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कांग्रेस में जो राहुल कहें वही अंतिम सत्य, वफादारों ने कहा गांधी परिवार ही कांग्रेस को एकजुट रख सकता है।

कांग्रेस पिछले कुछ समय से बड़ी उलझन से गुजर रही है, पार्टी अध्यक्ष को लेकर जो खींचा तानी पार्टी के अंदर चल रही थी अब वह खुलकर आम जनता के सामने आ चुकी है लेकिन अब इसमें शामिल झोल सामने निकलकर आ रहे हैं

Shivjeet Tiwari

Shivjeet Tiwari

फिलहाल सोनिया गांधी ही कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष बनी रहेंगी। सीडब्ल्यूसी की बैठक में जो फैसला आया है, उससे स्पष्ट है कि वफादार असंतुष्टों पर भारी पड़े।

बैठक में तय हुआ कि सोनिया गांधी अंतरिम पार्टी प्रमुख बनी रहेंगी, जब तक एक नया अध्यक्ष नहीं चुना जाता है। अगली बैठक छह महीने बाद बुलाई जाएगी।

होगा वही जो परिवार चाहेगा:

जो राहुल कहे वही वेदवाक्य:

अब इसे किसी पार्टी पर परिवार का वर्चस्व कहे या कुछ और लेकिन कांग्रेस में आजकल कुछ ऐसा ही हो रहा है। कांग्रेस में अध्यक्ष पद के लिए होने वाली उठापटक में अब कांग्रेस पार्टी के नेताओं ने नया तोड़ निकाला है जिसके तहत कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी वर्तमान अंतरिम अध्यक्ष बनी रहेगी। दरअसल पिछले कुछ वक्त से पार्टी में मीटिंग्स और अंतर्द्वंद्व का दौर चला आ रहा था और पार्टी अध्यक्ष का कोई सरल रास्ता नहीं निकल पा रहा था। खैर लंबी चली मीटिंग में आखिरकार वही फैसला आया जिसकी सबको उम्मीद थी। पार्टी और परिवार के बीच के अंतर को समझाने में नाकामयाब रहे कांग्रेस के नेता अब सोनिया गांधी को ही पार्टी का नेता मानने पर विवश है।

जिसने पार्टी की बात कही वह भाजपा का एजेंट साबित हुआ:

दरअसल कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद और कपिल सिब्बल जैसे नेताओं ने नेतृत्व में बदलाव की बात करके पार्टी में परिवारवाद से हटकर नए नेता की वकालत की थी। नतीजन नेताओं की इस चिट्ठी ने एक बम का काम किया और पार्टी में परिवार के अंतर को खत्म करने की आखिरी उम्मीद को दफन कर दिया गया। vahin दूसरी तरफ जहां कांग्रेस के कुछ बड़े नेता कांग्रेस पार्टी को एक मजबूत विपक्ष की तौर पर पेश करने की कोशिश कर रहे है लेकिन कांग्रेस पार्टी के नेता और गांधी परिवार के वारिस राहुल गांधी ने इसे परिवार पर हमले की तरह देखकर इसे अलग ही रंग दे दिया। राहुल ने कहा जिन-जिन नेताओं द्वारा इस तरह की बयानबाजी की जा रही है वह दरअसल भाजपा के एजेंट हैं।

पार्टी खो रही अपनी जमीन:

अगर कांग्रेस पार्टी के लंबे इतिहास पर नजर डालकर वर्तमान पर नजर डाले तो पूरे भारत की सत्ता पर काबिज देश की सबसे पुरानी पार्टी आज भारत के नक्शे पर बड़ी बिखरी नजर आती है। मामला यह है कि आज कांग्रेस को एक मजबूत विपक्ष के तौर पर भी नहीं देखा जाता है। लोगों का मानना है कि अगर हालात यही रहे तो जनता में पार्टी को लेकर एक गलत संदेश जाएगा। लेकिन कुछ भी हो पार्टी और परिवार के फेर में पड़े संगठन का हाल बेहाल होना निश्चित है।

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उदय बुलेटिन
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