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चिंतमनी मालवीय और प्रधानमंत्री मोदी 
चिंतमनी मालवीय और प्रधानमंत्री मोदी |Source- Twitter
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पटाखे पर बीजेपी सांसद को ‘नामंजूर’ सुप्रीम कोर्ट का फैसला 

सुप्रीम कोर्ट द्वारा पटाखे जलाने पर दिए आदेश को बीजेपी सांसद ने परंपरा के अनुसार गलत बताया है, उहोंने कहा - मैं 10 बजे के बाद ही पटाखे जलाऊंगा।

AKANKSHA MISHRA

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नई दिल्ली : इस साल दिवाली के मौके पर पटाखे जलाने पर रोक नहीं रहेगी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसमें एक शर्त रखी है। सुप्रीम कोर्ट ने पटाखों पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगाने से इनकार करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार को गए अपने फैसले में को सभी धार्मिक त्योहारों के दौरान पर्यावरण को कम नुकसान पहुंचाने वाले पटाखों का प्रयोग करने की इजाजत दी, जिससे कम उत्सर्जन हो और ध्वनि प्रदूषण का स्तर कम बना रहे। तीन नवजातों की ओर से दाखिल याचिका पर न्यायमूर्ति ए. के. सीकरी और न्यायमूर्ति अशोक भूषण की पीठ ने अपने फैसले में निर्दिष्ट किया कि दिवाली पर केवल रात आठ से 10 बजे के बीच ही पटाखे चलाए जा सकते हैं।

लेकिन बीजेपी के सांसद चिंतामणि मालवीय को यह फैसला कुछ खास पसंद नहीं आया। उन्होंने इस फैसले के विरोध में ट्विटर पर अपनी प्रतिकिर्या व्यक्त कि उन्होंने कहा "में अपनी दीवाली अपने परम्परागत तरीके से मनाऊंगा और रात में लक्ष्मी पूजन के बाद 10 बजे के बाद ही पटाखे जलाऊंगा । हमारी हिन्दू परंपरा में किसी की भी दखलंदाजी में हरगिज बर्दाश्त नही कर सकता । मेरी धार्मिक परम्पराओं के लिए यदि मुझे जेल भी जाना पड़े तो में खुशी खुशी जेल भी जाऊंगा" ।

आपको बता दें सुप्रीम कोर्ट के अनुसार दिवाली और अन्य सभी धार्मिक त्योहारों के दौरान पटाखे जलाने के लिए पूरे देश में समय सीमा (8 10 बजे तक) लागू की जाएगी। इस आदेश का पालन करने के लिए हर इलाके पर SHO की निगरानी होगी और अगर आदेश का पालन नहीं हुआ तो SHO को निजी टूर पर कोर्ट की अवमानना करने का दोषी माना जायेगा।

साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि "अगर कोई ई-कॉमर्स कंपनी ऑनलाइन पटाखे बेचती हुई पाई गई तो इसे अदालत के फैसले की अवमानना समझा जाएगा और अदालत उसके ऊपर आर्थिक दंड भी लगा सकती है।" पीठ ने पेसो से यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि दिवाली, अन्य धार्मिक त्योहारों के साथ-साथ शादी समारोह के दौरान केवल अनुमति प्राप्त रसायन वाले ही पटाखों की बिक्री हो और उन्हें जलाया जाए। अदालत ने केंद्र, राज्य सरकारों के साथ साथ शिक्षा संस्थानों से पटाखों के हानिकारक प्रभावों के बारे में जन जागरूकता अभियान चलाने को भी कहा है।