लव जिहाद: मेरठ कांड का असल सच किसने खोला और किसने दबाने की कोशिश की
बड़ा शातिर था मेरठ कांड का हत्यारा शमशाद, हिन्दू बनकर झूठी शादी की, राज खुलने के बाद पत्नी और बेटी की हत्या भी कर दी, लेकिन मृतक की सहेली ने हत्यारे का हर राज खोल दिया।
लव जिहाद: मेरठ कांड का असल सच किसने खोला और किसने दबाने की कोशिश की
Meerut love jihad Priya and Kashish Murder caseUday Bulletin

वो कहते है न कि कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती, ये कहानियों में सुना था लेकिन ये असल में भी हो जाता है। इसका साक्षी है मेरठ का डबल मर्डर जिसमें एक धार्मिक मतान्ध ने धोखा देकर युवती की मजबूरियों का फायदा उठाया और उसके बाद 10 वर्षीय बच्ची के सामने माँ की गला दबाकर हत्या कर दी बाद में सुबूत मिटाने के लिए नासमझ बच्ची को भी तकिए से मुँह ढककर किस्सा खत्म करने की कोशिश की।

लेकिन इसके साथ एक और कहावत है कि अपराध कितने भी सलीके से किया जाए कहीं न कहीं वह अपराध सच की बाट जोहता है और इस मामले में भी कुछ ऐसा ही हुआ। एक सहेली जो मृतका की बेहद अजीज थी और मृतका की बेटी को जी जान से ज्यादा चाहती थी उसने इस मामले में पुलिस के आगे रहकर मामले की परतें खोल दी।

हालाँकि ये मामला उतना सरल नहीं था जितना दिख रहा था ये एक लड़ाई थी जिसमें धैर्य के साथ-साथ सूझबूझ भी चाहिए थी। आखिर उसे सिस्टम से लड़ना था और आखिर में चंचल नाम की लड़की ने अपने बुलंद इरादों से न सिर्फ कातिल को खोजा बल्कि उसे सलाखों के पीछे पहुँचाया। हालाँकि इससे हत्या का अपराध तो कम नहीं होता लेकिन खुलासे के साथ-साथ उसे लगता है कि इससे दोनों मृतको की आत्मा को सुकून मिला होगा।

इस मामले में कुछ लोगों ने सहानुभूति भी दर्शायी और कुछ ने मृतका के ऊपर ही लांछन लगाए लेकिन हमें लगा कि इस मामले की पड़ताल की जानी चाहिए और लोगों को इस मामले का असली सच जानने का अवसर मिले। इसके लिए हमने उस व्यक्ति की तलाश करनी शुरू की जो इस मामले पर पूरी जानकारी दे सके और हमारी तलास इस मामले की मुख्य और चश्मदीद पैरोकार चंचल चौधरी नाम की लड़की पर पूरी हुई।

मृतक प्रिया की दोस्त चंचल
मृतक प्रिया की दोस्त चंचलउदय बुलेटिन

ज्ञात हो चंचल ही वह लड़की है जिसने इस मामले में जबरदस्त खोज की और मामले की तह तक गयी। इस दौरान चंचल को पुलिसिया धमकियों और सामाजिक विरोधों का सामना करना पड़ा। हमने अपने स्रोतों के माध्यम से चंचल जी का नंबर प्राप्त किया और उनसे संपर्क करने की कोशिश की, सबसे पहले हमने उनसे इस बारे में जानकारी लेने के लिए अनुमति ली, क्योंकि हमें पता था कि उन्होंने एक लंबा वक्त तनाव में बिताया है। हम उनकी निजता को किसी भी प्रकार से भंग नहीं करना चाहते थे। उदय बुलेटिन से प्रभावित होकर चंचल जी ने हमें टेलीफोनिक इंटरव्यू दिया और यह इंटरव्यू लगभग 1 घंटा 14 मिनट के आसपास तक चला जिसमे चंचल कई बार असहज हुई। चंचल अपने भावों को भी नहीं रोक पायी शायद यही कारण है कि हम उस इंटरव्यू को यहां नहीं सुनवा सकते लेकिन हम उनके साथ की गयी बातचीत के हर अंश को यहां रखने का प्रयास करेंगें।

सबसे पहले बताते हैं कौन है चंचल चौधरी ?

गाजियाबाद के मोदीनगर निवासी बेहद आम लड़की जिसका एक हँसता खेलता परिवार है मृतका प्रिया से उसकी मित्रता ऐसे हुई कि प्रिया चंचल के मकान में किराए पर रहने आयी थी। पहले पति से शादी मुकम्मल न होने के बाद प्रिया ने अपनी आजीविका और बच्ची की परवरिश के लिए एक ब्यूटी पार्लर में काम करना शुरू किया और वहीँ से चंचल के साथ प्रिय के बेहद घरेलू संबंध बन गए। चूंकि प्रिया की बच्ची वंशिका जिसे बाद में कशिश नाम से भी जाना गया वो चंचल के बेहद करीब थी, चूंकि प्रिया उस वक्त आजीविका और बच्ची के भविष्य के लिए ब्यूटी पार्लर में काम करती थी इस दौरान अंशिका उर्फ कशिश सबसे ज्यादा चंचल के साथ रही। प्रिया और वंशिका का चंचल के साथ बेहद पारिवारिक माहौल रहा इसके साथ चंचल और प्रिया के बीच घर की बहनों जैसा स्नेह बनता गया।

इस तस्वीर में प्रिया और कशिश के साथ चंचल है ये तस्वीर तब की है जब प्रिया चंचल के घर पर किराये से रहती थी।
इस तस्वीर में प्रिया और कशिश के साथ चंचल है ये तस्वीर तब की है जब प्रिया चंचल के घर पर किराये से रहती थी। उदय बुलेटिन

भविष्य और कमजोरी :

ये जो समाज है न, उसमे कुछ अनजाने डर अनायास ही देखने को मिल जाते हैं कुछ ऐसा ही डर प्रिया के मन मे घर करता चला जा रहा था। उसकी वजह थी अंशिका और उसका भविष्य आखिर बच्ची की परवरिश में कोई समस्या तो नही आएगी? चूंकि तलाकशुदा हूँ और उसके बाद बाहर जाकर काम करना! ये कितना सही रहेगा ? लेकिन बिना काम किये भी गुजारा नहीं हो सकता ये प्रिया के जीवन की सबसे बड़ी समस्या थी। जिसको लेकर प्रिया लगभग हर वक्त परेशान रहती हालांकि चंचल हर बार प्रिया को इस दुविधा से बाहर निकालने की कोशिश करती लेकिन जब तकलीफ भविष्य की हो तो तकलीफ का कांटा कभी खत्म नहीं होता। दरअसल प्रिया को इस वक्त ऐसे अभिभावक की आवश्यकता थी जो इस माहौल में अंशिका की परवरिश में अपनी भूमिका निभा सके लेकिन चूंकि वह पिछली शादी में ही कुछ ऐसे धोखे खा चुकी थी जिनको लेकर उसके अंदर का डर दोगुना हो जाता, ये उहापोह चल ही रही थी तभी वो होने वाला था जिसके बारे में सब कुछ प्लान था शुरुआत से लेकर अंत तक। एक पक्का खिलाड़ी जिसने अपनी पहचान छुपाई, नाम छुपाया, इतिहास छुपाया और यहां तक कि धर्म भी छिपाया। अमित गुर्जर बना शमशाद सोशल मीडिया फेसबुक पर घात लगाए बैठा था। मानो उसने सब कुछ तैयार कर रखा था, हर दिन, हर पल का घटनाक्रम।

सब जाल था प्रिया अनजाने में उलझती चली गयी:

भले ही प्रिया भविष्य की आशंकाओं को लेकर डर रही थी लेकिन चूंकि उसे भविष्य की बड़ी तकलीफ थी सो उसने सोशल मीडिया पर मिले अमित गुर्जर उर्फ शमशाद से मिलना जुलना शुरू किया कर दिया। बातें आगे बढ़ी तो दोनों ने भावी जीवन के बारे में बाते की और प्रिया की केवल एक ही शर्त थी उसकी बच्ची का सुंदर भविष्य जिसमें अच्छी शिक्षा, अच्छा जीवन। शमशाद किसी मंझे हुए खिलाड़ी की तरह हर मामले में अपनी बातें गढ़ता हुआ चला गया, चूंकि इस वक्त तक प्रिया ब्यूटी पार्लर में काम कर रही थी और बच्ची की परवरिश के दौरान एक प्लाट खरीदा ताकि भविष्य में रहने के काम आये प्लाट करीब डेढ़ लाख की कीमत का रहा होगा, शमशाद ने इसी दौरान प्रिया से एक बेहद घिनौना खेल खेला। जिसे उसने शादी का नाम दिया, एक मंदिर में जाकर फर्जी शादी की और मोदीनगर से ले जाकर कांशीराम नामक जगह पर किराये का मकान लेकर रहा और यह किस्सा आगे बढ़ता रहा। इस दौरान प्रिया और शमशाद के बीच कई बार पूजा पाठ को लेकर विवाद उठे असल मामला तब समझ मे आया जब शमशाद के परिजन दोनों के साथ रहने के लिए आने लगे। इसी दौरान प्रिया को यह पता लगा कि असल मे जिसे वह अमित समझ रही थी वह तो शमशाद है लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। प्रिया के पास कोई चारा नही था चूंकि अगर वह इस वक्त इस मामले को खत्म करती तो उसके माथे पर कलंक के दो चार दाग और लगते जिससे उसका समाज मे जीना मुहाल हो जाता। प्रिया की केवल एक ख्वाहिश थी बेटी का भविष्य, जो शायद सुधर जाये। इस दौरान प्रिया ने चंचल को बताया कि शमशाद प्रिया से शरीयत के हिसाब से रहने की बाते करता और बच्ची के पहनावे पर बातें करता है वह वंशिका को सलवार कुर्ता पहनाने की बात करता।

प्रिया और उसकी बेटी को शरीयत के हिसाब से कपडे पहनने को मजबूर करता था शमशाद
प्रिया और उसकी बेटी को शरीयत के हिसाब से कपडे पहनने को मजबूर करता था शमशादउदय बुलेटिन

साथ ही उर्दू भाषा सीखने पर जोर देता, प्रिया शिरडी के साईं बाबा की भक्त थी और शमशाद को इससे चिढ़न होती, यही वजह थी कि प्रिया ने घर मे रखा हुआ मंदिर चंचल के हवाले किया और कहा कि कहीं यह भगवान का निरादर न कर दे जो मुझे सहन नहीं होगा।

नया मकान और ईद के पहले :

वक्त 2019 का जब शमशाद ने भूखराल मेरठ में नया मकान खरीदा था वह प्रिया को लेकर उस मकान में आया अब असल कहानी यहीं से शुरू होती है। इस मकान में आने के बाद से ही प्रिया और शमशाद के बीच तल्खियां आना शुरू हो चुकी थी जहाँ प्रिया खुद के लिए न सोचकर अपनी बच्ची के भविष्य के बारे में सोच रही थी वहीँ शमशाद पता नहीं किस मकसद को पूरा करने के लिए जुटा हुआ था। इस दौरान जब शमशाद की हरकतों से परेशान होकर प्रिया अपनी बात चंचल को बताती तो चंचल और प्रिया दोनों शमशाद से इस मामले में पर सवाल पूंछते लेकिन शमशाद रोकर और गिड़गिड़ाकर माफी मांग लेता। एक बार तो यह मामला पुलिस के पास भी जा पहुँचा लेकिन आखिर में प्रिया ने थक हारकर घर वापस लौटना मुफीद समझा उसके बाद से कोरोना की वजह से भारत मे देशव्यापी लॉक डाउन की घोषणा हो गयी।

शमशाद के साथ प्रिया
शमशाद के साथ प्रिया उदय बुलेटिन

गैरमर्दों का घर मे आना जाना:

प्रिया खुद और अपनी बच्ची के लिए बेहद परेशान थी लेकिन शमशाद के घर मे बाहरी लोगों का आना-जाना लगा रहता था। प्रिया ने चंचल को यह भी बताया कि अब घर मे शमशाद के अलावा उसका भाई भी रहता है। बीते दिनों शमशाद की माँ भी यहाँ आयी थी जिसकी प्रिया ने भरसक सेवा की लेकिन प्रिया को कुछ बातें खटकती थी जिनमें बाहरी लोगों का घर मे लगातार आना-जाना जिससे प्रिया कोरोना संक्रमण के फैलाव को लेकर भी चिंता में थी लेकिन शमशाद तो कुछ और ही सोच कर बैठा था। प्रिया को अनजाने में कुछ शंका पैदा हो रही थी जिसके बारे में वह चचंल को बताती और चंचल उसकी बातों को डीकोड करने की कोशिश करती। लेकिन करीब 21 मार्च को प्रिया ने चंचल को कुछ संदेहास्पद हालातों के बारे में बताया और 28 तारीख की स्याह रात प्रिया और वंशिका के लिए आखिरी हो गया।

शमशाद की माँ के साथ प्रिया
शमशाद की माँ के साथ प्रियाउदय बुलेटिन

28 मार्च का आखिरी दिन:

आखिर कर इस धोखे और फरेब के चक्कर मे फंसी हुई प्रिया के लिए ये दिन आखिरी हुआ। कातिल शमशाद ने 10 वर्षीय बच्ची वंशिका के सामने प्रिया को गला दबाकर मार डाला और वंशिका इस मामले को देखकर ही बेहोश हो गयी। इसके बाद राज खुलने के डर से शमशाद ने अपनी बेटी समान वंशिका उर्फ कशिश को तकिए से दम घोटकर खत्म किया और एक दिन दोनों के शव बैडरूम में अटैच बाथरूम में रखे रहे चूंकि लॉक डाउन की वजह से शवों को ठिकाने नहीं लगा पाया इसीलिए अगले दिन ही बैडरूम में ही एक नियत जगह पर जमीन खोदकर दोनो माँ बेटी को दफन कर दिया और खुदाई वाली जगह पर सीमेंट से प्लास्टर करके उस पर कालीन बिछाकर सोफा रख दिया ताकि कोई भी व्यक्ति इस जगह पर शक न करे।

मृतक प्रिया और उसकी बेटी कशिश
मृतक प्रिया और उसकी बेटी कशिशउदय बुलेटिन

चंचल ने खोज की लेकिन कोई राज नहीं मिला:

हत्याकांड के अगले ही दिन चंचल ने प्रिया से बात करने की कोशिश की लेकिन फोन पर बात नहीं हो पाई दरअसल प्रिया के फोन पर चंचल के नंबर को ब्लैक लिस्ट में डाला गया था ताकि इस मामले पर चंचल कोई भनक न लग सके।जब चंचल ने बात करने की लगातार कोशिश की तो शमशाद ने बात कराने का भी नाटक किया लेकिन शमशाद ने इस बारे में कोई भी ऐसी चीज जाहिर नहीं की जिससे उसका राज खुले। लेकिन चंचल ने इस मामले की तह जानने के लिए शमशाद के पडोसी के फोन पर बात करके जानने की कोशिश भी की जिसमें शमशाद ने पैंतरा बदलते हुए प्रिया के घर से जाने की बात कही और चंचल पर ही बाहर ले जाने का ही आरोप लगाया। इसी दौरान शमशाद ने प्रिया के एकाउंट से कुछ रुपये चेक के माध्यम से निकाले जिससे सबको यह लगे कि यह सब प्रिया के द्वारा ही किया जा रहा है।

चंचल ने पुलिस से लगाई गुहार:

इस मामले में काफी खोजबीन के बाद जब चंचल की प्रिया से बात नहीं हुई तो सबसे पहले चंचल ने परतापुर थाने में इस बारे में लिखित शिकायत की। जिसको लेकर उसे बेहद असहज करने वाली स्थिति का सामना करना पड़ा खुद उत्तर प्रदेश पुलिस के दरोगा वीरसिंह ने चंचल के साथ न सिर्फ अभद्रता की बल्कि केस में तत्परता दिखाने के लिए ऐसी बातें की जो अशोभनीय होने के साथ साथ नैतिक रूप से भी गलत थी। इसके कुछ दिनों बाद ही जब चंचल ने इस मामले पर जानकारी लेनी चाही तो चंचल पर ही दबाव बनाया जाने लगा और इस मामले में प्रिया की सहेली चंचल पर ही आरोप मढ़ने की तैयारी की जाने लगी। चंचल ने उदय बुलेटिन को बताया कि वह हर कीमत में प्रिया को खोजना चाहती थी इसलिए तमाम पुलिसिया हरकतों को सहते हुए ख़ोज जारी रखी लेकिन एक वक्त तो ऐसा आया जब खुद चंचल पर शिकायत वापस लेने के लिए दबाव बनाया गया और ऐसा हुआ भी सामाजिक दबावों और धमकी के बल पर शिकायत वापस भी कराई गई। इस मामले में एक स्थानीय दलाल के द्वारा पुलिस को न सिर्फ गुमराह किया गया था बल्कि शमशाद से 95 हजार रुपये में डील कराने की बात कही गयी थी। लोगों के आरोप है कि इन्वेस्टिगेशन टीम के मुखिया दरोगा वीर सिंह के पास ये रुपये दलाल द्वारा पहुंचाए गए थे। शायद यही कारण था कि पुलिस द्वारा शमशाद को बुलाकर वापस जाने दिया गया।

स्थानीय संगठन हुए फेल, विहिप ने की मदद:

इस मामले में इंसाफ न मिलने पर जब चंचल हार मान बैठी थी उसे प्रिया और वंशिका के साथ हुई अनहोनी का डर था लेकिन बेबसी में कुछ कर नहीं पा रही थी। स्थानीय युवा वाहनी जैसे संगठन पुलिसिया हनक के सामने पीछे हट चुके थे। बकौल चंचल जब सब दरवाजे बंद हो जाते है तो ईश्वर मदद के लिए कोई न कोई हाँथ बढ़ाता ही है एक ओर जहां चंचल 2 जुलाई को पुलिस के दबाव की वजह से समझौते के लिए दस्तखत कर चुकी थी और केस लगभग समाप्त से हो चुका था तभी 12 जुलाई के दिन मनीष लोहिया जो कि विश्व हिंदू परिषद के पदाधिकारी है उन्होंने चंचल की कोशिशों में नया रंग भर दिया।

हालांकि चंचल इस कवायद से पहले ही काफी थक चुकी थी और स्थानीय परतापुर थाने के रवैये से उसे घिन सी आने लगी थी। लेकिन मनीष लोहिया ने इस बारे में चंचल को विश्वास दिलाया की "गुड़िया हम इस मामले को तह तक ले जाएंगे " हालाँकि चंचल के ऊपर घरवालो की चिन्ताएं रास्ता रोके खड़ी थी फिर भी चंचल ने मनीष लोहिया के साथ जाकर एसएसपी ऑफिस में इस मामले की कार्यवाही आगे बढ़ाई। चंचल ने शुरुआत से हर मामले को बयान किया और अधिकारियों को दरोगा वीर सिंह समेत शमशाद की सभी काल रिकार्डिंग सौंपी नतीजन अधिकारियों ने इस कृत्य को आपराधिक मानकर पुलिस टीम को जांच के लिए संस्पेंड़ किया गया और शमशाद की खोजबीन शुरू की गई।

नई पुलिस टीम, शमशाद और खुलासा:

नई पुलिस टीम की मुस्तैदी ने शमशाद के सभी अरमानों पर पानी फेर दिया पुलिस शमशाद की तलाश सरगर्मी से करने लगी। इस दौरान पुलिस के साथ शमशाद का एनकाउंटर हुआ जिसमें शमशाद को पुलिस द्वारा चलाई गई चार गोलिया लगी इसके बाद पूंछताछ में शमशाद ने हत्या से जुड़ा हुआ सारा राज खोल दिया।

शमशाद ने बताया कि उसने सबसे पहले प्रिया का गला घोंटकर मारा और बाद में वंशिका को तकिए की मदद से खत्म किया। पुलिस ने जब गहराई से छानबीन की तो पता लगा कि इस मामले में शमशाद की पहली पत्नी और साले ने भी मदद की। इस बारे में चंचल को भी जानकारी नहीं थी कि इस मामले में पहली पत्नी ने भी अपनी अहम भूमिका निभाई थी खबर लिखे जाने तक शमशाद की पत्नी और साला पुलिस की गिरफ्त से बाहर है।

चंचल और प्रिया और यह सारा मामला:

हमारे द्वारा जो सारा व्रतांत लिखा गया वह पूरा का पूरा चंचल का जुबानी था जिसे हमने अपनी शब्द रचना का रूप दिया लेकिन अब आते है असल मुद्दे पर कि आखिर चंचल ने इतने जोखिम भरे कदम क्यों उठाये ?

बेहद सीधा सा जवाब है चंचल की प्रिया के साथ आत्मीयता! दरअसल प्रिया और वंशिका ने एक लंबा वक्त चंचल के साथ गुजारा था। सो चंचल और प्रिया के बीच हमेशा से बहनों जैसा प्रेम रहा और वंशिका उर्फ कशिश चंचल को अपनी माँ के बराबर स्नेह करती थी। वो बात अलग थी कि वंशिका चंचल को दीदी कहकर बुलाती थी। चूंकि प्रिया का पूर्व में तलाक हो चुका था इसलिए उसका अपने ससुराल और मायके से कोई संबंध नही बचा था शायद यही कारण था कि जब चंचल ने प्रिया के भाई से प्रिया के साथ होने वाली अनहोनी की आशंका व्यक्त की तो उसने इस मामले में न जाने की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया था अब अगर सही मायने में देखा जाए तो इस वक्त में प्रिया का अगर कोई सगा था तो वह थी चंचल।

यहां पर एक बात हम मानवता के नाते कहना चाहेंगे कि चंचल ने जो प्रिया के लिए किया वह न सिर्फ बहुत बड़ा कार्य था बल्कि चंचल ने एक इतिहास रच दिया है। चंचल को पुलिस की वह बातें सहनी पड़ी जो किसी भी संभ्रांत घर की लड़की न तो सुन सकती है न ही सह सकती है। खुद चंचल ने बताया कि वह अगर सुनती है कि कोई पुलिसकर्मी या अधिकारी बयान लेने के लिए आया है तो वह सिहर जाती है।

इस मामले के बाद पुलिस को चाहिए कि वह अपनी पुलिसिंग में बदलाव करे और ऐसी टीमों का गठन करे जो नम्रता के साथ ऐसे मामलों में पेश आये जब हमने चंचल से इस बारे में अपनी तरफ से बात की तो उन्होंने बताया कि अगर उन्हें ऐसे मौके मिलते है कि वह इस तरह के मामलों में शामिल की जाती है तो उन्हें बेहद खुशी होगी। चूंकि चंचल खुद भुक्तभोगी रही है तो पीड़ित का दर्द वो ज्यादा बेहतर समझ सकती है। हम सरकार से उम्मीद करते है कि वो चंचल जैसी बहादुर लड़की को महिला आयोग या ऐसे किसी महकमे मे जगह दे जो अपनी क्षमता से उत्तर प्रदेश पुलिस समेत सरकार का नाम रोशन कर सके।

⚡️ उदय बुलेटिन को गूगल न्यूज़, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें। आपको यह न्यूज़ कैसी लगी कमेंट बॉक्स में अपनी राय दें।

Related Stories

उदय बुलेटिन
www.udaybulletin.com