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इन्दिरा गांधी के कुछ बड़े फैसले, जिसने भारत को बदल दिया था

इंदिरा गांधी अपने फैसलों की वजह से भारत ही नहीं बल्कि एशिया की बड़ी नेताओं मे शुमार थी 

Abhishek

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Summary

  • 1- सबसे ज्यादा राज्य सरकारें इंदिरा गांधी के समय में ही बर्खास्त की गईं।
  • 2- राजाओ के विषेशाधिकार प्रिवी पर्स समाप्त किया।
  • 3- भारत का आंतरिक्ष कार्यक्रम ,यह भी इंदिरा गांधी के द्वारा शुरू किया गया।
  • 4- ब्लूएस्टार के द्वारा सिक्ख अलगाववाद की कमर तोड़ दी।
  • 5- प्रधानमंत्री बनते ही 1969 में 14 बड़े बैंको का राष्ट्रीयकरण किया

कुछ प्रमुख किस्से विस्तार में :

  • बांग्लादेश का एक अलग राष्ट्र के तौर पर उदय-

आजादी के पहले अंग्रेज बंगाल का धार्मिक विभाजन कर गए थे। हिंदू बंगालियों के लिए पश्चिम बंगाल और मुस्लिम बंगालियों के लिए पूर्वी पाकिस्तान बना दिया था। पूर्वी पाकिस्तान की जनता पाकिस्तान की सेना के शासन में घुटन महसूस कर रही थी। उनके पास नागरिक अधिकार नहीं थे।

शेख मुजीबुर रहमान की अगुआई में मुक्ति वाहिनी ने पाकिस्तान की सेना से गृहयुद्ध शुरू कर दिया। नतीजतन भारत के असम में करीब 10 लाख बांगला शरणार्थी पहुंच गए, जिनसे देश में आंतरिक और आर्थिक संकट पैदा हो गया।

इस परिस्थिति के बाद इंदिरा गांधी ने भारतीय सेना को युद्ध का आदेश दे दिया। जब पाकिस्तान युद्द में बुरी तरह पिछड़ने लगा तो वह संयुक्त राष्ट्र की शरण में जाकर युद्ध विराम की अपील करने लगा। लेकिन रूस ने भारत का साथ दिया और पाकिस्तान की अपील पर अपने वीटो पावर का इस्तेमाल किया।

जिसके बाद भारत की सेना ने मुक्तिवाहिनी के साथ मिलकर पाकिस्तान की 90 हजार की सैनिकों वाली सेना को बुरी तरह परास्त कर दिया। परिणामस्वरुप पाकिस्तान को दुसरे विश्व युद्ध के बाद सबसे बड़ा आत्मसमर्पण करना पड़ा।

  • राजा महाराजाओं के प्रिवीपर्स की समाप्ति-

साल 1967 के चुनावों में कई पूर्व रजवाड़ों ने सी राजगोपालाचारी के नेतृत्व में एक अलग पार्टी का गठन कर लिया। इनमें से कई कांग्रेस के बागी नेता थे। इसी के चलते इंदिरा ने प्रविपर्स को खत्म करने का फैसला किया।

प्रिवीपर्स को समाप्त करने के लिए साल 1970 में संविधान में 24वां संसोधन किया गया और उसे इंदिरा गांधी के नेतृत्व में 332-154 के मत से पारित करा लिया गया। हालांकि बाद में यह प्रस्ताव राज्य सभा में 149-75 से पराजित हो गया।1971 के चुनावों में मिली बड़ी जीत के बाद इंदिरा गांधी ने एक बार संविधान में संशोधन कराकर प्रिविपर्स को समाप्त करा दिया। साथ ही राजे महाराजाओं का सारे अधिकार और सहूलियते वापस लें ली।

इस निर्णय के बाद सारे राजे-महाराजे इंदिरा गांधी के खिलाफ हो गए। इंदिरा गांधी ने संसद में कहा कि एक समतावादी समाज की स्थापना के लिए प्रिवीपर्स और विशेष दर्जा जैसे प्रावधान बाधक थे। इस निर्णय से देश में सामंतवादी प्रवृत्तियों के शमन में मदद मिली और लोकतंत्र मजबूत हुआ।

  • आपातकाल -

इन तीन बड़े निर्णयों के कारण इंदिरा गांधी को आयरन लेडी कहा जाने लगा। बांगलादेश का उदय इंदिरा गांधी के राजनीतिक जीवन की की सहसे बड़ी सफलता थी। लेकिन वहीं 1975 में रायबरेली के चुनाव में गड़बड़ी के आरोप और जेपी द्वारा संपूर्ण क्रांति के नारे के अंतर्गत समूचे विपक्ष ने एकजुट होकर इंदिरा गांधी की सत्ता के खिलाफ संघर्ष छेड़ दिया। इस पर इंदिरा गांधी ने आपातकाल लगा दिया। आपातकाल में नागरिक अधिकार रद्द हो गए और प्रेस और मीडिया पर सेंसरशिप लागू हो गई। कई विपक्षी नेता जेल भेज दिए गए। संजय गांधी के नेतृत्व में जबरन नसबंदी अभियान और सत्ता पक्ष द्वारा दमन के कारण आपातकाल को इंदिरा गांधी के राजनीतिक जीवन का निम्न बिंदु कहा जाने लगा।

1974 में परमाणु परीक्षण यह भले ही काम तीव्रता का था, पर इससे भारत का परमाणु ताकत के रूप में उदय हुआ।