स्ट्राइक अटल बिहारी वाजपयी के कार्यकाल के दौरान कि गई थी।

19 जून, 2008 (पुंछ का भट्टल सेक्टर)- 2008 में भारतीय सेना द्वारा दो बार सर्जिकल स्ट्राइक किया गया। इस साल से ही लाइन ऑफ़ कंट्रोल पर सेनाओं के बीच टकराव बढ़ने लगा। पाकिस्तान द्वारा की गई शिकायत की माने तो 19 जून को की गई कार्रवाई में 4 पाकिस्तानी जवान मारे गए थे। यह सर्जिकल स्ट्राइक मनमोहन सिंह के कार्यकाल के दौरान कि गई थी।

और कब कब हुआ सर्जिकल स्ट्राइक

  • 30 अगस्त 2011 (केल की घाटी में नीलम नदी के पार शारदा सेक्ट)- यह सर्जिकल स्ट्राइक मनमोहन सिंह के कार्यकाल के दौरान कि गई थी।
  • 6 जनवरी, 2013 (सावन पात्रा चेकपोस्ट)- यह सर्जिकल स्ट्राइक मनमोहन सिंह के कार्यकाल के दौरान कि गई थी।
  • 27-28 जुलाई, 2013 (नाजापीर सेक्टर)- यह सर्जिकल स्ट्राइक मनमोहन सिंह के कार्यकाल के दौरान कि गई थी।
  • 23 दिसंबर, 2013 को सर्जिकल स्ट्राइक करने की बात का जिक्र) - यह सर्जिकल स्ट्राइक मनमोहन सिंह के कार्यकाल के दौरान कि गई थी।
  • 28-29 सितंबर, 2016 (डीजीएमओ का बयान) - यह सर्जिकल स्ट्राइक नरेंद्र मोदी के कार्यकाल के दौरान कि गई थी।

कांग्रेस का कहना है कि 2016 की कार्रवाई ऐसी नहीं है कि यह पहली बार हुई है, बल्कि अतीत में भी इस तरह की कई सर्जिकल स्ट्राइक की गई है। उन्होंने केंद्र सरकार पर राष्ट्र की सुरक्षा से समझौता करने का आरोप लगाया और कहा कि इस सरकार के 52 महीने के शासन के दौरान सिर्फ जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद में 414 सुरक्षाकर्मियों और 259 गैर-सैनिकों की जानें गईं।

उन्होंने कहा कि मोदी यह स्वीकार करें कि वह सीमा की सुरक्षा करने में विफल रहे हैं, क्योंकि मई 2014 से लेकर अबतक पाकिस्तान की ओर से संघर्षविराम का उल्लंघन करने की घटनाएं 500 फीसदी बढ़ गई हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने रक्षा बजट को घटाकर सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 1.58 फीसदी करके सैन्य बल के साथ सौतेला व्यवहार किया गया, क्योंकि रक्षा बजट 1962 के बाद सबसे कम है।